a

Class 10 science up board ncert book full solutions notes in hindi

class 10 science up board 

up board ncert Class 10 science book full solutions notes in hindi

class 10 science notes chapterwise,class 10 science,notes for class 10 science,class 10 up board notes,class 10 science notes,up board notes class 12,class 10 science chapter 3 notes,class 10 science chapter 11 notes,up board class 12 notes pdf,class 12 up board notes pdf download,science important notes of class 10 cbse,class 10 science notes for up board student,up board class 10 science,science notes for board exam 2020,up board class10 science classes,class 10 science,life processes class 10 science biology,class 10 science notes chapterwise,class 10 up board notes,up board notes class 12,notes for class 10 science,up board class 12 notes pdf,class 10 science chapter 3 notes,class 10 science chapter 11 notes,class 12 up board notes pdf download,science important notes of class 10 cbse,up board class 10 science,class 10 science chapter 3,up board class 12 chemistry,up board classes,class 10 science notes



यूपी बोर्ड कक्षा 10वी विज्ञान बुक का सम्पूर्ण हल










Class 10 science chapter 1 Chemical reactions and equations notes in hindi


कक्षा 10वी विज्ञान अध्याय 01 रासायनिक अभिक्रियाएं एवं समीकरण का सम्पूर्ण हल







रासायनिक अभिक्रियाएं एवं समीकरण(Chemical reactions and equations)


प्रश्न 1. रासायनिक अभिक्रिया किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार की होती है? प्रत्येक को उदाहरण देकर समझाइए। 


अथवा


प्रतिस्थापन अभिक्रिया पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।


अथवा


मर्करी (Hg) के अयस्कों में से किसी एक अयस्क से किस प्रकार मर्करी प्राप्त कीजिएगा? केवल रासायनिक समीकरण दीजिए। 


अथवा


संकलन अभिक्रिया पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।



रासायनिक अभिक्रिया किसे कहते हैं ? (Rasayanik abhikriya kise kahate hain)


उत्तर


रासायनिक अभिक्रिया की परिभाषा :



ऐसे परिवर्तन जिसमें नए गुणों वाले पदार्थों का निर्माण होता हैं, उसे रासायनिक अभिक्रिया कहते हैं अथवा रसायनों से सम्बन्धित अभिक्रिया को रासायनिक अभिक्रिया कहते हैं।



ऐसे पदार्थ जो किसी रासायनिक अभिक्रिया में हिस्सा लेते हैं उन्हें अभिकारक कहते हैं पदार्थ जिनका निर्माण रासायनिक अभिक्रिया में होता हैं, उन्हें उत्पाद कहते हैं



उदाहरण:



1. भोजन का पाचन



2. श्वसन



3. लोहे पर जंग लगना



4. मैग्नीशियम फीते का जलना



5. दुध से दही बनना



6. भोजन को पकाने की प्रक्रिया



प्रश्न .रासायनिक अभिक्रिया को पहचानने के तरीके:



उत्तर 

* अवस्था में परिवर्तन



*रंग में परिवर्तन



*तापमान में परिवर्तन



*गैस का उत्सर्जन



अवस्था में परिवर्तन :- रासायनिक अभिक्रिया में अवस्थाओं का परिवर्तन होता हैं। मैग्नीशियम फीते ( रिबन) को ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलाने पर मैग्नीशियम चूर्ण का निर्माण होता हैं



2Mg + 0₂ → 2Mgo + O₂



रंग में परिवर्तन :- रासायनिक अभिक्रिया में रंग का परिवर्तन होता हैं। कॉपर सल्फेट का विलयन का रंग नीला होता हैं परन्तु लोहें की कीले डालने पर उसका रंग हरा हो जाता हैं अत: रासायनिक अभिक्रिया में रंग का परिवर्तन होता हैं



 CuSO₄ + Fe → FeSO₄+ Cu



तापमान में परिवर्तन :- रासायनिक अभिक्रिया में ताप का परिवर्तन होता हैं। तनु सल्फ्युरिक अम्ल में दानेदार जिंक डालने पर पात्र गर्म हो जाता हैं। अत: अभिक्रिया में तापमान का परिवर्तन हुआ।



गैस का उत्सर्जन :- रासायनिक अभिक्रिया में गैस का उत्सर्जन होता हैं। तनु सल्फ्युरिक अम्ल में दानेदार जिंक डालने पर हाइड्रोजन गैस बाहर निकलती हैं।




रासायनिक अभिक्रिया :- ऐसे परिवर्तन जिसमें नए गुणों वाले पदार्थों का निर्माण होता है, उसे रासायनिक अभिक्रिया कहते हैं। अभिकारक : ऐसे पदार्थ जो किसी रासायनिक अभिक्रिया में हिस्सा लेते हैं उन्हें अभिकारक कहते हैं। उत्पाद : ऐसे पदार्थ जिनका निर्माण रासायनिक अभिक्रिया में होता है, उन्हें उत्पाद कहते हैं।



प्रश्न .रसायन अभिक्रिया कितने प्रकार के होते हैं?



उत्तर

रसायनिक अभिक्रिया तीन प्रकार की होती है



1.कार्बनिक रसायन Organic chemistry.



2.अकार्बनिक रसायन Inorganic chemistry.



3.भौतिक रसायन Physical chemistry.




रसायनिक अभिक्रिया



उत्तर- रासायनिक अभिक्रिया जब एक या एक-से-अधिक पदार्थ परस्पर अभिक्रिया करके नए पदार्थ बनाते हैं तो ऐसी अभिक्रिया को रासायनिक अभिक्रिया' कहते हैं।




उदाहरणार्थ : मैग्नीशियम जब हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से क्रिया करता है तो मैग्नीशियम क्लोराइड व हाइड्रोजन गैस बनती है। इस अभिक्रिया को निम्नलिखित समीकरण से प्रदर्शित करते हैं



Mg      +     2HCI →MgCl₂ + H₂


मैग्नीशियम।         हाइड्रोक्लोरिक अम्ल         मैग्नीशियम क्लोराइड       हाइड्रोजन



अधिकारक                     उत्पाद



इस अभिक्रिया में, मैग्नीशियम तथा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल को अभिकारक - (reactants) तथा मैग्नीशियम क्लोराइड व हाइड्रोजन को परिणामी या उत्पाद - (resultants or product) कहते हैं। इस सम्पूर्ण क्रिया को रासायनिक ना अभिक्रिया कहते हैं। रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थों (अभिकारकों) तथा बनने वाले पदार्थों (उत्पादों) को रासायनिक सूत्रों द्वारा समीकरण के रूप में दर्शाने को अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण कहते हैं। । 




रासायनिक अभिक्रिया के प्रकार मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकार की होती है 




1. संयोजन (संकलन) अभिक्रिया - संयोजन अभिक्रिया वह रासायनिक अभिक्रिया है, जिसमें दो या दो से अधिक प्रकार के पदार्थों के अणु परस्पर जुड़कर केवल एक ही प्रकार के पदार्थ के अणु बनाते हैं।





उदाहरणार्थ :



(i) सोडियम (Na) धातु, क्लोरीन (Cl) में जलकर सोडियम क्लोराइड (NaCl) बनाती है





2Na       +       Cl₂ →         2NaCl



सोडियम        क्लोरीन          सोडियम क्लोराइड





(ii) कार्बन मोनोक्साइड (CO) तथा क्लोरीन (Cl₂) की क्रिया से कार्बोनिल क्लोराइड (COCl₂) बनता है।



CO                +Cl₂    →      COCl₂


कार्बन मोनोक्साइड  क्लोरीन       कार्बोनिल क्लोराइड




2. वियोजन अभिक्रिया वियोजन अभिक्रिया रासायनिक वह अभिक्रिया है, जिसमें कोई यौगिक अपने अवयवी तत्त्वों अथवा छोटे-छोटे सरल यौगिकों में वियोजित हो जाता है। यह अभिक्रिया ऊष्मा, प्रकाश अथवा विद्युत द्वारा सम्पन्न होती है। वियोजन अभिक्रिया निम्नलिखित दो प्रकार की होती है





(a) ऊष्मीय-वियोजन (Thermal decomposition) जब किसी पदार्थ के वियोजन की अभिक्रिया ऊष्मा देने पर होती है तो उसे ऊष्मीय वियोजन कहते हैं।"




 उदाहरणार्थ : (i) पोटैशियम क्लोरेट का वियोजन पोटैशियम क्लोरेट (KCIO₃) को गर्म करने पर यह पोटैशियम क्लोराइड (KCI) तथा ऑक्सीजन में वियोजित होता है



2KCIO₃   ऊष्मा  →   2KCI    +30₂ ↑ ऑक्सीजन


पोटैशियम क्लोरेट        पोटैशियम क्लोराइड





(b) विद्युत वियोजन (Electrolysis or electrolytic decomposition) "जिस रासायनिक अभिक्रिया में यौगिक (गलित अवस्था में या जलीय विलयन में) का विद्युत प्रवाहित करने पर वियोजन होता है, उसे विद्युत वियोजन कहते हैं।”



उदाहरणार्थ



(i) सोडियम क्लोराइड का विद्युत-वियोजन गलित सोडियम क्लोराइड में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर यह सोडियम तथा क्लोरीन में वियोजित हो जाता है



विद्युत-वियोजन



2NaCl   विद्युत-वियोजन →  2Na सोडियम +Cl₂↑ क्लोरीन



सोडियम क्लोराइड





3. विस्थापन या प्रतिस्थापन अभिक्रिया विस्थापन वह रासायनिक अभिक्रिया है, जिसमें किसी यौगिक के अणु के किसी एक परमाणु अथवा समूह (मूलक) के स्थान पर कोई दूसरा परमाणु अथवा समूह (मूलक) आ जाता है।



 उदाहरणार्थ :



(i) लोहा (Fe), कॉपर सल्फेट (CuSO4) विलयन में से कॉपर को विस्थापित करके स्वयं आ जाता है। फलस्वरूप, फेरस सल्फेट तथा कॉपर (Cu) बनते हैं



Fe आयरन +CuSO₄ → FeSO₄+  Cu↓



                कॉपर सल्फेट    फेरस सल्फेट





4. उभय प्रतिस्थापन या द्वि-विस्थापन अभिक्रिया "जिस रासायनिक अभिक्रिया में यौगिकों के आयनों अथवा घटकों की अदला-बदली (विनिमय) हो जाती है तथा नए यौगिक बनते हैं, वह उभय-प्रतिस्थापन अभिक्रिया कहलाती है।” यह अभिक्रिया यौगिकों के विलयनों के मध्य होती है।



 उदाहरणार्थ :



(i) जब बेरियम क्लोराइड के विलयन में सोडियम सल्फेट का विलयन मिलाते हैं तो बेरियम सल्फेट व सोडियम क्लोराइड बन जाते हैं




BaCl₂ + Na₂SO₄ → BaSO₄+ 2NaCl



बेरियम क्लोराइड     सोडियम सल्फेट।         बेरियम सल्फेट    सोडियम क्लोराइड





प्रश्न . ऑक्सीकरण अभिक्रिया को उदाहरण सहित समझाइए।



अथवा



 ऑक्सीकरण अभिक्रिया पर टिप्पणी लिखिए। योग अभिक्रियाओं पर टिप्पणी लिखिए।




उत्तर- जब किसी अभिक्रिया में किसी तत्व या यौगिक के साथ ऑक्सीजन का सहायोग या हाइड्रोजन का त्याग होता है, तो ऐसी अभिक्रिया को ऑक्सीकरण अभिक्रिया कहते हैं।



उदाहरण



 (i) C    + O₂       →      CO₂




कार्बन       ऑक्सीजन         कार्बन डाइऑक्साइड



(ii) S     +      0₂      →     SO₂



गंधक        ऑक्सीजन     सल्फर डाइऑक्साइड



(iii) 4HCl + MnO2  → MnCl₂ + H₂O + Cl₂






प्रश्न .ऊष्माक्षेपी (दहन) एवं ऊष्माशोषी अभिक्रिया का क्या अर्थ है? उदाहरण दीजिए।



उत्तर- ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (दहन ) जिन रासायनिक अभिक्रियाओं में उत्पाद के निर्माण के साथ-साथ ऊष्मा भी उत्पन्न होती है, उन्हें ऊष्माक्षेपी (दहन) अभिक्रिया कहते हैं।



उदाहरणार्थ: प्राकृतिक गैस का दहन



CH₄ (g)+2CO₂→CO₂ (g) + 2H₂O (g)+ऊष्मा




ऊष्माशोषी अभिक्रिया–जिन रासायनिक अभिक्रियाओं में ऊर्जा अवशोषित होती है, उन्हें ऊष्माशोषी अभिक्रिया कहते हैं।



उदाहरणार्थ:



N₂ +0₂  → 2NO - ऊष्मा




प्रश्न . श्वसन को ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया क्यों कहते हैं? वर्णन कीजिए।




उत्तर- श्वसन को ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहते हैं; क्योंकि इसके अन्तर्गत भोजन छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटता है जिसके फलस्वरूप ऊर्जा उत्पन्न होती है जो हमारे शरीर को कार्य करने की शक्ति प्रदान करती है। श्वसन क्रिया को समीकरण रूप में निम्नवत् व्यक्त किया जा सकता है



C₆H₁₂0₆ + 6 0₂  →      6CO₂+  6H₂O+ ऊर्जा



ग्लूकोज़    ऑक्सीजन      कार्बन डाइऑक्साइड   जल





प्रश्न. रासायनिक समीकरण देते हुए सल्फर डाइऑक्साइड (SO2 ) का कोई एक अपचायक गुण समझाइए।



उत्तर- जल की उपस्थिति में यह हैलोजन का अपचयन करके अम्ल बनाती है



SO₂ + 2H₂O + Cl₂ → 2HCl + H₂SO₄




प्रश्न. रेडॉक्स अभिक्रिया किसे कहते हैं? उदाहरण देकर स्पष्ट करो।




उत्तर— वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें एक अभिकारक का ऑक्सीकरण तथा दूसरे अभिकारक का अपचयन होता है, रेडॉक्स अभिक्रिया या उपचयन-अपचयन अभिक्रिया कहलाती है;





 प्रश्न . (a) क्या होता है जब सोडियम सल्फेट विलयन को बेरियम क्लोराइड विलयन में मिलाया जाता है



(b) उपर्युक्त अभिक्रिया की सन्तुलित समीकरण लिखिए।





उत्तर – (a) जब सोडियम सल्फेट विलयन को बेरियम क्लोराइड विलयन में मिलाया जाता है तो BaSO₄ का सफेद अवक्षेप बनता है। सोडियम क्लोराइड अन्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है जो विलयन में शेष रह जाता है।



(b) Na₂ SO₄ (aq) + BaCl₂(aq). 


