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कक्षा 10 हिंदी अर्धवार्षिक परीक्षा पेपर 2026 | Class 10 Hindi Half Yearly Paper Leaked

Class 10 Hindi Half Yearly Paper 2026 with Solution | कक्षा 10 हिंदी अर्धवार्षिक पेपर PDF

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🔥 Original Paper PP6-7 - समय: 3.00 घंटे | पूर्णांक: 70 | विषय-हिन्दी | खण्ड-अ वस्तुनिष्ठ प्रश्न
नोट: (क) प्रश्न पत्र दो खण्डों 'अ' एवं 'ब' में विभाजित है। (ख) खण्ड 'अ' में वस्तुनिष्ठ प्रश्न तथा खण्ड 'ब' में वर्णनात्मक प्रश्न हैं।
Paper Details - Class 10 Hindi Half Yearly 2026
बोर्डUP Board
कक्षा10
पेपर कोडPP6-7
समय3.00 घंटे
पूर्णांक70

[ खण्ड-अ ] वस्तुनिष्ठ प्रश्न - 20 प्रश्न x 1 अंक = 20 अंक - Answer Key ✅

1. 'सूरज का सातवाँ घोड़ा' हिन्दी साहित्य की कौन-सी विधा है?
अ) निबन्ध ब) उपन्यास ✅ स) डायरी द) कविता
सही उत्तर: ब) उपन्यास - लेखक धर्मवीर भारती

2. आधुनिककाल की समय-अवधि है
अ) 1850 ई० से 1900 तक ब) 1900 ई० से 1920 तक स) 1919 ई० से 1938 तक द) 1843 ई० से वर्तमान तक ✅
सही उत्तर: द) 1843 ई० से वर्तमान तक

3. 'त्यागपत्र' किस विधा की रचना है?
अ) जीवनी ब) उपन्यास ✅ स) नाटक द) निबन्ध
सही उत्तर: ब) उपन्यास - जैनेन्द्र कुमार

4. रसखान किस काल की किस शाखा के कवि हैं?
अ) रीतिकाल की कृष्णभक्ति शाखा ब) भक्तिकाल की निर्गुण-भक्ति शाखा स) भक्तिकाल की सगुण-भक्ति शाखा ✅ द) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: स) भक्तिकाल की सगुण-भक्ति शाखा (कृष्णभक्ति)

5. छायावादी युग के प्रमुख लेखक हैं
अ) यशपाल ब) वृन्दावनलाल वर्मा स) रामकुमार वर्मा ✅ द) भारतेंदु हरिश्चन्द्र
सही उत्तर: स) रामकुमार वर्मा (एकांकीकार)

6. 'राज्यश्री' के रचनाकार का नाम है-
अ) गुलाबराय ब) जयशंकर प्रसाद ✅ स) जयप्रकाश भारती द) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: ब) जयशंकर प्रसाद

7. शुक्ल युग की कालावधि है-
अ) 1850 ई० से 1900 तक ब) 1900 ई० से 1920 तक स) 1919 ई० से 1938 तक ✅ द) 1938 ई० से 1947 तक
सही उत्तर: स) 1919 ई० से 1938 तक

8. शुक्ल युग के प्रमुख इतिहासकार हैं-
अ) डॉ० नगेन्द्र ब) हजारी प्रसाद द्विवेदी स) बाबू गुलाबराय ✅ द) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: स) बाबू गुलाबराय

9. मैला आँचल के रचनाकार हैं-
अ) मोहन राकेश ब) फणीश्वरनाथ रेणु ✅ स) प्रेमचन्द द) जयशंकर प्रसाद
सही उत्तर: ब) फणीश्वरनाथ रेणु - आंचलिक उपन्यास

10. जयशंकर प्रसाद का नाटक नहीं है-
अ) ध्रुवस्वामिनी ब) चन्द्रगुप्त स) लहरों के राजहंस ✅ द) स्कन्दगुप्त
सही उत्तर: स) लहरों के राजहंस - मोहन राकेश का है

11. पंच परमेश्वर कहानी के लेखक हैं-
अ) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ब) प्रेमचन्द ✅ स) यशपाल द) राजेन्द्र यादव
सही उत्तर: ब) प्रेमचन्द

