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Essay on Environment Pollution in hindi//पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध

 पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध //Essay on Environment Pollution


पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध (Essay in Hindi)

Paryavaran pradushan par nibandh

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आपसे बोर्ड परीक्षा में इस प्रकार से प्रश्न पूछें जायेगे


प्रश्न 1. प्रदूषण की समस्या और समाधान पर निबंध लिखे।।


प्रश्न 2. पर्यावरण एवम स्वास्थ , पर निबंध लिखे अपने शब्दो मे।।


प्रश्न 3. पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध लिखे।।


प्रश्न 4. पर्यावरण की समस्या पर निबंध लिखे।



अब हम आपको आपके बोर्ड परीक्षा में पूछे जाने वाले सभी प्रश्नों पर निबंध लिखना बताएंगे हमारी पोस्ट को पूरा जरूर पढ़ें यदि आपको पोस्ट पसन्द आए तो अपने दोस्तो को भी शेयर करें


नमस्कार दोस्तों अब हम आपको पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध लिखना शिखा रहे है


   

   पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध



प्रस्तावना: विज्ञान के युग में मानव को जहां कुछ वरदान मिले हैं, वहां कुछ अभिशाप भी मिले हैं। प्रदूषण एक ऐसा अभिशाप है जो विज्ञान की कोख में से जन्मा है और  पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध (Essay in Hindi सहने के लिए अधिकांश जनता मजबूर है।



प्रदूषण का अर्थ -प्रदूषण का अर्थ है-प्राकृतिक संतुलन में दोष पैदा होना। ना शुद्ध वायु मिलना, ना शुद्ध जल मिलना, ना शुद्ध खाद मिलना, न शांत वातावरण मिलना।



पर्यावरण का अर्थ- पर्यावरण प्रदूषण को समझने से पूर्व यह समझना जरूरी है कि पर्यावरण क्या है, और हमें कैसे प्रभावित करता है। हर्सकोविट्स के शब्दों में -



"पर्यावरण संपूर्ण वह परिस्थितियों एवं प्रभावों का जीव धारियों पर पड़ने वाला संपूर्ण प्रभाव है जो उनके जीवन विकास एवं कार्य को प्रभावित करता है।



पर्यावरण प्रदूषण आज हमारे ग्रह पर मान्यता और अन्य जीवन रूपों को सामना करने वाली सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। पर्यावरण प्रदूषण को पृथ्वी/ वायु मंडल प्रभाली के भौतिक और जैविक घटकों के संदूषण के रूप में परिभाषित किया जाता है। सामान पर्यायवाची प्रक्रियाएं प्रतिकूल रूप से प्रभावित होती हैं प्रदूषक प्राकृतिक रूप से पदार्थ या ऊर्जा हो सकते हैं लेकिन अधिक मात्रा में होने पर उन्हें दूषित माना जाता है प्राकृतिक संसाधनों की किसी भी कदर का उपयोग प्राकृतिक द्वारा स्वयं को पुनः स्थापित करने की क्षमता से अधिक होने पर वायु जल और भूमि के प्रदूषण का परिणाम हो सकता है।



पर्यावरण प्रदूषण के कारण और स्त्रोत



औद्योगिक गतिविधि



दुनिया भर के उद्योग भले ही वे संपन्नता और इस मृदुल आई है लेकिन पारिस्थितिक संतुलन को लगातार बिगड़ रहे हैं और जीवमंडल का नाश कर रहे हैं , वैज्ञानिक प्रयोगों का प्रक्षेपण, धुअ का गुबार, औद्योगिक अपशिष्ट और विषैली गैस से पानी और हवा दोनों को दूषित करते हैं। औद्योगिक की कचरे का अनुच्छेद निपटान जल और मृदा प्रदूषण दोनों का स्त्रोत बन गया है। विभिन्न उद्योगों से निकलने वाले रासायनिक कचरे से नदियों झीलों समुद्रों और धमाके छोड़ो जाने के माध्यम से मिट्टी और हवा में प्रदूषण फैल रहा है।