  सोडियम सल्फेट        बेरियम क्लोराइड



→   BaSO₄ + 2NaCl(aq) 


बेरियम सल्फेट      सोडियम क्लोराइड




प्रश्न . निम्नलिखित अभिक्रियाओं का सन्तुलित समीकरण लिखिए



(i) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल दानेदार जिंक के साथ अभिक्रिया करता है।



अथवा



 क्या होता है, जब जिंक चूर्ण को तनु सल्फ्यूरिक अम्ल में मिलाया जाता है।




(ii) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ऐलुमिनियम चूर्ण के साथ अभिक्रिया करता है।



(iii) सोडियम ऑक्साइड को जल में घोला जाता है 




 उत्तर – (i) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल जिंक के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन विस्थापित करता है।.



Zn + H₂SO₄ (dil)  → ZnSO₄ + H2



(ii) ऐलुमिनियम चूर्ण की तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया कराने पर ऐलुमिनियम ट्राइक्लोराइड बनता है।



2Al + 6HCl (dil.) → 2AlCl₃ + 3H₂





(iii) Na₂0 + H₂0  → 2NaOH






प्रश्न . रासायनिक समीकरण में अभिकारक तथा उत्पाद किस प्रकार लिखे जाते हैं?



उत्तर- रासायनिक समीकरण में अभिकारक बाईं ओर लिखे जाते हैं। एक से अधिक अभिकारक होने पर इनके मध्य '+' का चिह्न लगाया जाता है। उत्पादों को समीकरण के दाईं ओर लिखा जाता है तथा इनके मध्य भी '+' का चिह्न लगा दिया जाता है। अधिकारकों तथा उत्पादों के मध्य एक तीर (→) लगाया जाता  है जिसकी दिशा उत्पादों की ओर होती है। यह तीर अभिक्रिया की दिशा का बोध कराता है। 




उदाहरणार्थ :



2Mg + O₂      → 2MgO



अभिकारक            उत्पाद





प्रश्न . सन्तुलित रासायनिक समीकरण किसे कहते हैं?



उत्तर- किसी रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले अभिकारक तथा प्राप्त उत्पादों में उपस्थित विभिन्न तत्त्वों के परमाणुओं की संख्या समान होने पर समीकरण सन्तुलित रासायनिक समीकरण कहलाती है।



प्रश्न . उपचयन तथा अपचयन क्या है?



उत्तर - वह अभिक्रिया जिसमें एक रासायनिक स्पीशीज इलेक्ट्रॉनों का ह्रास करती है, उपचयन कहलाती है। वह अभिक्रिया जिसमें एक रासायनिक स्पीशीज इलेक्ट्रॉन प्राप्त करती है, अपचयन कहलाती है।



प्रश्न . उपचायक तथा अपचायक किसे कहते हैं?



उत्तर- अभिक्रिया में वह पदार्थ जो अन्य पदार्थ को उपचयित कर देता है, उपचायक कहलाता है। अभिक्रिया में वह पदार्थ जो अन्य पदार्थ को अपचयित करता है, अपचायक कहलाता है।



प्रश्न . वायु में जलाने से पहले मैग्नीशियम रिबन को साफ क्यों किया जाता है?



उत्तर- मैग्नीशियम रिबन की सतह पर उपस्थित मैग्नीशियम ऑक्साइड की सतह को साफ करने के लिए दहन से पूर्व इसे रेगमाल से रगड़कर साफ किया जाता है।



प्रश्न . किसी पदार्थ 'x' के विलयन का उपयोग सफेदी करने के लिए होता है।



(i) पदार्थ 'x' का नाम तथा इसका सूत्र लिखिए।



 (ii) ऊपर (i) में लिखे पदार्थ 'X' की जल के साथ अभिक्रिया लिखिए।



उत्तर- (i) पदार्थ 'x' का नाम कैल्सियम ऑक्साइड है। इसका सूत्र CaO है।




(ii)CaO(s) + H₂O → Ca(OH)₂ (aq) + ऊष्मा



कैल्सियम ऑक्साइड  जल      कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड




प्रश्न . लोहे की वस्तुओं को हम पेंट क्यों करते हैं? 



उत्तर- लोहे की वस्तुओं पर पेंट करने से उसकी अभिक्रिया वायु उपस्थित नमी व ऑक्सीजन से नहीं हो पाती है तथा वह जंग लगने से बच जाती है।




Q.एथिल एसीटेट का सूत्र क्या है?


उत्तर

C₄H₈O₂



Q.सल्फ्यूरिक अम्ल को रसायनों का राजा क्यों कहते हैं?


उत्तर

सल्फ्यूरिक अम्ल प्रयोगशाला तथा उद्योगों में सर्वाधिक प्रयोग किए जाने वाला रसायन है। इसलिए इसे रसायनों का राजा कहते है।




Q.कौन से अम्ल को अम्लों का राजा भी कहते हैं?


उत्तर

H2SO4 सल्फ्यूरिक अम्ल को अम्लों का राजा कहते हैं।



Q.श्वसन को ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया क्यों कहते हैं कक्षा 10?


उत्तर

यह क्रिया एंजाइमों के द्वारा कोशिकाओं के अंदर माइटोकॉन्ड्रिया में होती है। इस अभिक्रिया में ऊर्जा उत्सर्जित होती है, जिसको कोशिकाओं में ATP के रूप में संचित कर लिया जाता है। इसलिए श्वसन को ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहते हैं।



Q.Pratisthapan Abhikriya क्या है?



प्रतिस्थापन अभिक्रिया : प्रतिस्थापन अभिक्रिया जिसमें यौगिक के परमाणु या परमाणुओं का समूह, अन्य परमाणु या परमाणु के समूह द्वारा प्रतिस्थापित होता है, प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ कहलाती है। एक या अधिक भिन्न रासायनिक गुण वाले पदार्थ बनते हैं।



Q.ऊष्माक्षेपी और ऊष्माशोषी अभिक्रियाओं से क्या समझते हैं?




ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया-जिन अभिक्रियाओं में उत्पाद के साथ ऊष्मा का भी उत्सर्जन होता है उन्हें उष्माक्षेपी अभिक्रिया कहते हैं। 



ऊष्माशोषी अभिक्रिया - जिन अभिक्रियाओं में ऊष्मा का अवशोषण होता है उन्हें ऊष्माशोषी अभिक्रिया कहते हैं। 



Q.ऊष्माशोषी अभिक्रिया का उदाहरण क्या है ?



उत्तर

कैल्सियम ऑक्साइड (कली-चूना) के ऊपर जल गिराया जाता है, तो कली- चूना जल के साथ अभिक्रिया करके कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड (भखरा चूना) का निर्माण करता है। इसमें ऊष्मा उत्पन्न होती है जिससे अभिक्रिया मिश्रण का ताप बहुत बढ़ जाता है। 



Q.ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया क्या है उदाहरण दें?



उत्तर

किसी ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया का ऊर्जा-प्रोफाइल वह रासायनिक अभिक्रिया उष्माक्षेपी ( exothermic reaction) कहलाती है जिसमें उष्मा के रूप में उर्जा प्राप्त होती है। इसके विपरीत रासायनिक अभिक्रिया उष्माशोषी कहलाती है। रासायनिक अभिक्रिया के रूप में व्यक्त करने पर 



उदाहरण - के लिए, हाइड्रोजन का जलना एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है।




Q.रासायनिक अभिक्रिया क्या है उदाहरण ?



रासायनिक अभिक्रिया

(Rasayanik Abhikriya Kise Kahate Hain) 



:- जब कोई दो या दो से अधिक पदार्थ या अभिकारक आपस में मिलकर अथवा अभिक्रिया करके अपने रासायनिक गुणों में परिवर्तन करके नए उत्पाद बनाते हैं। तो इस प्रक्रिया को रासायनिक अभिक्रिया कहते हैं। 



उदाहरण:- वायु तथा नमी की उपस्थिति में लोहे पर जंग लगना। इत्यादि उदाहरण है।



Q.एस्टरीकरण रासायनिक अभिक्रिया क्या होती है?



एस्टरीकरण- ऐसी रासायनिक अभिक्रिया जिसमें सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल की उपस्थिति में किसी ऐल्कोहॉल को एक कार्बोक्सिलिक अम्ल के साथ गर्म करके एस्टर प्राप्त किया जाता है, एस्टरीकरण कहलाता है।




Q.रासायनिक अभिक्रिया किसे कहते हैं यह कितने प्रकार की होती हैं?


उत्तर

यह तीन प्रकार की होती है: उष्मीय वियोजन जो ऊष्मा के द्वारा होती है, विद्युत वियोजन जिसमें ऊष्मा विद्युत के रूप में प्रदान की जाती है, प्रकाशीय वियोजन जिसमें ऊष्मा प्रकाश के द्वारा प्रदान की जाती हैं. इस अभिक्रिया में अधिक अभिक्रियाशील पदार्थ कम अभिक्रियाशील पदार्थ को उसके यौगिक से अलग कर देता है



Q.उस अभिक्रिया को क्या कहते हैं जिसमें अभिकारक सरल प्रतिफलों में परिवर्तित हो जाता है?



उस अभिक्रिया को क्या कहते हैं, जिसमें अभिकारक सरल प्रतिफलों में परिवर्तित हो जाता है ? 



उत्तर

अपघटन अभिक्रिया




Q.संयोजन अभिक्रिया क्या है उदाहरण दीजिए?



संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction)



जिस अभिक्रिया में दो या दो से अधिक अभिकारक किसी एक उत्पाद का निर्माण करते हैं उसे संयोजन अभिक्रिया कहते हैं। 



उदाहरण: जब कली चूना और जल आपस में अभिक्रिया करते हैं तो बुझे चूने का निर्माण होता है।



Q.ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया क्या है उदाहरण दो?



ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया जिस रासायनिक अभिक्रिया में उत्पादों के साथ ऊष्मा भी निकलती है, ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहलाती है।



उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन का जलना एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है।



 Example- emission of light H+ + OH- H₂0 



Q.एस्टर का रासायनिक सूत्र क्या होता है?



एस्टर का आणविक सूत्र



C₃H₇COOC₂H₅ अल्कोहल के आणविक सूत्र और उस एसिड को लिखें जिससे यह तैयार किया जा सकता है 



Q.एस्टर का निर्माण कैसे होता है?


उत्तर

एस्टर (esters) वे रासायनिक यौगिक हैं जो अम्लों (कार्बनिक अथवा अकार्बनिक) से व्युत्पन्न होते हैं और उनमें कम से कम एक OH -(हाइड्रॉक्सिल / hydroxyl) समूह -O-alkyl (alkoxy) समूह से प्रतिस्थापित होता है। प्रायः एस्टर कार्बोजिलिक अम्ल और अल्कोहल से की क्रिया से बनाये जाते हैं। एस्टर के उपयोग से इत्र भी बनाया जाता है।




Q.उदासीनीकरण अभिक्रिया क्या है समझाइए ?



उत्तर : जब अम्ल किसी क्षार से क्रिया करता है तब लवण और जल बनता है। इसे उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं।



प्रश्न. संयोजन अभिक्रिया क्या हैं?



संयोजन अभिक्रिया- जब किसी अभिक्रिया में दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एकल उत्पाद का निर्माण करते है, तो ऐसी अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया कहते है।




Q.विस्थापन एवं द्विविस्थापन अभिक्रिया में क्या अंतर है इन अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए ?



विस्थापन अभिक्रिया में किसी यौगिक से उसका एक तत्व किसी अपेक्षाकृत अधिक क्रियाशील तत्व द्वारा विस्थापित हो जाता है, जबकि द्विविस्थापन अभिक्रियाओं में दो अभिकारक अपने-अपने आयनों का आदान-प्रदान करके दो नए उत्पादों का निर्माण करते है।



Q.ऊष्माक्षेपी का दूसरा नाम क्या है?



ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया वे अभिक्रियाएँ जिनमें ऊर्जा मुक्त होती है उन्हें ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहते है। 



ऊष्माशोषी अभिक्रिया - वे अभिक्रियाएँ जिनमें ऊर्जा अवशोषित होती है । उन्हें ऊष्माशोषी अभिक्रिया कहते है।




Q.श्वसन एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया का उदाहरण है क्यों समझाइए?


उत्तर

जब किसी क्रिया के उपरांत ऊष्मा उत्पन्न होती है तो उसे ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहते हैं। स्वसन क्रिया के बाद हमें ऊर्जा ऊष्मा प्राप्त होती है इसलिए यह एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है। 



श्वसन की परिभाषा - जीव जंतुओं की कोशिकाओं में ऑक्सीजन की उपस्थिति में भोजन के जैविक ऑक्सीकरण होने की क्रिया को श्वसन कहते हैं।




Q.एस्टर का बहुलक क्या है ?