12. 'गेहूँ बनाम गुलाब' किसकी रचना है-
अ) रामविलास शर्मा ब) रामवृक्ष बेनीपुरी ✅ स) प्रेमचन्द द) महादेवी वर्मा
सही उत्तर: ब) रामवृक्ष बेनीपुरी - निबंध

13. 'साकेत' महाकाव्य की रचना किसने की-
अ) मैथिलीशरण गुप्त ✅ ब) जयशंकर प्रसाद स) हरिऔध द) कबीरदास
सही उत्तर: अ) मैथिलीशरण गुप्त - 12 सर्ग, राम कथा

14. रीतिमुक्त काव्यधारा की रचना है-
अ) सुजान सागर ✅ ब) बिहारी सतसई स) ललित ललाम द) काव्य निर्णय
सही उत्तर: अ) सुजान सागर - घनानंद की रचना, रीतिमुक्त

15. प्रगतिवादी युग की कालावधि है-
अ) 1936 ई० से 1943 ई० तक ✅ ब) 1850 ई० से 1900 ई० तक स) 1943 ई० से 1953 ई० तक द) 1953 ई० से 1960 ई० तक
सही उत्तर: अ) 1936 ई० से 1943 ई० तक

16. 'पद्माभरण' के रचयिता हैं-
अ) सेनापति ब) केशव स) पद्माकर ✅ द) भूषण
सही उत्तर: स) पद्माकर - रीतिकाल के अंतिम आचार्य

17. बिहारी किस युग के कवि हैं-
अ) आधुनिक काल ब) रीतिकाल ✅ स) भक्तिकाल द) आदिकाल
सही उत्तर: ब) रीतिकाल - रीतिसिद्ध धारा

18. उपन्यास 'भूले-बिसरे चित्र' के लेखक हैं-
अ) प्रेमचन्द ब) भगवतीशरण वर्मा ✅ स) यशपाल द) वृन्दावन लाल वर्मा
सही उत्तर: ब) भगवतीशरण वर्मा (भगवतीचरण वर्मा) - साहित्य अकादमी

19. घनानन्द किस काव्यधारा के कवि हैं-
अ) रीतिबद्ध ब) रीतिसिद्ध स) रीतिमुक्त ✅ द) आधुनिक काल
सही उत्तर: स) रीतिमुक्त - प्रेम की पीर के कवि

20. रीतिकाल के वीर रस के प्रसिद्ध कवि हैं-
अ) देव ब) घनानंद स) भूषण ✅ द) बिहारी
सही उत्तर: स) भूषण - शिवाजी और छत्रसाल के कवि

OMR Answer Key - PP6-7 - 20 Questions

प्रश्न12345678910
उत्तरBDBCCBCCBC
प्र


[ खण्ड-ब : वर्णनात्मक प्रश्न ] - 50 अंक - सम्पूर्ण हल

21. निम्न गद्यांशों में से किसी एक के नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए। (6 अंक)
(क) गद्यांश:
"अश्वारोही पास आया, ममता ने रुक-रुक कर कहा, “मैं नहीं जानती कि वह शहंशाह था या साधारण मुगल, पर एक दिन इसी झोंपड़ी के नीचे वह रहा। मैंने सुना था कि वह मेरा घर बनवाने की आज्ञा दे चुका था। मैं आजीवन अपनी झोंपड़ी के खोदे जाने के डर से भयभीत रही। भगवान ने सुन लिया, मैं आज इसे छोड़े जाती हूँ, तुम इसका मकान बनाओ या महल, मैं अपने चिर विश्राम गृह में जाती हूँ।”"

अ) प्रस्तुत अवतरण का संदर्भ लिखिए। (2 अंक)
उत्तर: प्रस्तुत अवतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक 'हिन्दी' के गद्य-खण्ड की कहानी ‘ममता’ से लिया गया है। इसके लेखक जयशंकर प्रसाद जी हैं। प्रसाद जी छायावाद के प्रवर्तक, प्रसिद्ध कहानीकार और नाटककार हैं। इस कहानी में मुगलकाल की पृष्ठभूमि पर एक बूढ़ी विधवा ब्राह्मणी ममता के त्याग और आत्म-सम्मान का चित्रण है। एक मुगल अश्वारोही जब उसकी झोंपड़ी के पास आता है, तब ममता जीवन के अंतिम क्षणों में यह कथन कहती है।

ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। (3 अंक)
उत्तर: बूढ़ी ममता अश्वारोही से कहती है कि वह नहीं जानती कि उसकी झोंपड़ी में एक दिन शरण लेने वाला व्यक्ति शहंशाह था या कोई साधारण मुगल सैनिक। परन्तु उसने सुना था कि वह सम्राट उसकी इस टूटी-फूटी झोंपड़ी को तुड़वाकर यहाँ पक्का घर बनवाना चाहता है। इसी कारण वह जीवन भर इस भय से भयभीत रही कि कहीं उसकी झोंपड़ी न खोद दी जाए, क्योंकि यह झोंपड़ी ही उसके पति की अंतिम निशानी और उसके सतीत्व की प्रतीक है। आज वह मृत्यु-शय्या पर है, इसलिए कहती है कि अब तुम चाहे यहाँ मकान बनाओ या महल, मुझे कोई चिंता नहीं, मैं तो अब अपने चिर विश्राम गृह अर्थात् मृत्यु लोक / मोक्ष की ओर जा रही हूँ।
विशेष: 1) ममता का अपनी झोंपड़ी के प्रति अगाध प्रेम। 2) भारतीय नारी के आत्म-सम्मान और त्याग का चित्रण। 3) भाषा सरल, भावपूर्ण, करुण रस से ओतप्रोत।

स) शहंशाह शब्द किसके लिए प्रयोग किया गया है? (1 अंक)
उत्तर: 'शहंशाह' शब्द मुगल सम्राट हुमायूँ के लिए प्रयोग किया गया है। कथा के अनुसार शेरशाह सूरी से पराजित होने के बाद हुमायूँ एक रात ममता की झोंपड़ी में शरण लिए था। उसी ने बाद में कृतज्ञता स्वरूप वहाँ मकान बनवाने की आज्ञा दी थी। कुछ पुस्तकों में इसे अकबर के लिए भी माना जाता है, पर मूल रूप में यह मुगल बादशाह के लिए ही प्रयुक्त है।

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खण्ड-ब : वर्णनात्मक प्रश्न (50 अंक) 

21. (ख) अथवा - गद्यांश - धर्मचक्र विहार - 6 अंक
गद्यांश: "काशी के उत्तर में धर्मचक्र विहार मौर्य और गुप्त सम्राटों की कीर्ति का खण्डहर था। भग्न चूड़ा, तृण-गुल्मों से ढके हुए प्राचीर, ईंटों के ढेर में बिखरी हुई भारतीय शिल्प की विभूति, ग्रीष्म की चन्द्रिका में अपने को शीतल कर रही थी। जहाँ पंचवर्गीय भिक्षु गौतम का उपदेश ग्रहण करने के लिए पहले मिले थे, उसी स्तूप के भग्नावशेष की मलिन छाया में एक झोंपड़ी के दीपलोक में एक स्त्री पाठ कर रही थी - 'अन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जना: पर्युपासते।'"

अ) उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए। (2 अंक)
उत्तर: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के गद्य खण्ड के 'धर्मचक्र परिवर्तन' या 'काशी-धर्मचक्र विहार' नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक जयशंकर प्रसाद / आचार्य रामचन्द्र शुक्ल (आपके कोर्स के अनुसार) हैं। इसमें लेखक ने सारनाथ स्थित धर्मचक्र विहार के खण्डहरों का वर्णन किया है जो मौर्य और गुप्त काल की गौरव गाथा का प्रतीक है।

ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। (3 अंक)
उत्तर: रेखांकित अंश - "भग्न चूड़ा, तृण-गुल्मों से ढके हुए प्राचीर... शीतल कर रही थी।"
व्याख्या: लेखक कहता है कि काशी के उत्तर में स्थित धर्मचक्र विहार आज खण्डहर बन चुका है। उसके शिखर टूटे हुए हैं, चारदीवारी घास-फूस से ढकी है और ईंटों के ढेर में भारत की प्राचीन शिल्प कला बिखरी पड़ी है। गर्मी की चाँदनी रात में यह खण्डहर अपनी शीतलता बिखेर रहा है। यह दृश्य भारत के गौरवमय अतीत और वर्तमान दुर्दशा दोनों को दर्शाता है।
दूसरा रेखांकित - "अन्याश्चिन्तयन्तो मां..." - यह गीता का श्लोक है जिसका अर्थ है जो अनन्य भाव से मेरा चिंतन करते हैं, मैं उनका योग-क्षेम वहन करता हूँ। स्त्री इसी श्लोक का पाठ कर रही थी, जो उसकी भक्ति और समर्पण को दिखाता है।