वाहन



डीजल और पेट्रोल का उपयोग करने वाले वाहन विषैली गैसों को वायुमंडल में लीन करते हैं और कोयले को पकाने से जो दूंगा निकलता है वह भी सीधे हमारे पर्यावरण में जाकर उसको प्रदूषित करता है सड़कों पर वाहनों की संख्या में तेजी से वृद्धि ने केवल हुए के उत्सर्जन को सहायता नहीं दी है बल्कि उस हवा को भी प्रदूषित किया है जिसमें हम सांस लेते हैं इन विभिन्न वाहनों का धुआं काफी हानिकारक है और वायु प्रदूषण का प्राथमिक कारण है यह वाहन वायु प्रदूषण तो करते ही हैं साथ ही ध्वनि प्रदूषण के भी मुख्य कारण हैं।



तीव्र औद्योगिकीकरण और शहरीकरण



शहरीकरण की तेजी और औद्योगिकीकरण की व्यापकता भी पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख कारण है क्योंकि वे पेड़ पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं जिससे सामूहिक रूप से जानवरों मनुष्य और पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंच रहा है।



जनसंख्या अतिवृद्धि



विकासशील देशों में देरी से जनसंख्या में वृद्धि हुई है बुनियादी भोजन और आश्रय की मांग बढ़ रही है, उच्च मांग के कारण जनसंख्या की बढ़ती संख्या और मांग को पूरा करने के लिए वनों की कटाई तेज हो गई है।



जीवाश्म ईंधन और दहन



जीवाश्म के ईधनो का लगातार बहन कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी विषैली गैसों के माध्यम से मिट्टी हवा और पानी के प्रदूषण का स्त्रोत है।



प्रदूषण के प्रकार का होता है! प्रमुख प्रदूषण है वायु- प्रदूषण ,जल प्रदूषण ,ध्वनि- प्रदूषण।




वायु प्रदूषण - महानगरों में है प्रदूषण अधिक फैला है। वह 24 घंटे कल -कारखानों का धुआं मोटर- वाहनों का काला दूंगा इस तरह फैल गया है कि स्वस्थ वायु में सांस लेना दूभर हो गया है। मुंबई की महिलाएं धोए हुए वस्त्र छात्र से उतारने जाते हैं तो उन पर काले काले कण जमे हुए पाती हैं। यह कण सांस के साथ मनुष्य के फेफड़ों में चले जाते हैं और असाध्य रोगों को जन्म देते हैं यह समस्या वहां अधिक होती है जहां सघन आबादी होती है वृक्षों का अभाव होता है और वातावरण तंग होता है।



जल प्रदूषण - कल कारखानों को दूषित जल नदी नालों में मिलकर भयंकर जल प्रदूषण पैदा करता है। बाढ़ के समय तो कारखानों का दुर्गधित्य जल सब नाली- नालों में घुल मिल जाता है। किस के अनेक बीमारियां पैदा होते हैं।



ध्वनि प्रदूषण - मनुष्य को रहने के लिए शांत वातावरण चाहिए। परंतु आजकल कल -कारखानों का शोर , यातायात का शोर, मोटर- गाड़ियों की आवाज लाउड स्पीकरों की कर्णभेदक ध्वनि धोनी ने बहरेपन और तनाव को जन्म दिया है।



मृदा प्रदूषण (soil pollution)



खेती में अत्यधिक मात्रा में उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग से मृदा प्रदूषण होता है। साथ ही प्रदूषित मिट्टी में उपजे अन्य खाकर मनुष्यों एवं अन्य जीव-जंतुओं के सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसकी सतह पर रहने वाले जल में भी है, प्रदूषण फैल जाता है।