उत्तर

पॉलिएस्टर (Polyester): यह एस्टर का बहुलक होता है. एस्टर का निर्माण दो हाइड्रोक्सिल ग्रुप युक्त कार्बनिक यौगिक की अभिक्रिया दो कर्बोक्सिलिक ग्रुप युक्त कार्बनिक यौगिक के कराने से होता है. पॉलिएस्टर रेशे बहुत कम पानी सोखते हैं, इसलिए जल्दी सूख जाते हैं. इस रेशे पर स्पष्ट क्रीज लाइन बहुत जल्दी बन जाती है.




Q.रसायनों का राजा कौन है?


उत्तर

सल्फ्यूरिक एसिड (H2SO4) को रसायनो का राजा कहा जाता है यह एक रंगहीन, गंधहीन और सिरप तरल (syrupy liquid) होता है जो पानी में घुलनशील होता है।




Q.भारतीय रसायन के जनक कौन है?


उत्तर

प्रफुल्ल चंद्र रे एक भारतीय रसायनज्ञ थे। उन्हें लोकप्रिय रूप से 'भारतीय रसायन विज्ञान के जनक' के रूप में जाना जाता है।




Q.रसायन विज्ञान की खोज कब हुई?



उत्तर

रसायन विज्ञान की खोज एंटोनी लेवोज़ियर ने 18 वी शताब्दी में की थी।




Q.विज्ञान के पिता कौन है ?


उत्तर

विज्ञान के जनक कौन थे? गैलीलियो गलिली को विज्ञान का जनक खा जाता है जिनका जन्म 15 फरवरी 1564 में हुआ था। वो एक इटालियन अस्टनोमर, महान गणितज्ञ और फिलोस्फर थे,उन्होंने विज्ञान के जगत में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी मृत्यु 8 जनवरी 1642 में हुई थी।




Q.भौतिक विज्ञान को इंग्लिश में क्या कहते हैं?




उत्तर

Physics is the scientific study of forces such as heat, light, sound, pressure, gravity, and electricity.




Q.वियोजन अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया के विपरीत क्यों कहा जाता है इन अभिक्रियाओं के लिए समीकरण लिखिए ?


उत्तर

वियोजन अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया के विपरीत कहा जाता है क्योंकि वियोजन अभिक्रिया में एकल अभिकारक दो या अधिक उत्पाद बनाता है जबकि संयोजन अभिक्रिया में दो या अधिक अभिकारक संयोग करके एकल उत्पाद बनाते हैं।




Q.विस्थापन अभिक्रिया का उदाहरण क्या है?




उत्तर 

यह अभिक्रिया अभिकारकों के बीच आयनों की अदला बदली के कारण होता है। 



उदाहरण: जब सोडियम सल्फेट के विलयन को बेरियम क्लोराइड के विलयन के साथ मिलाया जाता है तो बेरियम सल्फेट का सफेद अवक्षेप बनता है। इस प्रतिक्रिया में सोडियम क्लोराइड जल के विलयन के रूप में बनता है।




Q.धातु एवं अधातु के बीच कैसे विभेद करेंगे?




उत्तर: रासायनिक गुणधर्मों के आधात पर धातुओं तथा अधातुओं में विभेदः



 (a) धातु तनु अम्ल के साथ प्रतिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस मुक्त करते हैं, जबकि अधातु तनु अम्ल के साथ प्रतिक्रिया नहीं करते हैं। 



(b) धातु ऑक्सीजन के साथ संयुक्त होकर क्षारीय ऑक्साइड बनाते हैं, जबकि अधातु ऑक्सीजन के साथ संयुक्त होकर अम्लीय ऑक्साइड बनाते हैं।




Q.निम्न में से कौन विस्थापन प्रतिक्रिया है?



विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction)



जब कॉपर सल्फेट के विलयन में लोहे की कील रखी जाती है तो कॉपर सल्फेट का नीला रंग बदल कर हल्का हरा हो जाता है। ऐसा फेरस सल्फेट के निर्माण के कारण होता है। लोहे की कील पर भूरी परत के रूप में कॉपर प्राप्त होता है।



Q.विस्थापन एवं द्विविस्थापन अभिक्रियाओं में क्या अंतर है इन अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए ?



विस्थापन अभिक्रिया में किसी यौगिक से उसका एक तत्व किसी अपेक्षाकृत अधिक क्रियाशील तत्व द्वारा विस्थापित हो जाता है, जबकि द्विविस्थापन अभिक्रियाओं में दो अभिकारक अपने-अपने आयनों का आदान-प्रदान करके दो नए उत्पादों का निर्माण करते है।



Q.वियोजन अभिक्रिया कितने प्रकार के होते हैं ?



वियोजन या अपघटन अभिक्रिया(Decomposition Reaction)



यह तीन प्रकार की होती है: उष्मीय वियोजन जो ऊष्मा के द्वारा होती है, विद्युत वियोजन जिसमें ऊष्मा विद्युत के रूप में प्रदान की जाती है, प्रकाशीय वियोजन जिसमें ऊष्मा प्रकाश के द्वारा प्रदान की जाती हैं.




Up board solutions for class 10 science chapter 2 acide ,bases and salt


यूपी बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 2 अम्ल, क्षार और लवण





     अध्याय 2 अम्ल, क्षार, लवण


class 10 science chapter 2 full solutions





बहुविकल्पीय प्रश्न                            1 अंक


प्रश्न 1. सिट्रस फल (नींबू, संतरा आदि) में ……..उपस्थित होता है, जिसके कारण ये स्वाद में खट्टे होते हैं।


 (a) ऐसीटिक अम्ल


(b) सिट्रिक अम्ल


(c) टार्टरिक अम्ल उत्तर


(d) इनमें से कोई नहीं


उत्तर

 (b) सिट्स फल (नीबू, संतरा आदि) खट्टे फलों में सिट्रिक अम्ल उपस्थित होता है।


प्रश्न 2. अम्लीय विलयन का pH मान है। 



(a) 7


(b) 7 से कम 


(c) 7 से अधिक 


(d) शून्य



उत्तर (b) अम्लीय विलयन का pH मान सदैव 7 से कम होता है।


प्रश्न 3. सल्फ्यूरिक अम्ल में अम्लीय हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या है


(a) 2


(b) 1


(c) 3


(d) शून्य


उत्तर (a) परमाणुओं की संख्या 2 है।




प्रश्न 4. क्षारक के साथ हल्दी का रंग होता है


(a) पीला 


(b) नारंगी


(c) भूरा लाल


(d) अपरिवर्तित रहता है 


उत्तर (c) क्षारक के साथ हल्दी का रंग भूरा-लाल होता है।



प्रश्न 5. सल्फर डाइऑक्साइड का जलीय विलयन होता है


(a) अम्लीय


(b) क्षारीय


(c) उदासीन


(d) उभयधर्मी 


उत्तर (a) सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) का जलीय विलयन अम्लीय होता है। इसका pH मान 7 से कम होगा।


प्रश्न 6. ऐसीटिक अम्ल की क्षारकता होती है 


अथवा


ऐसीटिक अम्ल में अम्लीय हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या है 


(a) एक 


(b) दो


(c) तीन


(d) चार 



उत्तर (a) ऐसीटिक अम्ल में अम्लीय हाइड्रोजन की संख्या 1 है। 


प्रश्न 7. ऐसीटिक अम्ल एक दुर्बल अम्ल है, क्योंकि 



(a) इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है


(b) इसमें आयनन की मात्रा कम होती है


 (c) यह एक कार्बनिक अम्ल है


(d) यह एक अकार्बनिक अम्ल है


उत्तर (b) दुर्बल अम्ल जल में पूर्णतया आयनित या वियोजित नहीं होते हैं, अर्थात् इनके आयनन की मात्रा कम होती है।


प्रश्न 8. क्षारीय विलयन का pH है


(a) शून्य


(b) 7

 

(c) 7 से कम


(d) 7 से अधिक



उत्तर (d) क्षारीय विलयन का pH मान सदैव 7 से अधिक होता है।



प्रश्न 9. अम्लीय वर्षा के जल का सम्भावित pH मान है 



(a) 5.2


(b) 6.2 


(c) 7.2


(d) 8.2


उत्तर (a) अम्लीय वर्षा के जल का सम्भावित pH मान 5.2 है।


प्रश्न 10. H₂SO₄, विलयन का pH मान है।




(a) 0


(b) 7


(c) 7 से कम


(d) 7 से अधिक


उत्तर (c) H₂SO₄, विलयन एक अम्लीय विलयन है तथा अम्लीय विलयन का pH मान सदैव 7 से कम होता है।


प्रश्न  11. शुद्ध जल का pH मान है।


(a) 0


(b) 1


(c) 7


(d) 14


उत्तर (c) शुद्ध जल उदासीन होता है तथा उदासीन विलयन का pH मान 7 होता है।


प्रश्न 12. निम्नलिखित में से कौन-सा तत्व तनु अम्ल के साथ संयोग करके हाइड्रोजन गैस निकालता है? 


(a) क्लोरीन 


(b) ताँबा


(c) जस्ता (जिंक)


 (d) सल्फर


उत्तर (c) जस्ता (जिंक)



प्रश्न 13. क्षारीय विलयन में फीनॉल्फ्थैलीन सूचक का रंग होता है 


(a) लाल


 (b) पीला


 (c) नीला


(d) रंगहीन


उत्तर (a) लाल


प्रश्न 14. धोने के सोडा का रासायनिक सूत्र है 


(a) NaHCO₃


(b) Na₂CO₃ .10H₂O


(c) CaOCl₂


(d) NaCH


उत्तर (b) NaCO₃. 10H₂0


धोने का सोडा या सोडियम कार्बोनेट का रासायनिक सूत्र Na₂CO₃·10H₂0 है।


प्रश्न 15. निम्नलिखित में अम्लीय लवण है



(a) NaCl


(b) NaHSO₄


(c) Na₂SO₄


(d) KCN


उत्तर (b) विस्थापनीय H की उपस्थिति के कारण NaHSO₄एक अम्लीय लवण है। शेष समस्त लवण सामान्य लवण हैं।


प्रश्न 16. सोडियम कार्बोनेट के जलीय विलयन में कार्बन डाइऑक्साइड गैस अधिकता से प्रवाहित करने पर प्राप्त होने वाला पदार्थ है।



 (a) NaOH


(b) Na 2 CO3-10H20


(c) NaHCO3 


(d) Na2 CO3 H20


उत्तर (c) सोडियम कार्बोनेट के ठण्डे जलीय विलयन में CO₂गैस को प्रवाहित करने पर सोडियम बाइकार्बोनेट प्राप्त होता है।


NaHCO₃ सोडियम कार्बोनेट



प्रश्न 17. बेकिंग पाउडर को गर्म करने से कौन-सी गैस निकलती है


(a) CO 


(b) Na₂CO₃


(c) CO₂


(d) O₂


उत्तर (C) CO₂




प्रश्न

अम्ल किसे कहते हैं इसके रसायनिक गुण तथा उदाहरण



अम्ल

वे पदार्थ जिनका स्वाद खट्टा होता है तथा जो नीले लिटमस पेपर को लाल कर देते हैं, अम्ल कहलाते हैं। अम्ल शब्द की उत्पत्ति लैटिन शब्द 'ऐसीड्स' से हुई है जिसका अर्थ होता है 'खट्टा'। अतः वे पदार्थ जिनमें अम्ल उपस्थित होते हैं, खट्टे होते हैं। 


उदाहरण सिरका, सिट्रस फल (नींबू, संतरा, आदि) तथा इमली में क्रमश: ऐसीटिक, सिट्रिक तथा टार्टरिक अम्ल उपस्थित होते हैं, जिसके कारण ये स्वाद में खट्टे होते हैं।



आर्हेनियस के अनुसार अम्ल किसे कहते हैं



आर्हेनियस सिद्धान्त के अनुसार, वे पदार्थ जो जलीय विलयन में वियोजित होकर केवल हाइड्रोजन आयन (H+) देते हैं तथा हाइड्रोजन आयन (H+) के अतिरिक्त कोई अन्य धनायन नहीं देते, अम्ल कहलाते हैं। अतः स्पष्ट है कि सभी अम्लों में हाइड्रोजन तत्व उपस्थित होता है।


प्राकृतिक स्रोत                             अम्ल


सिरका                                   ऐसीटिक अम्ल


नींबू एवं संतरा                        सिट्रिक अम्ल


 इमली                                  टार्टरिक अम्ल


टमाटर                              ऑक्सेलिक अम्ल


दही                                  लैक्टिक अम्ल




अम्लों के रासायनिक गुण


(i) धातुओं से अभिक्रिया अम्ल विभिन्न सक्रिय धातुओं जैसे-जिंक (Zn), सोडियम (Na), मैग्नीशियम (Mg) आदि से क्रिया द्वारा हाइड्रोजन गैस मुक्त करते हैं।


धातु + तनु अम्ल   →   लवण +हाइड्रोजन गैस


जैसे- Zn(s) + 2HCI → ZnCl₂+ H₂(g) ↑



(ii) धातु कार्बोनेटों तथा हाइड्रोजन कार्बोनेटों से अभिक्रिया चूना पत्थर (lime stone), खड़िया (chalk) एवं संगमरमर (marble) कैल्सियम कार्बोनेट के विविध रूप हैं।


सभी धातुएँ-कार्बोनेट ( CO₃²⁻) तथा हाइड्रोजन कार्बोनेट (HCO⁻₃) अम्ल के साथ संगत लवण, कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल बनाते हैं।


धातु कार्बोनेट / धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट + अम्ल


लवण + कार्बन डाइऑक्साइड + जल


जैसे- CaCO₃ + 2HCI→ CaCl₂ + CO₂ + H₂O


(iii) धातु-ऑक्साइडों के साथ अभिक्रिया अम्ल, धातु ऑक्साइडों से क्रिया करके लवण एवं जल बनाते हैं।


धातु ऑक्साइड + अम्ल →   लवण + जल 


CaO + 2HCl — CaCl₂ + H₂O



प्रश्न.