स) धर्मचक्र कहाँ स्थित था? (1 अंक)
उत्तर: धर्मचक्र विहार काशी (वाराणसी) के उत्तर में सारनाथ में स्थित था। यहीं भगवान बुद्ध ने पंचवर्गीय भिक्षुओं को पहला उपदेश (धर्मचक्र प्रवर्तन) दिया था।

22. निम्न पद्यांशों में से किसी एक के नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए। (6 अंक)
(क) पद्यांश:
"धूरि भरे अति सोभित स्यामजू, तैसी बनी सिर सुंदर चोटी।
खेलत खात फिरै अँगना, पग पैजनी बाजति पीरी कछोटी।
वा छबि को रसखानि विलोकत, वारत काम कला निज कोटी।
काग के भाग बड़े सजनी हरि हाथ सौं ले गयो माखन रोटी॥"

अ) प्रस्तुत पद्य की ससंदर्भ हिन्दी में व्याख्या कीजिए तथा काव्य सौंदर्य भी स्पष्ट कीजिए। (4 अंक)
उत्तर:
संदर्भ: प्रस्तुत पद हमारी पाठ्य-पुस्तक के पद्य खण्ड के ‘रसखान’ द्वारा रचित 'सवैया' से लिया गया है। रसखान भक्तिकाल की सगुण कृष्णभक्ति शाखा के कवि हैं। इसमें बालक कृष्ण की बाल-लीला का वर्णन है।
व्याख्या: कवि कहता है कि धूल से सने हुए श्यामसुंदर अत्यंत शोभित हो रहे हैं, सिर पर सुंदर चोटी बनी है। वे पीली कछनी पहने, पैरों में पैंजनी (घुंघरू) बजाते हुए आँगन में खेलते-खाते फिर रहे हैं। रसखान कहते हैं कि इस छवि को देखकर वे अपनी करोड़ों कामदेव की कला को भी न्यौछावर कर देते हैं। हे सखी! उस कौए के बड़े भाग्य हैं जो हरि के हाथ से माखन-रोटी छीनकर उड़ गया।
काव्य सौंदर्य: 1) वात्सल्य रस, ब्रजभाषा, सवैया छंद। 2) अनुप्रास, उपमा अलंकार। 3) बाल कृष्ण की स्वाभाविक चेष्टाओं का मनोहारी चित्रण।

ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: "वा छबि को रसखानि विलोकत, वारत काम कला निज कोटी।" - अर्थात् बाल कृष्ण की उस मनोहर छवि को देखकर कवि रसखान अपनी करोड़ों कामदेवों की सुंदरता भी न्यौछावर कर देते हैं। अर्थात् कृष्ण की बाल छवि करोड़ों कामदेवों से भी सुंदर है।

स) बालक कृष्ण के हाथ से माखन-रोटी छीनकर उड़ जाने वाले कौए को कवि ने भाग्यशाली क्यों कहा है?
उत्तर: क्योंकि उस कौए को साक्षात् भगवान श्रीकृष्ण के कर-कमलों का स्पर्श प्राप्त हुआ और उनके हाथ की माखन-रोटी खाने को मिली, जो बड़े-बड़े ऋषि-मुनियों को भी दुर्लभ है। इसलिए उसका भाग्य बड़ा है।

(ख) अथवा - पद्यांश:
"सुनि सुंदर बैन सुधारस-साने, सयानी हैं जानकी जानी भली।
तिरछे करि नैन दै सैन तिन्हैं, समुझाइ कछू मुसकाइ चली॥
तुलसी तेहिं औसर सोहैं सबै, अवलोकति लोचन-लाहु अली।
अनुराग-तड़ाग में भानु उदै, बिगसी मनो मंजुल कंज-कली॥"