प्रदूषण के दुष्परिणाम : उपर्युक्त बस दूसरों के कारण मानव के स्वस्थ जीवन को खतरा पैदा हो गया है। खुली हवा में लंबी सांस लेने तक को तरस गया है आदमी। गंदे जल के कारण कई बीमारियां फसलों में चली जाती हैं जो मनुष्य के शरीर में पहुंचकर घातक बीमारियां पैदा करते हैं। भोपाल गैस कारखाने से रिसी गैस के कारण हजारों लोग मर गए, कितने ही अपंग हो गए। पर्यावरण- प्रदूषण के कारण ना समय पर वर्षा आती है, ना सर्दी गर्मी का चक्र ठीक चलता है सूखा, बाढ़, ओला आदि प्राकृतिक प्रकोप का कारण भी प्रदूषण है।




प्रदूषण के कारण - प्रदूषण को बढ़ाने में कल कारखाने, वैज्ञानिक साधनों का अधिक उपयोग फ्रिज कूलर वातनूकूलर, ऊर्जा संयंत्र आदि दोषी है प्राकृतिक संतुलन का विवरण अभी मुख्य कारण है वृक्षों को अंधाधुन काटने से मौसम का चक्कर बिगड़ा है घनी आबादी वाले क्षेत्रों में हरियाली ना होने से भी प्रदूषण बड़ा है।



सुधार के उपाय - विभिन्न प्रकार के प्रदूषण से बचने के लिए चाहिए कि अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाएं, हरियाली की मात्रा अधिक हो। सड़कों के किनारे घने वृक्ष हो । आबादी वाले क्षेत्र खुले हो, हवादार हो, हरियाली से ओतप्रोत हो। कल कारखानों को आबादी से दूर रहना चाहिए और उन से निकले प्रदूषित वायु को नष्ट करने के उपाय सोचना चाहिए।



उपसंहार



पर्यावरण वह प्रवेश है जिसमें हम रहते हैं। लेकिन प्रदूषण द्वारा हमारे पर्यावरण का प्रदूषित होना पर्यावरण प्रदूषण है। पृथ्वी का वर्तमान चरण जो हम देख रहे हैं। वह पृथ्वी और उसके संसाधनों के सदियों के शोषण का परिणाम है।



इसके अलावा पर्यावरण प्रदूषण के कारण पृथ्वी अपना संतुलन खो सकती है, मानव बल ने पृथ्वी पर जीवन का निर्माण और विनाश किया है। मानव पर्यावरण के शरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है



प्रदूषण को रोकना बहुत अहम है पर्यावरण प्रदूषण आज की बहुत बड़ी समस्या है, इसे यदि वक्त पर नहीं रोका गया तो हमारा समूल नाश होने से कोई नहीं बचा सकता पृथ्वी पर उपस्थित कोई भी प्राणी इसके प्रभाव से अछूता नहीं रह सकता। पेड़ -पौधों, पशु -पक्षी आदि सभी का जीवन हमारे कारण खतरे में पड़ा है। इनके जीवन की रक्षा भी हमें ही करनी है इनके अस्तित्व से ही हमारा अस्तित्व संभव है।

           

अभी आपने हमारी पोस्ट में पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध देखा है अब हम आपको प्रदूषण पर निबंध लिखना सिखाएंगे यदि पोस्ट पसन्द आ रही हो तो अपने दोस्तो को भी शेयर करें पोस्ट को पूरा जरूर पढ़ें

                           2.


 प्रदूषण की समस्या और समाधान 

 

               या


पर्यावरण एवं स्वास्थ्य या प्रदूषण तथा मानव समाज 

                      या

 पर्यावरण प्रदूषण या प्रदूषण की समस्या




रूपरेखा—(1) प्रस्तावना, (2) प्रदूषण का अर्थ, (3) प्रदूषण के प्रकार, (4) प्रदूषण की समस्या तथा इससे हानियाँ, (5) समस्या का समाधान, (6) उपसंहार।


प्रस्तावना—आज का मानव औद्योगीकरण के जंजाल में फँसकर स्वयं भी मशीन का एक ऐसा निर्जीव पुर्जा बनकर रह गया है कि वह अपने पर्यावरण की शुद्धता का ध्यान भी न रख सका। अब एक और नयी समस्या उत्पन्न हो गयी है