क्षार , क्षारक , भस्म किसे कहते हैं परिभाषा रसायनिक गुण




क्षारक या भस्म


वे पदार्थ, जिनका स्वाद तीखा तथा कड़वा होता है तथा स्पर्श साबुन जैसा चिकना होता है, क्षारक कहलाते हैं। ये लाल लिटमस को नीला कर देते हैं।


प्रश्र

आर्हेनियस क्षार किसे कहते हैं परिभाषा



आर्हेनियस के आयनिक सिद्धान्त के अनुसार, क्षार वे पदार्थ हैं, जो जलीय विलयन में वियोजित अथवा आयनित होकर ऋणावेशित आयनों के रूप में केवल हाइड्रॉक्साइड आयन (OH⁻) देते हैं।


नोट वे क्षारक, जो जल में घुलनशील होते हैं, क्षार कहलाते हैं। 


अतः सभी क्षार, क्षारक होते हैं किन्तु सभी क्षारक, क्षार नहीं होते।




क्षारों के रासायनिक गुण


(i) धातुओं से अभिक्रिया प्रबल क्षार क्रियाशील धातुओं से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करते हैं। अतः इन्हें सक्रिय धातुओं के पात्र में नहीं रखा जाता है।


धातु + क्षार   →   लवण + हाइड्रोजन गैस 


Zn (s) + 2NaOH (aq) →Na₂ZnO₂ (aq) + H₂ 




(ii) अधातुओं-ऑक्साइडों से अभिक्रिया अधातु ऑक्साइडों (अम्लीय ऑक्साइड) से अभिक्रिया के परिणामस्वरूप लवण व जल प्राप्त होता है। इस अभिक्रिया से सिद्ध होता है, कि अधातु के ऑक्साइड अम्लीय प्रकृति के होते हैं।



 क्षार + अधातु- ऑक्साइड  → लवण जल


Ca(OH)₂ (aq) + CO₂ (g) → CaCO₃(s)+ H₂O 


बुझा चूना  कार्बन डाइऑक्साइड  कैल्सियम कार्बोनेट




अम्लो/क्षारो के जलीय विलयन


जल की उपस्थिति में अम्ल H⁺ आयन देते हैं, परन्तु ये स्वतन्त्र अवस्था में नहीं रह सकते। अतः H⁺ आयन जल के अणुओं से संयुक्त होकर H₃⁺O(हाइड्रोनियम आयन) का निर्माण करते हैं। अतः यह कहा जा सकता है, कि जलीय विलयन में अम्ल, H⁺ आयन या (H₃O) आयन देते हैं,


उदाहरण


HCI + H₂O  →    H₃O+ + CI⁻


H⁺ + H₂0 → H₃O⁺


इसी प्रकार, क्षार जलीय विलयन में OH⁻ आयन देते हैं।


उदाहरण


NaOH(s).    H₂0 → Na⁺(aq) + OH⁻ (aq)




अम्लों तथा क्षारों के मध्य अभिक्रिया


अम्ल, क्षारों से क्रिया करके उनके प्रभाव को नष्ट कर देते हैं तथा लवण व जल का निर्माण करते हैं। लवण व जल बनने की यह अभिक्रिया उदासीनीकरण अभिक्रिया कहलाती है।


अम्ल + क्षार    → लवण + जल 





अम्लों तथा क्षारों की प्रबलता -


जिन अम्लों तथा क्षारों के आयनन की मात्रा अधिक होती है, उन्हें क्रमशः प्रबल अम्ल तथा प्रबल क्षार कहते

हैं।


इसी प्रकार, जिन अम्लों तथा क्षारों के आयनन की मात्रा कम होती है, उन्हें क्रमशःदुर्बल अम्ल तथा दुर्बल क्षार कहते हैं।


अम्ल या क्षार पर तनुता का प्रभाव  किसी अम्ल या क्षार की जल के साथ अभिक्रिया तनुकरण कहलाती है, जिससे प्रति एकांक आयतन में उपस्थित (H₃O⁺/OH⁻) आयन की सान्द्रता में कमी हो जाती है।




सूचक


वे पदार्थ, जिनका उपयोग किसी अनुमापन में अन्तिम बिन्दु या उदासीन बिन्दु को निर्धारित करने के लिए किया जाता है, सूचक कहलाते हैं।


सूचक निम्न प्रकार के होते हैं


(i) प्राकृतिक सूचक


(ii) संश्लेषित सूचक


(iii) गन्धयुक्त सूचक


 (iv) सार्वत्रिक सूचक


 उदाहरण लिटमस पेपर, फीनॉल्फ्थैलीन, मेथिल ऑरेन्ज, आदि।



प्रश्न

pH मान की परिभाषा उदाहरण सहित


pH मान


सोरेन्सन ने बताया कि, किसी विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन आयन सान्द्रता के ऋणात्मक लघुगणक को उस विलयन का pH मान कहते हैं।




pH = -log₁₀ [H⁺] = log₁₀(1/(H⁺)



अर्थात् किसी विलयन का pH मान उसमें उपस्थित हाइड्रोजन आयनों के ग्राम आयन (या मोल) प्रति लीटर में सान्द्रण के ऋणात्मक लघुगणक के बराबर होता है या अन्य शब्दों में, pH मान हाइड्रोजन आयन सान्द्रण के व्युत्क्रम का लघुगणक होता है।


यदि pH>7, तब विलयन क्षारीय होगा।


यदि pH<7, तब विलयन अम्लीय होगा। .


• यदि pH=7, तब विलयन उदासीन होगा।



दैनिक जीवन में pH का महत्त्व में


(i) पौधों एवं जन्तुओं की pH के प्रति संवेदनशीलता - जीव जगत् में जीव, न्यून pH मान क्षेत्र परास में ही जीवित रह पाते हैं। सामान्यतया इनका शरीर 7.0 से 7.8 pH परास के मध्य ही कार्य करता है। वर्षा जल के pH का मान 5.6 से कम होने पर यह अम्लीय वर्षा कहलाती है। जब अम्ल नदी के जल में मिल जाता है तो उसका pH मान कम हो जाता है, जिससे जलीय प्राणियों का अस्तित्व कठिन हो जाता है।


(ii) मिट्टी की pH - पौधे के प्रत्येक भाग की उत्तम वृद्धि के लिए उचित pH परास की आवश्यकता होती है। उचित pH परास ज्ञात करने के लिए, मिट्टी के नमूने की जाँच करके pH का मान ज्ञात किया जाता है। पौधे की प्रकृति के अनुसार pH मान का निर्धारण किया जाता है।



(iii) हमारे पाचन तंत्र का pH हमारे उदर में स्थित HCI अम्ल भोजन के पाचन में सहायक होता है, अधिक मात्रा में HCI का उत्पादन, उदर में गंभीर दर्द व जलन उत्पन्न कर देता है। जिससे मुक्त होने के लिए प्रतिअम्ल (antacid) लेना पड़ता है। यह HCI की अधिक मात्रा को अभिक्रिया द्वारा उदासीन कर देता है। मिल्क ऑफ मैग्नीशिया (मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड) प्रतिअम्ल का एक अच्छा उदाहरण है।


(iv) pH परिवर्तन के कारण दंत-क्षय मुँह के pH का मान 5.5 से कम अर्थात अधिक अम्लीय होने पर दाँतों का क्षय प्रारंभ हो जाता है। दाँतों की सुरक्षा के लिए, दाँतों पर कैल्सियम फॉस्फेट का इनैमल होता है, जिसका pH, 5.5 से कम होने पर संक्षारण हो जाता है। उचित दंतमंजन (क्षारीय प्रकृति का होने के कारण) के प्रयोग द्वारा दंत-क्षय को रोका जा सकता है।



 (v) पशुओं एवं पौधों द्वारा उत्पन्न रसायनों से आत्मरक्षा - मधुमक्खी के डंक में अम्ल होता है, जो इसके द्वारा काटने पर यह हमारे शरीर में प्रविष्ट कर जाता है, जिससे हमें जलन व दर्द का अनुभव होता है। डंक मारे गए स्थान पर बेकिंग सोडा जैसे दुर्बल-क्षार लगाने से आराम मिलता है। इसी प्रकार कई अन्य जंतुओं से हम उचित उपचार द्वारा आत्मरक्षा कर सकते हैं।



 (vi) पौधों में pH कई पौधों से हानिकारक अम्लों का स्राव होता है। जैसे-नेटल एक शाकीय पौधा है। इसके पत्तों में डंकनुमा बाल होते हैं जो जंतु के शरीर से छू जाने पर डंक जैसा दर्द देते हैं। क्योंकि इसके बालों से मेथेनॉइक अम्ल का स्राव होता है।) इससे उत्पन्न दर्द को दूर करने के लिए ढाक के पौधे के पत्ते (रगड़ कर) का प्रयोग किया जा सकता है।





लवण


किसी अम्ल तथा क्षार की उदासीनीकरण अभिक्रिया से प्राप्त आयनिक यौगिक को लवण कहते हैं।


 आर्हेनियस सिद्धान्त के अनुसार, लवण को जल में घोलने पर यह अपने अवयवी आयनों में वियोजित हो जाता है तथा लवण के जलीय विलयन में धनायन व ऋणायन उपस्थित होते हैं।


धनायनों को भास्मिक या क्षारीय मूलक तथा ऋणायनों को अम्लीय मूलक कहा जाता है क्योंकि लवण का धनायन क्षार से एवं ऋणायन अम्ल से प्राप्त होता है। लवणों के जल- अपघटन द्वारा प्राप्त विलयन की प्रकृति इसके द्वारा प्राप्त अम्ल तथा क्षारों की प्रबलता पर निर्भर करती हैं। लवण सामान्यतः अवाष्पशील, गन्धहीन तथा विद्युतसंयोजक होते हैं।



1. साधारण नमक


रासायनिक नाम सोडियम क्लोराइड अणुसूत्र NaCl 


HCI एवं NaOH की अभिक्रिया से उत्पन्न लवण सोडियम क्लोराइड (NaCl) कहलाता है।


HCl + NaOH   →   NaCl + H2O



साधारण नमक


यह एक उदासीन लवण है। साधारण नमक (NaCl) द्वारा कई उपयोगी पदार्थ जैसे-सोडियम हाइड्रॉक्साइड, बेकिंग सोडा, वाशिंग सोडा, विरंजक चूर्ण आदि प्राप्त किए जा सकते हैं। इसे खनिज नमक भी कहा जाता है।


2. कॉस्टिक सोडा


रासायनिक नाम- सोडियम हाइड्रॉक्साइड अणु सूत्र-NaOH सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन में विद्युत प्रवाह द्वारा, NaCI वियोजित NaOH प्रदान करता है। यह प्रक्रिया क्लोर-क्षार प्रक्रिया कहलाती है।


2NaCl(aq) + 2H₂O(1) → 2NaOH (aq) + Cl₂(g) + H₂(g)


उपयोग सोडियम हाइड्रॉक्साइड का उपयोग धातुओं से ग्रीज हटाने में, साबुन तथा अपमार्जक, कागज निर्माण में, कृत्रिम फाइबर आदि के निर्माण में होता है।



3. विरंजक चूर्ण


रासायनिक नाम कैल्सियम क्लोरोहाइपोक्लोराइट अथवा क्लोराइट ऑफ लाइम 


सामान्य नाम – ब्लीचिंग पाउडर – अणुसूत्र Ca(OCI)Cl अथवा CaOCl₂



निर्माण की विधि औद्योगिक स्तर पर इसे हेसन-क्लेवर अथवा बैचमैन विधियों द्वारा शुष्क बुझे चूने पर क्लोरीन गैस की क्रिया द्वारा प्राप्त करते हैं। 


 Ca(OH)2 + Cl₂ → CaOCl₂ + H₂0.