अ) ससंदर्भ व्याख्या + काव्य सौंदर्य
उत्तर:
संदर्भ: प्रस्तुत पद तुलसीदास कृत ‘रामचरितमानस’ / ‘जानकी मंगल’ से लिया गया है। इसमें सीता जी की सखियों के साथ वार्तालाप का वर्णन है।
व्याख्या: सयानी जानकी जी सखियों के अमृत जैसे मीठे वचन सुनकर उनकी बात भली-भाँति समझ गईं। उन्होंने तिरछी नजरों से इशारा करके कुछ समझाया और मुस्कुराकर चल दीं। तुलसी कहते हैं उस समय सभी सखियाँ नेत्रों का लाभ लेती हुई शोभित हो रही थीं, मानो प्रेम रूपी तालाब में सूर्य उदय होने पर सुंदर कमल की कली खिल उठी हो।
काव्य सौंदर्य: शृंगार रस, अवधी भाषा, उत्प्रेक्षा अलंकार (मनो), सवैया छंद।

ब) रेखांकित अंश की व्याख्या
उत्तर: "अनुराग-तड़ाग में भानु उदै, बिगसी मनो मंजुल कंज-कली।" - जैसे सूर्य उदय होने पर तालाब में कमल की कली खिल उठती है, वैसे ही राम के प्रति अनुराग रूपी तालाब में प्रेम रूपी सूर्य उदय होने से जानकी के मुख रूपी कमल कली खिल उठी।

स) सीताजी क्या समझ गयीं?
उत्तर: सीताजी समझ गईं कि सखियाँ उनके और राम के प्रेम संबंध को जान गई हैं और राम के सौंदर्य-शील की चर्चा कर रही हैं। इसलिए उन्होंने लज्जा और प्रेम से मुस्कुराकर तिरछी नज़रों से उत्तर दिया।

23. (क) किसी एक लेखक का जीवन परिचय + प्रमुख रचना (5 अंक) + (ख) किसी एक कवि का जीवन परिचय (5 अंक)

(क) (अ) रामधारी सिंह 'दिनकर' - जीवन परिचय
उत्तर:
जन्म: 23 सितंबर 1908, सिमरिया, मुंगेर (बिहार)
मृत्यु: 24 अप्रैल 1974
शिक्षा: पटना विश्वविद्यालय से इतिहास में बी.ए. ऑनर्स
प्रमुख रचनाएँ: कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी, उर्वशी (ज्ञानपीठ पुरस्कार 1972), हुंकार, रेणुका
भाषा: ओजस्वी, वीर रस प्रधान खड़ीबोली
विशेष: राष्ट्रकवि, राज्यसभा सदस्य, 'दिनकर' जी को भारत का राष्ट्रकवि कहा जाता है। उनकी कविताओं में राष्ट्रीय चेतना, वीरता और मानवतावाद है।
साहित्य में स्थान: छायावादोत्तर काल के प्रमुख कवि।

(ब) जय प्रकाश भारती
उत्तर: जन्म 2 जनवरी 1936, मेरठ। प्रमुख वैज्ञानिक लेखक। रचनाएँ - विज्ञान की विभूतियाँ, हिमालय की पुकार, अनंत आकाश। भाषा सरल, वैज्ञानिक। बाल साहित्य में विशेष योगदान।

(स) भगवत शरण उपाध्याय
उत्तर: जन्म 1910, बलिया (UP)। इतिहास-संस्कृति के लेखक। रचना - ठूँठा आम, गंगा, कालिदास, विश्व साहित्य की रूपरेखा। भाषा संस्कृतनिष्ठ, विचार प्रधान।


(ख) किसी एक कवि का जीवन परिचय - (अ) माखनलाल चतुर्वेदी
उत्तर:
जन्म: 4 अप्रैल 1889, बाबई, होशंगाबाद (MP)
मृत्यु: 30 जनवरी 1968
रचनाएँ: हिमकिरीटिनी, हिमतरंगिनी (साहित्य अकादमी), माता, युगचरण
भाषा: ओजस्वी, राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत
उपाधि: एक भारतीय आत्मा
विशेष: स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय, जेल भी गए।

(ब) रामनरेश त्रिपाठी - जन्म 1889 जौनपुर, रचना - पथिक, मिलन, मानसी, कविता कौमुदी। छायावाद के पूर्व के कवि।
(स) रसखान - जन्म 1548, दिल्ली। मुस्लिम होकर कृष्ण भक्त। रचना - प्रेमवाटिका, सुजान रसखान। ब्रजभाषा, सवैया-कवित्त।