वह है प्रदूषण की समस्या। इस समस्या की ओर आजकल सभी देशों का ध्यान केन्द्रित है। इस समय हमारे समक्ष सबसे बड़ी चुनौती पर्यावरण को बचाने की है; क्योंकि पानी, हवा, जंगल, मिट्टी आदि सब-कुछ प्रदूषित हो चुका है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण का महत्त्व बताया जाना चाहिए; क्योंकि यही हमारे अस्तित्व का आधार है। यदि हमने इस असन्तुलन को दूर नहीं किया तो आने वाली पीढ़ियाँ अभिशप्त जीवन जीने को बाध्य होंगी और पता नहीं, तब मानव जीवन होगा भी या नहीं।


प्रदूषण का अर्थ– संतुलित वातावरण में ही जीवन का विकास सम्भव है।पर्यावरण का निर्माण प्रकृति के द्वारा किया गया है। प्रकृति द्वारा प्रदत्त पर्यावरण जीवधारियों के अनुकूल होता है। जब वातावरण में कुछ हानिकारक घटक आ जाते हैं तो वे वातावरण का सन्तुलन बिगाड़कर उसको दूषित कर देते हैं। यह गन्दा वातावरण जीवधारियों के लिए अनेक प्रकार से हानिकारक होता है। इस प्रकार वातावरण के दूषित हो जाने को ही प्रदूषण कहते हैं। जनसंख्या की असाधारण वृद्धि और औद्योगिक प्रगति ने प्रदूषण की समस्या को जन्म दिया है। और आज इसने इतना विकराल रूप धारण कर लिया है कि उससे मानवता के विनाश का संकट उत्पन्न हो गया है।


प्रदूषण के प्रकार-आज के वातावरण में प्रदूषण इन रूपों में दिखाई देता है—


(1.) वायु प्रदूषण–वायु जीवन का अनिवार्य स्रोत है। प्रत्येक प्राणी को स्वस्थ रूप से जीने के लिए शुद्ध वायु अर्थात् ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, जिस कारण वायुमण्डल में इसकी विशेष अनुपात में उपस्थिति आवश्यक है। जीवधारी साँस द्वारा ऑक्सीजन ग्रहण करता है और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है। पेड़-पौधे कार्बन डाइ-ऑक्साइड ग्रहण कर हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। इससे वायुमण्डल में शुद्धता बनी रहती है। आजकल वायुमण्डल में ऑक्सीजन गैस का सन्तुलन बिगड़ गया है और वायु अनेक हानिकारक गैसों से प्रदूषित हो गयी है।


(2.) जल प्रदूषण-जल को जीवन कहा जाता है और यह भी माना जाता है कि जल में ही सभी देवता निवास करते हैं। इसके बिना जीव-जन्तु और पेड़-पौधों का भी अस्तित्व नहीं है। फिर भी बड़े-बड़े नगरों के गन्दे नाले और सीवर नदियों में मिला दिये जाते हैं। कारखानों का सारा मैला बहकर नदियों के जल में आकर मिलता है। इससे जल प्रदूषित हो गया है और उससे भयानक बीमारियाँ उत्पन्न हो रही हैं, जिससे लोगों का जीवन ही खतरे में पड़ गया है।


(3.) ध्वनि प्रदूषण-ध्वनि प्रदूषण भी आज की नयी समस्या है। इसे वैज्ञानिक प्रगति ने पैदा किया है। मोटर, कार, ट्रैक्टर, जेट विमान, कारखानों के रसायरन, मशीने तथा लाउडस्पीकर ध्वनि के सन्तुलन को बिगाड़कर ध्वनि-प्रदूषण उत्पन्न करते हैं। अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण से मानसिक विकृति, तीव्र क्रोध, अनिद्रा एवं चिड़चिड़ापन जैसी मानसिक समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं। 