उपयोग इसका उपयोग सूती तथा लिनेन वस्त्रों तथा लकड़ी की लुग्दी के विरंजन, पेयजल के शोधन (जीवाणुनाशक के रूप में), क्लोरोफॉर्म के निर्माण, यौगिकों के ऑक्सीकरण तथा चीनी को सफेद करने हेतु आदि में किया जाता है।


नोट विरंजक चूर्ण मिश्रण है, इसका अणुसूत्र तथा अणुभार नहीं होता है।


4. खाने का सोडा/बेकिंग सोडा


रासायनिक नाम सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट अथवा सोडियम बाइकार्बोनेट    


  अणु सूत्र NaHCO      अणुभार 84


निर्माण की विधि प्रयोगशाला में इसे सोडियम कार्बोनेट के ठण्डे जलीय विलयन में कार्बन डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित करके बनाया जाता है।


Na₂CO₃ + H₂O + CO₂ →2NaHCO₃


सोडियम कार्बोनेट       सोडियम बाइकार्बोनेट



उपयोग इसे बेकिंग पाउडर (बेकिंग सोडा तथा पोटैशियम हाइड्रोजन टारट्रेट का मिश्रण), झागयुक्त पेय पदार्थों, आमाशय की अम्लता को दूर करने वाली औषधि (प्रतिअम्ल के रूप में) के निर्माण में, चर्म रोग के निदान में, कच्चे दूध के फटने के समय को बढ़ाने हेतु तथा आग बुझाने वाले यन्त्रों आदि में प्रयुक्त किया जाता है।



5. धावन सोडा/धोने का सोडा


रासायनिक नाम सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट 


सामान्य नाम सोडा ऐश या क्रिस्टलीय सोडियम कार्बोनेट


अणुभार   286    अणु सूत्र Na₂CO₃.10H₂0


निर्माण की विधि धावन सोडा, बेकिंग सोडा को गर्म करके पुनः जलीय-क्रिस्टलीकरण द्वारा प्राप्त किया जाता है।


Na₂CO₃ (S) + 10H₂O () →Na₂CO₃.10H₂O (s)


सोडियम कार्बोनेट   सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट


उपयोग इसे कपड़े धोने के सोडे के रूप में, जल की कठोरता दूर करने में, काँच, कागज, कॉस्टिक सोडा, डिटर्जेन्ट पाउडर आदि के निर्माण में, प्रयोगशाला अभिकर्मक के रूप में, आँखों की दवाई में, जीवाणुनाशक तथा रोगाणुरोधकों के रूप में प्रयोग किया जाता है।


6. प्लास्टर ऑफ पेरिस


रासायनिक नाम- कैल्सियम सल्फेट


अणु सूत्र CaSO4 ½H2O


सामान्य नाम - प्लास्टर ऑफ पेरिस 


अणुभार 136.134


निर्माण की विधि जब कैल्सियम सल्फेट डाइहाइड्रेट (अर्थात् जिप्सम) को 373K ताप पर गर्म किया जाता है, तो निर्जलीकरण के द्वारा प्लास्टर ऑफ पेरिस का निर्माण होता है।


CaSO₄. 2H₂0    → CaSO₄.½ H₂O




उपयोग


• इसका उपयोग टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने के लिए प्लास्टर चढ़ाने में किया जाता है।


• इसका उपयोग सामान जैसे- मूर्तियों व खिलौनों के निर्माण में किया जाता है।


 • इसका उपयोग दन्त चिकित्सा, दीवारों को चिकना बनाने तथा उन पर अलंकरण कार्य करने में भी किया जाता है।


. इसे अग्निरोधक पदार्थ के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।




क्रिस्टलन-जल


लवण के इकाई सूत्र में स्थित, जल के निश्चित अणुओं की संख्या को क्रिस्टल का जल कहते हैं। 


जैसे-कॉपर सल्फेट के इकाई सूत्र में पाँच अणु जल के उपस्थित होते हैं। अर्थात् CuSO₄.5H₂O नीला थोथा। इसी प्रकार, NaCO₃.10H₂O होता है। उपरोक्त सूत्र की सहायता से ज्ञात कर सकते हैं, कि अणु आर्द्र है अथवा नहीं। जिप्सम लवण में दो अणु क्रिस्टलन-जल पाया जाता है-CuSO₄ 2H₂0 


जल के निकल जाने पर अणु ऐनहाइड्राइड अणु कहलाता है।



अतिलघु उत्तरीय प्रश्न      2 अंक


प्रश्न 1. अम्ल और क्षारक की आधुनिक अवधारणा क्या है? प्रत्येक का एक-एक उदाहरण देते हुए स्पष्ट कीजिए। सम्बन्धित रासायनिक समीकरण भी लिखिए।


अथवा अम्ल तथा क्षार की आधुनिक अवधारणा स्पष्ट कीजिए 


अथवा अम्ल तथा भस्म की आधुनिक अवधारणा दीजिए। एक प्रबल अम्ल तथा एक दुर्बल भस्म का नाम भी लिखिए।



उत्तर अम्ल वे पदार्थ हैं, जो जलीय विलयन में वियोजित अथवा आयनित होकर हाइड्रोजन आयन (H⁺) अथवा हाइड्रोनियम आयन (H₃O⁺) देते हैं।


उदाहरण HCI, H₂SO₄आदि।


HCl(aq)  ⇔ H⁺ + Cl⁻


क्षार वे पदार्थ हैं, जो जलीय विलयन में वियोजित अथवा आयनित होकर हाइड्रॉक्साइड आयन (OH⁻) देते हैं।


 उदाहरण NaOH, KOH, NH₄OH आदि।


NaOH (aq)   ⇔ Na⁺ + OH⁻




प्रबल अम्ल HCI, H₂SO₄, HNO₃


 दुर्बल क्षार (भस्म) NH₄OH


प्रश्न 2. किसी प्रबल अम्ल तथा प्रबल क्षार की उदासीनीकरण ऊष्मा स्थिर होती है। क्यों?




उत्तर प्रबल अम्ल तथा प्रबल क्षार तनु विलयन में पूर्णतया आयनित होकर H⁺ (हाइड्रोजन आयन) तथा OH⁻(हाइड्रॉक्साइड आयन) देते हैं, जो संयोग करके H₂O (जल) बना लेते हैं, अतः प्रबल अम्ल तथा प्रबल क्षार की उदासीनीकरण ऊष्मा वास्तव में H⁺ तथा OH⁻आयनों द्वारा जल (H₂O) की सम्भवन ऊष्मा है, जिसका मान सदैव - 13.7 किलोकैलोरी होता है। यही कारण है कि प्रबल अम्ल तथा प्रबल क्षार की ऊष्मा का मान सदैव स्थिर (अर्थात् - 13.7 किलोकैलोरी) होता है।


प्रश्न 3. आसवित जल विद्युत का चालक क्यों नहीं होता, जबकि वर्षा का जल होता है?



 उत्तर वर्षा के जल में घुलित लवणों के कारण आयन उपस्थित होते हैं, जो उसे विद्युत का सुचालक बनाते हैं, जबकि आसवित जल में कोई आयन उपस्थित नहीं

होते, अतः यह विद्युत का चालक नहीं होता। 



प्रश्न 4. जल की अनुपस्थिति में अम्ल का व्यवहार अम्लीय क्यों नहीं होता है?


उत्तर अम्ल के अणुओं के आयनीकरण के लिए जल की उपस्थिति आवश्यक है।


HA+ H₂O → H₃O⁺ + A⁻ अम्ल


आयनीकरण के पश्चात् उत्पन्न H₃O⁺ आयन ही अम्लीय गुण प्रदर्शित करते हैं। शुष्क अवस्था में आयनों की अनुपस्थिति होने के कारण अम्ल अम्लीय व्यवहार प्रदर्शित नहीं करते।


प्रश्न 5. हाइड्रोजन आयन सान्द्रण से क्या तात्पर्य है? उदासीन विलयन में हाइड्रोजन आयन सान्द्रण का मान कितना होता है ?


 

उत्तर हाइड्रोजन आयन सान्द्रण किसी जलीय विलयन के एक लीटर आयतन में उपस्थित हाइड्रोजन के ग्राम-आयनों (मोलो) की संख्या को उस विलयन का हाइड्रोजन आयन सान्द्रण कहते हैं। इसे [H] द्वारा प्रदर्शित करते हैं। उदासीन विलयन में हाइड्रोजन आयन सान्द्रण का मान 1x10⁻⁷ मोल प्रति लीटर होता है।


प्रश्न 6. जल का आयनिक गुणनफल क्या है? 25°C पर इसका मान लिखिए।


अथवा जल का आयनिक गुणनफल क्या है? स्पष्ट करें



उत्तर जल का आयनिक गुणनफल यह स्थिर ताप पर जल में उपस्थित हाइड्रोजन आयनों के सान्द्रण [H⁺] तथा हाइड्रॉक्साइड आयनों के सान्द्रण [OH⁻ ] के गुणनफल के बराबर होता है। इसे Kω से प्रदर्शित करते हैं। अर्थात्


Kω = [H⁺]  [OH ⁻] 


25°C पर जल के आयनिक गुणनफल का मान लगभग 1x10⁻¹⁴ होता है। 



प्रश्न 7. ताजे दूध के pH का मान 6 होता है। दही बन जाने पर इसके pH के मान में क्या परिवर्तन होगा? अपना उत्तर समझाइए।


उत्तर जब दूध से दही का निर्माण होता है, तो दूध में उपस्थित शर्करा लैक्टोस लैक्टिक अम्ल में परिवर्तित हो जाती है। अतः दूध (pH = 6) का pH मान दही

(pH < 6) बनने पर अपेक्षाकृत कम हो जायेगा।



प्रश्न 8. उदासीनीकरण अभिक्रिया क्या है? दो उदाहरण दीजिए।


 उत्तर किसी अम्ल की किसी क्षारक से अभिक्रिया के फलस्वरूप लवण तथा जल के निर्माण की क्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं। 



उदाहरण


NaOH   +  HCI  →NaCl +H₂O


Ca(OH)2   +  2HCI → CaCl₂ +H₂O





प्रश्न 9. खाने का सोडा बनाने की विधि का रासायनिक समीकरण लिखिए। इस पर ताप का प्रभाव भी लिखिए। 


अथवा खाने का सोडा बनाने की विधि लिखिए। इसे धावन सोडे में कैसे परिवर्तित करेंगे? सम्बन्धित समीकरण भी लिखिए। 


अथवा खाने के सोडे का रासायनिक नाम तथा अणुसूत्र लिखिए। इसके बनाने की विधि का केवल रासायनिक समीकरण लिखिए।


उत्तर खाने के सोडे का रासायनिक नाम सोडियम बाइकार्बोनेट  (NaHCO₃) होता है।


बनाने की विधि प्रयोगशाला में इसे सोडियम कार्बोनेट के ठण्डे जलीय विलयन में कार्बन डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित करके बनाया जाता है।


Na₂CO₃ + CO₂ + H₃O → 2NaHCO₃


सोडियम कार्बोनेट             सोडियम बाइकार्बोनेट


                                        (खाने का सोडा)



ताप का प्रभाव (100°C से उच्च ताप) 


2NaHCO₃ → Na₂CO₃ + H₂O + CO₂


(100°C से उच्च ताप)   सोडियम कार्बनिट 


                                    (धावन सोडा)



प्रश्न 12. बेकिंग सोड़ा बनाने की दो विधियाँ रासायनिक समीकरण सहित लिखिए।



उत्तर (i) सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO₃) का निर्माण सोडियम कार्बोनेट (Na₂CO₃) के संतृप्त जलीय विलयन में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस प्रवाहित करने पर होता है।


Na₂CO₃ + CO₂ → 2NaHCO₃


सोडियम कार्बोनेट        सोडियम बाइकार्बोनेट



(ii) सोडियम क्लोराइड की अभिक्रिया, अमोनिया, जल व कार्बन डाइऑक्साइड से करवाने पर बेकिंग सोडा (सोडियम बाइकार्बनिट) प्राप्त होता है। 


NaCl + H₂O+CO₂+NH₃—, NaHCO₃+NH₄Cl




प्रश्न 13. धावन सोडा बनाने का रासायनिक समीकरण तथा इसका एक उपयोग भी लिखिए।


उत्तर धावन सोडा बनाने की रासायनिक अभिक्रिया 2NaOH + CO₂ → Na₂CO₃ + H₂0


उपयोग जल की कठोरता दूर करने में।


प्रश्न 14. धावन सोडा का रासायनिक नाम तथा अणु सूत्र लिखिए। इसके बनाने की विधि का केवल रासायनिक समीकरण लिखिए।


उत्तर धावन सोडा का रासायनिक नाम सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट


अणु सूत्र Na₂CO₃. 10H₂O



बनाने की विधि 

2NaOH + CO₂→ Na₂CO₃+ H₂O



प्रश्न 15. प्लास्टर ऑफ पेरिस बनाने की एक विधि लिखिए तथा इसकी जल के साथ रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।


अथवा प्लास्टर ऑफ पेरिस बनाने की विधि तथा एक उपयोग लिखिए। 



उत्तर निर्माण की विधि जब कैल्सियम सल्फेट डाइहाइड्रेट (अर्थात् जिप्सम) को 120°C ताप पर गर्म किया जाता है, तो निर्जलीकरण के द्वारा प्लास्टर ऑफ

पेरिस का निर्माण होता है।

                       120°C

CaSO₄ 2H2O    →CaSO₄.½ H₂O+3/2 H₂O


जिप्सम                  प्लास्टर ऑफ पेरिस


जल से क्रिया  इसकी जल से अभिक्रिया कराने पर जिप्सम का निर्माण होता है। इसे प्लास्टर ऑफ पेरिस का जमना (Setting of plaster of Paris) कहते हैं। यह क्रिया ऊष्माक्षेपी होती है।


CaSO₄.½ H₂O + 3/2H₂O  → CaSO₄ 2H₂0 


अथवा


(CaSO₄)₂ .2H2O + 3H₂O→ 2CaSO₄. 2H₂0


प्लास्टर ऑफ पेरिस                   जिप्सम





प्लास्टर ऑफ पेरिस के जमने से आयतन में प्रसार होता है।


उपयोग इसका उपयोग टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने के लिए प्लास्टर चढ़ाने में किया जाता है।


प्रश्न 16. प्लास्टर ऑफ पेरिस को आर्द्रता-रोधी बर्तन में क्यों रखा जाना चाहिए? इसकी व्याख्या कीजिए।


उत्तर जल के संपर्क में आने पर प्लास्टर ऑफ पेरिस जल के साथ संयुक्त होकर एक कठोर पदार्थ जिप्सम बनाता है, जिसमें प्लास्टर ऑफ पेरिस वाले गुण नहीं होते।


CaSO₄.1/2 H₂O + 1-½ H₂O प्लास्टर ऑफ पेरिस → CaSO₄ .2H₂O जल जिप्सम


अतः प्लास्टर ऑफ पेरिस को आर्द्रतारोधी बर्तन में रखना अधिक सुरक्षित है। 



प्रश्न 17. पीतल एवं ताँबे के बर्तनों में दही तथा खट्टे पदार्थ क्यों नहीं रखने चाहिए?


उत्तर खट्टे पदार्थों (जैसे- दही, नींबू का रस, इमली का रस, अचार, आदि) में उपस्थित अम्ल तांबे अथवा पीतल से अभिक्रिया करके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक लवण उत्पन्न करता है। अतः इन्हें पीतल या ताँबे के बर्तनों में न रखकर, काँच अथवा चीनी मिट्टी के बर्तनों में रखना चाहिए।


प्रश्न 18. धातु के साथ अम्ल की अभिक्रिया होने पर सामान्यतः कौन-सी गैस निकलती है? एक उदाहरण के द्वारा समझाइए। इस गैस की उपस्थिति की जाँच आप कैसे करेंगे?