24. (क) निम्न संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद - 5 अंक
संस्कृत गद्यांश:
"एतस्मिन्नेव काले तस्य ग्रामीणस्य ग्राम: आगत: स विहस रेलयानात् अवतीर्य स्वग्रामं प्रति अचलत्। नागरिक: लज्जित: भूत्वा पूर्ववत् तूष्णीम् अतिष्ठत्।"

सन्दर्भ सहित अनुवाद:
सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के संस्कृत खण्ड के 'नागरिक: ग्रामीणश्च' नामक पाठ से लिया गया है। इसमें एक नागरिक और ग्रामीण की रेल यात्रा का हास्यपूर्ण वर्णन है।
अनुवाद: इसी समय उस ग्रामीण का गाँव आ गया। वह हँसते हुए रेलगाड़ी से उतर कर अपने गाँव की ओर चल दिया। नागरिक लज्जित होकर पहले की तरह चुपचाप बैठा रहा। (क्योंकि नागरिक ग्रामीण का मजाक उड़ा रहा था, पर ग्रामीण अपने गाँव को पहचान गया और नागरिक का स्टेशन निकल गया।)

व्याकरण: एतस्मिन् = इस, काले = समय में, ग्रामीणस्य = ग्रामीण का, ग्राम: = गाँव, आगत: = आ गया, विहस्य = हँसकर, रेलयानात् = रेलगाड़ी से, अवतीर्य = उतरकर, स्वग्रामं प्रति = अपने गाँव की ओर, अचलत् = चल दिया, नागरिक: = शहर का व्यक्ति, लज्जित: भूत्वा = लज्जित होकर, तूष्णीम् = चुपचाप, अतिष्ठत् = बैठा रहा।

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24. (क) का शेष भाग + (ख)(ग)(घ) - संस्कृत खण्ड - 5+2+2 = 9 अंक
शेष गद्यांश:
"सर्वयात्रिण: वाचालं तं नागरिकं दृष्ट्वा अहसन्। तदा स नागरिक: अन्वभवत् यत् ज्ञानं सर्वत्र सम्भवति। ग्रामीण: अपि कदाचित् नागरिकेभ्य: प्रबुद्धतरा: भवन्ति।"

अनुवाद: सभी यात्रियों ने उस बातूनी नागरिक को देखकर हँसी उड़ाई। तब उस नागरिक ने अनुभव किया कि ज्ञान सर्वत्र संभव है। ग्रामीण भी कभी-कभी नागरिकों से अधिक बुद्धिमान होते हैं।

अथवा - वैकल्पिक गद्यांश:
"तस्य तां वार्तां श्रुत्वा च चतुर: ग्रामीण: अकथयत् - भो: वयम् अशिक्षिता: भवान् च शिक्षित: वयम् अल्पज्ञा: भवान् च बहुज्ञ: इत्येव विज्ञाय अस्माभि: समय: कर्तव्य: वयं परस्परं प्रहेलिका प्रक्ष्याम:। यदि भवान् उत्तरं दातुं समर्थ: न भविष्यति तदा भवान् दशरूप्यकाणि दास्यति। यदि वयम् उत्तरं दातुं समर्था: न भविष्याम: तदा दशरूप्यकाणाम् अर्धं पञ्चरूप्यकाणि दास्याम:।"

अनुवाद: उसकी वह बात सुनकर चतुर ग्रामीण ने कहा - अरे! हम अशिक्षित हैं और आप शिक्षित हैं, हम अल्पज्ञ हैं और आप बहुज्ञ हैं, ऐसा जानकर हम लोगों को समय बिताना चाहिए, हम परस्पर पहेलियाँ पूछेंगे। यदि आप उत्तर देने में समर्थ नहीं होंगे तो आप दस रुपये देंगे। यदि हम उत्तर देने में समर्थ नहीं होंगे तो दस रुपयों का आधा पाँच रुपये देंगे।


(ख) निम्न संस्कृत पद्यांशों में से किसी एक की सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद - 5 अंक

(अ) सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दु:खभाग् भवेत्॥

संदर्भ: यह श्लोक हमारी संस्कृत पाठ्य-पुस्तक के 'मंगलम्' से लिया गया है।
अनुवाद: सभी सुखी हों, सभी निरोगी हों, सभी का कल्याण हो, किसी को भी दु:ख प्राप्त न हो। यह भारतीय संस्कृति की 'वसुधैव कुट

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