(4.) रेडियोधर्मी प्रदूषण-आज के युग में वैज्ञानिक परीक्षणों का जोर है। परमाणु परीक्षण निरन्तर होते ही रहते हैं। इसके विस्फोट से रेडियोधर्मी पदार्थ सम्पूर्ण वायुमण्डल में फैल जाते हैं और अनेक प्रकार से जीवन को क्षति पहुँचाते हैं।


(5.) रासायनिक प्रदूषण-कारखानों से बहते हुए अपशिष्ट द्रव्यों के अलावा रोगनाशक तथा कीटनाशक दवाइयों से और रासायनिक खादों से भी स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ये पदार्थ पानी के साथ बहकर जीवन को अनेक प्रकार से हानि पहुँचाते हैं।


प्रदूषण की समस्या तथा इससे हानियाँ- बढ़ती हुई जनसंख्या और औद्योगीकरण ने विश्व के सम्मुख प्रदूषण की समस्या पैदा कर दी है। कारखानों के धुएँ से, विषैले कचरे के बहाव से तथा जहरीली गैसों के रिसाव से आज मानव-जीवन समस्याग्रस्त हो गया है। इस प्रदूषण से मनुष्य जानलेवा बीमारियों  का शिकार हो रहा है। कोई अपंग होता है तो कोई बहरा, किसी की दृष्टि शक्ति नष्ट हो जाती है तो किसी का जीवन। विविध प्रकार की शारीरिक विकृतियाँ,मानसिक कमजोरी, असाध्य कैंसर व ज्वर इन सभी रोगों का मूल कारण विषैला वातावरण ही है।


समस्या का समाधानवातावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए वृक्षारोपण सर्वश्रेष्ठ साधन है। दूसरी ओर, वृक्षों के अधिक कटान पर भी रोक लगायी जानी चाहिए। कारखाने और मशीनें लगाने की अनुमति उन्हीं लोगों को दी जानी चाहिए जो औद्योगिक कचरे और मशीनों के धुएँ को बाहर निकालने की समुचित व्यवस्था कर सकें। संयुक्त राष्ट्र संघ को चाहिए कि वह परमाणु परीक्षणों को नियन्त्रित करने की दिशा में उचित कदम उठाए। तेज ध्वनि वाले वाहनों पर साइलेंसर आवश्यक रूप से लगाये जाने चाहिए तथा सार्वजनिक रूप से लाउडस्पीकरों आदि के प्रयोग को नियन्त्रित किया जाना चाहिए। जल-प्रदूषण को नियन्त्रित करने के लिए औद्योगिक संस्थानों में ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए कि व्यर्थ पदार्थों एवं जल को उपचारित करके ही बाहर निकाला जाए तथा इनको जल-स्रोतों में मिलने से रोका जाना चाहिए।


उपसंहार–  प्रसन्नता की बात है कि भारत सरकार प्रदूषण की समस्या के प्रति जागरूक है। उसने 1974 ई० में 'जल-प्रदूषण निवारण अधिनियम लागू किया था। इसके अन्तर्गत एक 'केन्द्रीय बोर्ड' तथा प्रदेशों में प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड' गठित किये गये हैं। इसी प्रकार नये उद्योगों को लाइसेंस देने और वनों की कटाई रोकने की दिशा में कठोर नियम बनाये गये हैं। इस बात के भी प्रयास किये जा रहे हैं कि नये वन-क्षेत्र बनाये जाएँ और जन-सामान्य को वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित किया जाए। न्यायालय द्वारा प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को महानगरों से बाहर ले जाने के आदेश दिये गये हैं। यदि जनता भी अपने ढंग से इन कार्यक्रमों में सक्रिय सहयोग दे और यह संकल्प ले कि जीवन में आने वाले प्रत्येक शुभ अवसर पर कम-से-कम एक वृक्ष अवश्य लगाएगी तो निश्चित ही हम प्रदूषण के दुष्परिणामों से बच सकेंगे और आने वाली पीढ़ी को भी इसको काली छाया से बचाने में समर्थ हो सकेंगे।



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