उत्तर सामान्यतया जब कोई धातु तनु अम्लो (HCI अथवा H₂SO₄आदि) से अभिक्रिया करती है, तो हाइड्रोजन गैस उत्पन्न होती है। इस गैस अर्थात् हाइड्रोजन के परीक्षण हेतु एक जलती हुई मोमबत्ती परखनली के मुँह के पास लाने पर वह धड़ाके (पॉप) की आवाज के साथ जलती है।


 उदाहरण


Mg(s) + 2HCl(aq)   →  MgCl₂ (aq) + H₂ (g)


 Mg(s) + H2SO (aq) → MgSO₄ (aq) + H₂(g)


              तनु


प्रश्न 19. अम्ल का जलीय विलयन विद्युत का चालन क्यों करता है?



उत्तर अम्ल को जल में मिलाने पर यह आयनीकृत हो जाता है। जब इस जलीय विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो इसमें उपस्थित आयन ही विद्युत का चालन करते हैं।



प्रश्न 20. शुष्क हाइड्रोजन क्लोराइड गैस शुष्क लिटमस पत्र के रंग को क्यों नहीं परिवर्तित करती?


उत्तर शुष्क हाइड्रोजन क्लोराइड गैस का आयनीकरण नहीं होता है। जब इसका जलीय विलयन बनाते हैं, तब ही इसमें H₃O+ तथा CI⁻ आयन उत्पन्न होते हैं। इसी अवस्था में इसमें उपस्थित H₃O+ आयनों के कारण नम हाइड्रोजन क्लोराइड गैस या हाइड्रोक्लोरिक अम्ल शुष्क लिटमस पत्र को नीले से लाल कर देते हैं। अर्थात् अम्लीय गुण प्रदर्शित करते हैं, जबकि शुष्क हाइड्रोजन क्लोराइड गैस आयनों की अनुपस्थिति के कारण ऐसा नहीं करती है। 


प्रश्न 21. अम्ल को तनुकृत करते समय यह क्यों अनुशंसित करते हैं कि अम्ल को जल में मिलाना चाहिए, न कि जल को अम्ल में? 



उत्तर अम्ल की तनुकरण अभिक्रिया अत्यंत ही ऊष्माक्षेपी क्रिया है, अर्थात् जब अम्ल में जल मिलाया जाता है, तो अभिक्रिया में बहुत अधिक ऊष्मा उत्पन्न होने के कारण मिश्रण आस्फलित होकर पात्र से बाहर आ सकता है। इससे जो व्यक्ति वहाँ उपस्थित हैं, उन्हें क्षति हो सकती है। किन्तु इसके विपरीत जब एक पात्र में जल लेकर उसमें दूसरे पात्र से धीरे-धीरे दीवार के सहारे से अम्ल मिलाते हैं, तो ऊष्मा धीरे-धीरे उत्पन्न होती है व अभिक्रिया अनियंत्रित नहीं होती। अतः अम्ल 

को जल में मिलाया जाना उचित है, इसका विपरीत नहीं। 



प्रश्न 22. H⁺(aq) आयन की सांद्रता का विलयन की प्रकृति पर क्या प्रभाव पड़ता है? 


उत्तर H⁺(aq) आयन की सांद्रता विलयन की अम्लीय प्रकृति के समानुपाती होती है। इसका अर्थ है कि H⁺आयन सांद्रता के बढ़ने के साथ-साथ विलयन की अम्लीय प्रकृति बढ़ती है और H⁺ आयन सांद्रता कम होने के साथ-साथ अम्लीय प्रकृति घटती है। 


प्रश्न 23. क्या क्षारकीय विलयन में Ht (aq) आयन होते हैं? अगर हाँ, तो यह क्षारकीय क्यों होता है?


उत्तर हाँ, क्षारकीय विलयन में H⁺ (aq) आयन भी होते हैं परंतु इनकी सांद्रता OH⁻(aq) आयनों की सांद्रता की अपेक्षा कम होती है। इसका कारण यह है कि ये विलयन क्षारक तथा जल के मिलने से बनते हैं।


H₂O    ⇔  H⁺+ OH⁻


 [ जल एक ध्रुवीय विलायक है।


क्षारक    ⇔ धनायन + OH⁻


इसलिये ये विलयन क्षारकीय होते हैं। 



प्रश्न 24. कोई किसान खेत की मृदा की किस परिस्थिति में बिना बुझा हुआ चूना (कैल्सियम ऑक्साइड), बुझा हुआ चूना (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड) या चॉक (कैल्सियम कार्बोनेट) का उपयोग करेगा? 


उत्तर ये तीनों यौगिक, कैल्सियम ऑक्साइड बुझा हुआ चूना तथा चॉक क्षारकीय प्रकृति के हैं। अत: इनका उपयोग अम्लीय प्रकृति की मिट्टी को कम अम्लीय करने, उदासीन अथवा कुछ क्षारकीय करने हेतु किया जाना उचित है। इसका निर्णय उन फसलों के चयन पर भी निर्भर करता है, जिन्हें वहाँ उगाया जाना है।



           लघु उत्तरीय प्रश्न


प्रश्न 1. अम्लों तथा क्षारकों में अन्तर बताइए।


उत्तर


अम्लों तथा क्षारकों में अन्तर





अम्ल

क्षारक

अम्लों का स्वाद खट्टा होता है।

क्षारकों का स्वाद कड़वा होता है।


ये नीले लिटमस को लाल कर देते हैं।

ये लाल लिटमस को नीला कर देते हैं।

इनकी प्रकृति संक्षारक होती है अर्थात् इनके सम्पर्क में लकड़ी, कपड़ा, त्वचा, आदि आने पर नष्ट हो जाते हैं।


इनकी प्रकृति भी संक्षारक होती है। परन्तु ये प्रबल अम्लों की अपेक्षा कम संक्षारक होते हैं।


जब ये अम्लों के साथ क्रिया करते हैं, तो क्षारीय गुण विलुप्त हो जाता है।


जब ये क्षारों के साथ क्रिया करते हैं, तो अम्लीय गुण विलुप्त हो जाता है।

ये जल में विलेय होकर H⁺आयन देते हैं।

ये जल में विलेय होकर OH⁻आयन देते हैं।

उदाहरण HCI, H₂SO₄. HCIO₄. आदि।

उदाहरण KOH, NaOH, Ca(OH)₂ आदि












प्रश्न 4. सूचक क्या हैं? एक उदाहरण की सहायता से अम्ल-क्षार सूचकों के अम्लीय तथा क्षारीय माध्यम में रंग परिवर्तन को स्पष्ट कीजिए।


 

रंग भिन्न-भिन्न होता है। अत: pH मान में उचित परिवर्तन के साथ इनके रंग में परिवर्तन हो जाता है। उदाहरण लिटमस पेपर, मेथिल ऑरेन्ज, फीनॉल्फ्थैलीन, आदि।


उत्तर सूचक ये वे रंजक (Dye) हैं, जो किसी अम्ल अथवा क्षार के सम्पर्क में आने पर अपना रंग परिवर्तित कर लेते हैं। इनका अम्लीय तथा क्षारीय माध्यमों में रंग भिन्न-भिन्न होता है। अत: pH मान में उचित परिवर्तन के साथ इनके रंग में परिवर्तन हो जाता है। 


उदाहरण लिटमस पेपर, मेथिल ऑरेन्ज, फीनॉल्फ्थैलीन, आदि।



प्रयोगशाला में अम्लों तथा क्षारों के परीक्षण के लिए लिटमस पेपर सूचक का प्रयोग किया जाता है। यह निम्नलिखित दो प्रकार का होता है।


(i) नीला लिटमस पेपर


(ii) लाल लिटमस पेपर


अम्ल नीले लिटमस पेपर को लाल कर देते हैं तथा लाल लिटमस पेपर पर कोई प्रभाव नहीं डालते हैं। क्षार लाल लिटमस पेपर को नीला कर देते हैं तथा नीले लिटमस पेपर पर कोई प्रभाव नहीं डालते हैं।



प्रश्न 6. एक ग्वाला ताजे दूध में थोड़ा बेकिंग सोडा मिलाता है।


 (i) वह ताजे दूध के pH मान को 6 से बदल कर थोड़ा क्षारीय क्यों बना देता है?


(ii) इस दूध को दही बनने में अधिक समय क्यों लगता है? 



उत्तर (i) जब दूध खट्टा होता है तो उसमें अम्ल उत्पन्न होता है। बेकिंग सोडा (क्षारीय) मिलाने से यह उत्पन्न होने वाले अम्ल को उदासीन कर देता है तथा दूध खट्टा होने से बच जाता है। अत: pH को बढ़ाकर क्षारीय

बना देते हैं, जिससे दूध जल्दी नहीं फटता।


(ii) दूध से दही बनते समय दूध की लैक्टोस शर्करा लैक्टिक अम्ल में बदल जाती है। परन्तु बेकिंग सोडे की उपस्थिति में दूध अपेक्षाकृत क्षारीय होता है, जिससे उत्पन्न होने वाला अम्ल उदासीन हो जाता है।


अतः इससे दही बनने में अधिक समय लगता है।


प्रश्न 7. धोने के सोडा एवं विरंजक चूर्ण के दो-दो प्रमुख उपयोग बताइए।



उत्तर धोने के सोडे के उपयोग


(i) इसका उपयोग जल की स्थायी कठोरता को दूर करने के लिए किया जाता है। 


(ii) सोडियम कार्बोनेट का उपयोग काँच, साबुन आदि उद्योगों में किया जाता है।


विरंजक चूर्ण के उपयोग




(i) विरंजक चूर्ण का उपयोग जीवाणुनाशक के रूप में तथा जल के शुद्धिकरण में किया जाता है।


(ii) विरंजक चूर्ण का उपयोग ऑक्सीकारक के रूप में तथा चीनी सफेद करने में किया जाता है।


प्रश्न 8. निम्नलिखित पर ताप का प्रभाव लिखिए (केवल रासायनिक समीकरण लिखिए)


 (i) प्लास्टर ऑफ पेरिस


(ii) सोडियम बाइकार्बोनेट


उत्तर (i) प्लास्टर ऑफ पेरिस पर ताप का प्रभाव यदि कैल्सियम सल्फेट डाइहाइड्रेट या कैल्सियम सल्फेट अर्द्ध-हाइड्रेट को 120°C से अधिक ताप पर गर्म किया जाता है, तो निर्जलीय प्लास्टर प्राप्त होता है। इसे

मृत तापित प्लास्टर कहा जाता है। 


                      120C

CaSO₄ .2H₂0    →     CaSO₄ + 2H₂O


CaSO₄.½H₂O  →   CaSO₄ +½H₂O


400°C से अधिक ताप पर गर्म करने पर कैल्सियम सल्फेट का अपघटन हो जाता है। जिसके फलस्वरूप कैल्सियम ऑक्साइड प्राप्त होता है तथा SO₂

और 0₂ गैसें  मुक्त होती हैं।


2CaSO₄ → 2CaO+ 2S0₂ ↑ + 0₂ > 400C


(ii) 2NaHCO₃ → NaCO₃ + CO₂ + H₂O 



        विस्तृत उत्तरीय प्रश्न



प्रश्न 1. (i) प्रबल एवं दुर्बल अम्ल क्या है? अम्लों की निम्नलिखित सूची से प्रबल अम्लों को दुर्बल अम्लों से पृथक् कीजिए।


हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, साइट्रिक अम्ल, ऐसीटिक अम्ल, नाइट्रिक अम्ल, फॉर्मिक अम्ल, सल्फ्यूरिक अम्ल 


(ii) ऊष्मण के द्वारा आप बेकिंग पाउडर तथा धावन सोडा में विभेद कैसे करोगे?



उत्तर (i) प्रबल अम्ल वे अम्ल जो अपने जलीय विलयन में पूर्णतया आयनित होकर अत्यधिक मात्रा में हाइड्रोजन आयन (H⁺ या हाइड्रोनियम आयन (H₃O⁺) उत्पन्न करते हैं, प्रबल अम्ल कहलाते हैं।



दुर्बल अम्ल वे अम्ल जो अपने जलीय विलयन में पूर्णतया आयनित नहीं होते तथा विलयन में कम हाइड्रोजन आयन (H⁺) या हाइड्रोनियम आयन (H₃O⁺) प्रदान करते हैं, दुर्बल अम्ल कहलाते है।


सूची में दिए गए अम्लों में 


प्रबल अम्ल हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCI), नाइट्रिक अम्ल (HNO₃,), सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄


दुर्बल अम्ल ऐसीटिक अम्ल (CH₃COOH), फॉर्मिक अम्ल (HCOOH)


(ii) बेकिंग सोडा (NaHCO₃) को गर्म करने पर कार्बन डाइऑक्साइड गैस (CO₂) उत्पन्न होती है जिसे चूने के पानी में प्रवाहित करने पर वह दूधिया हो जाता है।


2NaHCO₃ बेकिंग सोडा  ऊष्मा → Na₃CO₃ + H₂O+ CO₂




घावन सोडा (Na₂CO₃ .10H₂0) को गर्म करने पर गैस नहीं निकलती है।


Na₂ CO₃.10H₂0. → Na₂CO₃+ 10H₂O 




प्रश्न 2. बेकिंग पाउडर का रासायनिक नाम तथा अणु सूत्र क्या है? इसको बनाने की विधि तथा दो प्रमुख रासायनिक गुण समीकरण देते हुए लिखिए। 




उत्तर बेकिंग पाउडर सोडियम बाइकार्बोनेट (बेकिंग सोडा) तथा पोटैशियम हाइड्रोजन टारट्रेट का मिश्रण बेकिंग पाउडर कहलाता है। 


(i) बेकिंग सोडे का रासायनिक नाम सोडियम बाइकार्बोनेट अथवा सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट 



(ii) अणु सूत्र NaHCO₃ 


निर्माण विधि इसे प्रयोगशाला में धावन सोडे (सोडियम कार्बोनेट) के जलीय विलयन में कार्बन डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित करके प्राप्त किया जाता है।


Na₂CO₃ + H₂O + CO₂  → 2NaHCO₃


 इसके प्रमुख रासायनिक गुण निम्नलिखित हैं


 (i) इसे 100°C से अधिक ताप तक गर्म करने पर यह अपघटित होकर सोडियम कार्बोनेट बनाता है।


                  100°C


2NaHCO₃     →    Na₂CO₃ + H₂O + CO₂


सोडियम बाइकार्बनेट         सोडियम कार्बनेट


(ii) यह अम्लों के साथ क्रिया करके सोडियम लवण, जल तथा कार्बन डाइऑक्साइड मुक्त करता है।


NaHCO₃ + HCI  → NaCl + H₂O + CO₂  सोडियम बाइकार्बोनेट         सोडियम लवण




                आंकिक प्रश्न


प्रश्न 1. pH4 मान के विलयन में H⁺ आयनों की सान्द्रता बताइए। इस विलयन की प्रकृति बताइए।


 हल


[H⁺ | =10⁻pH




[H⁺ ] = 10⁻⁴मोल/लीटर क्योंकि इस विलयन का pH मान 7 से कम है, अत: विलयन की प्रकृति अम्लीय होगी।





       क्या होता है जब ?


केवल रासायनिक समीकरण दीजिए।



डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित


(i) सोडियम कार्बोनेट के विलयन में कार्बन डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित करते हैं। 


(ii) सोडियम बाइकार्बोनेट पर ताप पर प्रभाव।


 अथवा  खाने के सोहे अथवा सोडियम बाइकार्बोनेट को गर्म करते हैं। 


 (iii) सोडियम बाइकार्बोनेट तनु सल्फ्यूरिक अम्ल से अभिक्रिया करता है।


(iv) ब्लीचिंग पाउडर कार्बन डाइऑक्साइड से अभिक्रिया करता है। 


 (v) ब्लीचिंग पाउडर को तनु ऐसीटिक अम्ल के साथ गर्म करते हैं। 


(vi) अमोनियम क्लोराइड (नौसादर) को बुझे चूने (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड) के साथ गर्म करते हैं।


(vii) अमोनियम क्लोराइड (नौसादर) को गर्म करते हैं।


(viii) प्लास्टर ऑफ पेरिस को गर्म किया जाता है।


 (ix) विरंजक चूर्ण की क्रिया तनु सल्फ्यूरिक अम्ल से करायी जाती है।


(x) जिप्सम को 373 K पर गर्म किया जाता है।


(xi) बुझे हुए चूने में क्लोरीन गैस प्रवाहित की जाती है। 


(xii) कार्बन डाइऑक्साइड गैस को चूने के पानी में प्रवाहित किया जाता है।



उत्तर (i) Na₂CO₃ + H₃O + CO2 →2NaHCO₃



                                      सोडियम बाइकार्बोनेट


(ii) 2NaHCO3       →  Na₂CO₃+ CO2 +H2O

 सोडियम बाइकार्बोनेट (100°C से उच्च ताप) सोडियम बाइकार्बोनेट


(iii) 2NaHCO₃+ H₂SO₄ → Na₂SO₄ + 2H₂O + 2CO₂


(तनु) सोडियम बाइकार्बोनेट  सल्फ्यूरिक अम्ल       सोडियम  सल्फेट


(iv) CaOCl₂ + CO₂→ CaCO₃ + Cl₂ ↑


विरंजक चूर्ण        कैल्सियम कार्बोनेट  क्लोरीन 


(v) CaOCl₂ + 2CH₃COOH    →(CH3COO)₂Ca + H₂O + Cl₂


 ब्लीचिंग पाउडर ऐसीटिक अम्ल कैल्सियम ऐसीटेट


(vi) 2NH₄Cl + Ca(OH)₂→CaCl₂ +2H₂O+2NH₃ अमोनिया


नौसादर बुझा चूना


कैल्सियम क्लोराइड




(vii) NH₄CI → NH₃(g) + HCl(g) अमोनियम


क्लोराइड (नौसादर)   अमोनिया   हाइड्रोजन गैस क्लोराइड


(viii) CaSO₄.2H₂O 120°C→ CaSO₄+ H₃O


प्लास्टर ऑफ पेरिस       कैल्सियम        सल्फेट



(ix) CaOCl2 विरंजक चूर्ण +H2SO4→CaSO4 + H2O + Cl₂ ↑




up ncert class 10 science chapter 3 Metals and Non-metals notes in hindi


यूपी बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 3 धातु एवं अधातु का सम्पूर्ण हल





धातु एवं अधातु 

Metals and Non-metals






सभी महत्वपूर्ण परिभाषा



1. वे तत्त्व जो ऊष्मा तथा विद्युत का चालन करते हैं तथा आघातवर्धनीय तथा तन्य होते हैं, धातु कहलाते हैं। 


2.भूपर्पटी पर सर्वाधिक पाई जाने वाली धातु ऐलुमिनियम है।


3.धातुएँ चमकदार होती हैं तथा इन पर पॉलिश या लेप किया जा सकता है।


 4.धातुओं के गलनांक तथा क्वथनांक उच्च होते हैं (सोडियम तथा पोटैशियम को छोड़कर)।



5.वे तत्त्व जो ऊष्मा तथा विद्युत का चालन नहीं करते हैं, आघातवर्धनीय व तन्य नहीं होते हैं तथा भंगुर होते हैं, अधातु कहलाते हैं।


6. भूपर्पटी पर सर्वाधिक पाई जाने वाली अधातु ऑक्सीजन है। 


7.अधातुएँ चमकदार नहीं होतीं, ये मलिन होती हैं।


8.अधातुओं के गलनांक तथा क्वथनांक अपेक्षाकृत कम होते हैं (डायमण्ड को छोड़कर) । 


9. जब धातुओं को ऑक्सीजन (वायु) में जलाया जाता है तब धातु ऑक्साइड बनते हैं।


10.धातुएँ जल से अभिक्रिया करके धातु हाइड्रॉक्साइड तथा हाइड्रोजन गैस बनाती हैं। 


11. सामान्यतया सभी धातुएँ अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित करती हैं।


12. 1भाग सान्द्र नाइट्रिक अम्ल तथा 3 भाग सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का ताजा तैयार किया गया मिश्रण अम्लराज कहलाता है।


13.ऐसी श्रेणी जिसमें सामान्य धातुओं को उनके घटते हुए सक्रियता क्रम में व्यवस्थित किया जाता है, सक्रियता श्रेणी कहते हैं।


14. धातुएँ प्रकृति में दो अवस्थाओं में पाई जाती हैं


(i) मुक्त अथवा स्वतन्त्र अवस्था में, 


(ii) संयुक्त अवस्था अथवा यौगिकों के रूप में। 



15. प्रकृति में धातु तथा उसके यौगिक जिस रूप में पाए जाते हैं, उन्हें खनिज कहते हैं।


16. सभी खनिज अयस्क नहीं होते, परन्तु सभी अयस्क खनिज होते हैं।


17.धातुओं को उनके अयस्कों से निष्कर्षित करने की विधि धातुकर्म कहलाती है। 



18.धातुओं को अयस्क से प्राप्त करना अयस्क की प्रकृति तथा स्वयं धातुओं के भौतिक और रासायनिक गुणों पर निर्भर करता है।


19. अयस्क से धातुओं के निष्कर्षण के विभिन्न पद हैं-अयस्क का पीसना, सान्द्रण, निस्तापन, जारण (भर्जन), प्रगलन व धातुओं का शोधन


 20. अयस्क से मिट्टी, रेत आदि को दूर करने को सान्द्रण कहते हैं। इसके अन्तर्गत अयस्क को आधात्री से पृथक् किया जाता है।


21.अयस्क में प्राय: मिट्टी, बालू, चूना तथा पत्थर आदि अशुद्धियों के रूप में मिले रहते हैं। इन्हें आघात्री या मैट्रिक्स कहते हैं।


22.अयस्कों के सान्द्रण के लिए सबसे अधिक फेन-प्लवन विधि का उपयोग किया जाता है। सल्फाइड अयस्कों का सान्द्रण प्रायः इसी विधि से करते हैं। 


23.निस्तापन की क्रिया में सान्द्रित अयस्क को वायु की अनुपस्थिति में उच्च ताप पर गर्म करते हैं जिससे अयस्क का अपघटन हो जाता है।


24.भर्जन (जारण) के अन्तर्गत सान्द्रित अयस्क को अकेले या अन्य पदार्थों के साथ मिलाकर वायु की नियन्त्रित मात्रा में गर्म किया जाता है। 


25. अयस्क में उचित गालक तथा कोक मिलाकर मिश्रण को उच्च ताप पर गलाने की क्रिया प्रगलन कहलाती है।


26. प्राप्त धातु का शोधन करने की अनेक विधियाँ हैं, जैसे- आसवन, द्रवण, ऑक्सीजन, विद्युत अपघटन, अमलगमन तथा वाष्प- प्रावस्था शोधन आदि।


27. कॉपर का मुख्य अयस्क कॉपर पाइराइट है। 


28.जब दो या दो से अधिक धातुओं को एक निश्चित अनुपात में मिलाकर पिघलाया जाता है, तो ये धातुएँ परस्पर मिल जाती हैं तथा एक समाग मिश्रण बनाती हैं





बहुविकल्पीय प्रश्र



प्रश्न 1. धातु वे तत्व हैं जिनमें


(a) धनायन बनाने की प्रवृत्ति होती है


(b) ऋणायन बनाने की प्रवृत्ति होती है


(c) हथौड़े से पीटने पर छोटे-छोटे कणों में टूट जाने का गुण होता है 


(d) विद्युत तथा ऊष्मा के कुचालक होने का गुण होता है


उत्तर (a) धातु वे तत्व होते हैं, जो इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाने की प्रवृत्ति रखते हैं।


प्रश्न 2. धातु जो सामान्य ताप पर द्रव है


(a) मर्करी


(b) जल 


(c) ब्रोमीन 


(d) लोहा


उत्तर (a) मर्करी (पारा) धातु सामान्य ताप पर द्रव अवस्था में पायी जाती है।


प्रश्न 3. ऐन्टीमनी है


(a) उपधातु


(b) धातु


(c) अधातु


(d) अक्रिय गैस


उत्तर (a) ऐन्टीमनी एक उपधातु है, जो धातु और अधातु दोनों के गुण प्रदर्शित करती है।


प्रश्न 4. धातुओं के ऑक्साइड होते हैं


(a) अम्लीय


(b) क्षारीय


(c) उभयधर्मी


(d) उदासीन


उत्तर (b) धातुओं के ऑक्साइड सामान्यतः क्षारीय व्यवहार दर्शाते हैं। ये जल से अभिक्रिया करके क्षार का निर्माण करते हैं, जो लाल लिटमस को नीला कर देता है।



प्रश्न 5. निम्न में से कौन-सी धातु अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित करती है? 


(a) Mg 


(b) Cu


 (c) Pt. 


(d) Hg



उत्तर (a) सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन से पहले (ऊपर) स्थित धातुएँ हाइड्रोजन की अपेक्षा अधिक सक्रिय होने के कारण, अम्लों से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देती हैं। दिए गए तत्वों में से केवल Mg ही सक्रियता श्रेणी में H से ऊपर स्थित है अतः यह अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देती है।


प्रश्न 6. निम्न में से कौन-सी धातु अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित करती है?



(a) Zn


(b) Cu


(c) Ag


(d) Hg


अथवा अम्ल से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस विस्थापित करने वाली धातु है



(a) Zn


(b) Cu


(c) PL


(d) Ag




उत्तर (a) Zn धातु अम्लों से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस को विस्थापित करती है, क्योंकि यह सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन से पहले (ऊपर) स्थित है अर्थात् हाइड्रोजन की अपेक्षा अधिक क्रियाशील है, जबकि दी गई अन्य धातुएँ (Cu, Ag, Hg, Pt) इस श्रेणी में हाइड्रोजन के पश्चात् (नीचे) स्थित है अर्थात् हाइड्रोजन की अपेक्षा कम क्रियाशील हैं।


प्रश्न 7. निम्नलिखित में कौन-सी धातु अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित नहीं करती है?



(a) Mg


 (b) Fe


(c) Cu


(d) Zn



उत्तर (c) धातुओं की सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन के पहले स्थित धातुएँ ही अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित करती हैं। कॉपर धातु, इस श्रेणी में हाइड्रोजन के बाद स्थित होने के कारण (अर्थात् हाइड्रोजन से कम क्रियाशील होने के कारण) अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित नहीं करती है।


प्रश्न 8. जस्ता धातु, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से क्रिया करके कौन-सी गैस निष्कासित करती है?


(a) ओजोन 


(b) ऑक्सीजन 


(c) हाइड्रोजन


 (d) नाइट्रोजन 


उत्तर (c) Zn + 2HCI  →ZnCl₂ + H₂जस्ता धातु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस निष्कासित करती है।


प्रश्न 9. निम्नलिखित में से कौन-सी धातु ठण्डे जल के साथ सामान्य ताप पर ही हाइड्रोजन गैस निकालती है?


(a) कॉपर (Cu)


(b) आयरन (Fe)


(c) मैग्नीशियम


(d) सोडियम (Na)



 उत्तर (d) सक्रियता श्रेणी में शीर्ष पर स्थित धातुएँ (जैसे- पोटैशियम, सोडियम आदि) अत्यधिक क्रियाशील होने के कारण ठण्डे जल के साथ क्रिया करके भी हाइड्रोजन मुक्त करती हैं। 


प्रश्न 10. निम्न में से कौन-सी धातु ठण्डे जल के साथ हाइड्रोजन गैस निकालती है? 



(a) तौबा


 (b) सोना 


(C) पोटैशियम 


(d) ऐलुमिनियम



उत्तर (c) 


प्रश्न 11. सिल्वर नाइट्रेट विलयन में ताँबे की छीलन डालने पर विलयन नीला हो जाता है। इसका कारण है 



(a) Ag' आयन के कारण


(b) Ag की उपस्थिति


(C) Cut आवन की उपस्थिति 


 (d) NO, आयन की उपस्थिति




उत्तर (c) सक्रियता श्रेणी में ताँबा (Cu), सिल्वर (Ag) से पहले (ऊपर) स्थित है तथा इस श्रेणी में पहले आने वाली धातु (अधिक क्रियाशील) बाद में आने वाली धातु (कम क्रियाशील) को उसके लक्षण के विलयन से विस्थापित कर देती है, अत: ताँबा सिल्वर नाइट्रेट से सिल्वर को विस्थापित करके कॉपर नाइट्रेट बनाता है। इस प्रकार विलयन में Cu" आयनों की उपस्थिति हो जाती है जिनके नीले रंग के कारण विलयन का रंग भी नीला हो जाता है।


प्रश्न 12. धातु जो सरलता से ऑक्सीकृत हो जाती है वह है


(a) Cu


(b) Ag


(c) AL


(d) Pt


उत्तर (c) जिस धातु की क्रियाशीलता जितनी अधिक होगी, वह उतनी ही सरलता से ऑक्सीकृत होगी। चूँकि दी गई धातुओं में AI धातु सर्वाधिक क्रियाशील है अतः वह सरलता से ऑक्सीकृत होगी।


प्रश्न 13. तत्त्व A, B, C, D के मानक अपचयन विभव क्रमशः + 060, - 0.35,- 150, - 2.71 वोल्ट हैं। सबसे अधिक क्रियाशील तत्त्व होगा


(a) A


(b) B


(c) C


(d) D


उत्तर (c) जिस तत्व के E° का मान जितना कम (अर्थात् अधिक ऋणात्मक) होता है, वह उतना ही अधिक क्रियाशील होता है अत: C(-2.71) सबसे अधिक क्रियाशील तत्व है।


प्रश्न 14. निम्नलिखित में कौन अधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व है?


(a) ।


(b) Na


(c) Br


(d) Mg


उत्तर (c) अधातु तत्व विद्युत ऋणात्मक होते हैं तथा प्रश्न में आयोडीन (ID) एवं ब्रोमीन (Br) दोनों अधातु हैं। लेकिन वर्ग-17 (Halogen समूह) में ब्रोमीन, आयोडीन से ऊपर अव्यवस्थित है तथा वर्ग में ऊपर से नीचे की ओर जाने पर परमाणु का आकार तो बढ़ता है लेकिन विद्युत ऋणात्मकता घटती जाती है।



प्रश्न 15. निम्न में कौन-सा युग्म विस्थापन अभिक्रिया प्रदर्शित करता है।


(a) NaCl विलयन एवं कॉपर धातु


(b) MgCl, विलयन एवं ऐलुमिनियम धातु 


(c) FeSO, विलयन एवं सिल्वर धातु 


(d) AgNO, विलयन एवं कॉपर धातु


उत्तर (d) AgNO, विलयन एवं कॉपर धातु, क्योंकि कॉपर, सिल्वर से अधिक क्रियाशील है।


प्रश्न 16. लोहे के फ्राइंग पैन (frying pan) को जंग से बचाने के लिए निम्न में से कौन-सी विधि उपयुक्त है? 



(a) ग्रीस लगाकर


(b) पेंट लगाकर


 (c) जिंक की परत चढ़ाकर 


(d) इन सभी द्वारा



उत्तर (d) इन सभी के द्वारा। ये सभी संक्षारण को रोकने की विधियाँ हैं।



प्रश्न 17. निम्न में से कौन-सी धातु अम्ल से हाइड्रोजन (H₂) विस्थापित करती है?


(a) Mg


(b) Cu


(c) Pt


(d) Hg


उत्तर (a) श्रेणी में हाइड्रोजन के ऊपर स्थित धातुएँ हाइड्रोजन की अपेक्षा अधिक सक्रिय होने के कारण अम्लों से H, को विस्थापित कर देती हैं। दिए गए तत्वों में से केवल मैग्नीशियम (Mg) ही सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन (H) से ऊपर स्थित है, अत: यह अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देती है।


प्रश्न 18. निम्नलिखित में से कौन-सी धातु अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित नहीं करती है?


(a) Mg


 (b) Fe


(c) Cu


(d)Zn

उत्तर (c) सक्रियता श्रेणी में कॉपर हाइड्रोजन से नीचे स्थित है, अतः यह अम्ल से क्रिया करने पर हाइड्रोजन विस्थापित नहीं करती।


प्रश्न 19. ताँबे का अयस्क है


(a) बॉक्साइट 


(b) मैलेकाइट


(c) कार्नलाइट 


(d) सीडेराइट


उत्तर (b) मैलेकाइट [CuCO₃.Cu(OH)₂) ताँबे (Cu) का अयस्क है।


प्रश्न 20. ताम्र ग्लान्स का रासायनिक सूत्र है



(a) CuS


(b) Cu₂O 


(c) CuFe₂S₂


(d) CuCO₃


उत्तर (a) ताम्र ग्लान्स (Cu₂S) को कैल्कोसाइट भी कहा जाता है, जोकि कॉपर का सल्फाइड अयस्क है।


प्रश्न 21. क्लोराइड अयस्क का उदाहरण है।


(a) बॉक्साइट


(b) मैलेकाइट


(c) सीडेराइट


(d) हॉर्न सिल्वर


उत्तर (d) हॉर्न सिल्वर (AgCl) सिल्वर का अयस्क है। CI की उपस्थिति के कारण इसे क्लोराइड खनिज की श्रेणी में सम्मिलित किया जाता है।


प्रश्न 22. लोहे के फ्राइन्ग पैन (frying pan) को जंग से बचाने के लिए निम्न में से कौन-सी विधि उपयुक्त है ?


(a) ग्रीस लगाकर


(b) पेन्ट लगाकर


(c) जिंक की परत चढ़ाकर 


(d) इन सभी के द्वारा


उत्तर (d) इन सभी के द्वारा। ये सभी संक्षारण को रोकने की विधियाँ हैं।


प्रश्न 23. खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने के लिए डिब्बों में जिंक के स्थान पर टिन का लेपन होता है, क्योंकि



(a) जिंक अपेक्षाकृत कम अभिक्रियाशील है


 (b) टिन अपेक्षाकृत कम अभिक्रियाशील हैं।


(c) जिंक का गलनांक कम होता है।


(d) टिन का गलनांक कम होता है


उत्तर (b) खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने के लिए डिब्बों में टिन का लेपन होता है, क्योंकि यह जिंक से अपेक्षाकृत कम अभिक्रियाशील है।


प्रश्न 24. यदि कॉपर को वायु में खुला रखते हैं, तो इसकी भूरी चमकीली सतह धीरे-धीरे अपनी चमक खो देती है तथा इस पर एक हरे रंग की परत जमा हो जाती है, यह निम्न के बनने के कारण होता है


(a) CuSO₃


(c) Cu(NO₃)₂


(b) CuCO₃


(d) CuO



उत्तर (b) CuCO₃ बेसिक कॉपर कार्बोनेट (हरा) की परत बनती है।



प्रश्न 25. आघातवर्धनीयता प्रदर्शित करता है।



(a) सल्फर


(b) आयोडीन


(c) फॉस्फोरस


(d) ताँबा


उत्तर- (d) ताँबा


प्रश्न-26. निम्नलिखित में से कौन-सी धातु जल के साथ सामान्य ताप पर ही अभिक्रिया कर लेती है अर्थात् हाइड्रोजन गैस निकालती है?


या कौन-सी धातु ठंडे जल के साथ अभिक्रिया कर लेती है? 


(a) कॉपर


(b) आयरन 


(c) मैग्नीशियम


(d) सोडियम/कैल्सियम



उत्तर- (d) सोडियम/ कैल्सियम


प्रश्न 27. निम्नलिखित में से कौन-सी धातु ठण्डे जल में अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस देती है?


 (a) Ag (b) Na (c) Al (d) Cu




उत्तर-(b) Na


प्रश्न 28. निम्न में कौन-सा युगल विस्थापन अभिक्रिया प्रदर्शित करता है?


(a) NaCl विलयन एवं कॉपर धातु


(b) MgCl₃विलयन एवं ऐलुमिनियम धातु 


(c) FeSO₃ विलयन एवं सिल्वर धातु


(d) AgNO₃ विलयन एवं कॉपर धातु 


उत्तर- (d) AgNO₃विलयन एवं कॉपर धातु


प्रश्न 29. कोई धातु ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कर उच्च गलनांक वाला यौगिक निर्मित करती है। यह यौगिक जल में विलेय है।यह तत्त्व क्या हो सकता है?


(a) कैल्सियम (b) कार्बन (c) सिलिकॉन (d) लोहा


उत्तर-(a) कैल्सियम


प्रश्न 30. खाद्य पदार्थ के डिब्बों पर जिंक की बजाय टिन का लेप होता  है क्योंकि



(a) टिन की अपेक्षा जिंक महँगा है


(b) टिन की अपेक्षा जिंक का गलनांक अधिक है


(c) टिन की अपेक्षा जिंक अधिक अभिक्रियाशील है


(d) टिन की अपेक्षा जिंक कम अभिक्रियाशील है 


उत्तर- (c) टिन की अपेक्षा जिंक अधिक अभिक्रियाशील है।


प्रश्न 31. निम्न में से कौन-सी धातु अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित नहीं करती है?



(a) Fe


(b) Zn


(c) Cu


(d) Mg


उत्तर- (c) Cu


प्रश्न 32. निम्नलिखित में से कौन-सी धातु अम्ल में से हाइड्रोजन विस्थापित करती है?


(a) Mg


(c) Cu


(d) Hg


(b) Pt


उत्तर- (a) Mg


प्रश्न 33. जस्ता धातु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से क्रिया करके कौन-सी गैस निष्कासित करती है?



(a) ओजोन


(b) ऑक्सीजन


(c) हाइड्रोजन 


(d) नाइट्रोजन


उत्तर- (c) हाइड्रोजन


प्रश्न 34. तत्त्व A, B, C, D के मानक अपचयन विभव क्रमशः +0.60, 0.35, 1.50, -2.71 वोल्ट हैं। सबसे अधिक क्रियाशील तत्त्व होगा



(a) A


(b) B


(c) C


(d) D


उत्तर- (d) D


प्रश्न 35. फफोलेदार ताँबे में कॉपर की प्रतिशत मात्रा है।


 (a) 98


(c) 70.


(d) 30


उत्तर- (a) 98


प्रश्न 36. फफोलेदार कॉपर है



(a) शुद्ध कॉपर


(b) कॉपर का अयस्क


(c) कॉपर की मिश्र धातु


(d) कॉपर जिसमें 2% अशुद्धियाँ होती हैं 



उत्तर- (d) कॉपर जिसमें 2% अशुद्धियाँ होती हैं


प्रश्न 37. मैट में मुख्यतः होता है


(a) FeS


(b) Cu,S


(c) Cu, S तथा FeS


(d) Cu, S तथा Fen S


उत्तर- (c) Cu, S तथा FeS



प्रश्न 38. कॉपर पायराइट को वायु में गर्म करके सल्फर को दूर करने की क्रिया को कहते हैं


(a) निस्तापन (b) भर्जन (c) प्रगलन (d) बेसेमरीकरण


उत्तर- (b) भर्जन


प्रश्न 39. परावर्तनी भट्ठी का उपयोग होता है



(a) प्रगलन में


(b) निस्तापन में


(c) बेसेमरीकरण में


(d) अतिशीतलन में


उत्तर- (b) निस्तापन में


प्रश्न 40. लोहे के फ्राइंग पैन को जंग से बचाने के लिए निम्न में से कौन-सी विधि उपयुक्त है?



(a) ग्रीस लगाकर


(b) पेंट लगाकर


(c) जिंक की परत चढ़ाकर 


(d) ये सभी


उत्तर- (c) जिंक की परत चढ़ाकर




प्रश्न 41. मुद्रा मिश्रधातु है 


(a) Cu (95%), Sn (4%), P (1%)


(b) Cu (80%), Zn ( 20% )


(c) Cu (88%), Sn ( 12% )


(d) Cu (90%), Zn (2%), Sn (8%)


उत्तर- (a) Cu (95%), Sn (4%), P (1%)


प्रश्न 42. पीतल है


(a) धातु


(b) अधातु


(c) उपधातु


(d) मिश्र धातु


उत्तर


(d) मिश्रधातु


प्रश्न 43. जर्मन सिल्वर में कौन-सी धातु नहीं होती है?



(a) Cu 


(b) Zn


(c) Ag


(d) Ni


उत्तर

(c) Ag



प्रश्न 44. काँसे की प्रतिमाएँ बनी होती हैं



(a) कॉपर-जिंक की


(b) कॉपर-टिन की


(c) कॉपर-निकिल की


(d) कॉपर-आयरन की


उत्तर-


(b) कॉपर-टिन की


प्रश्न 45. अमलगम होते हैं।



(a) उपधातु 


(b) मिश्र धातु 


(c) यौगिक 


(d) विषमांगी मिश्रण


उत्तर-


(d) विषमांगी मिश्रण


प्रश्न 46. निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा युग्म प्रतिस्थापनीय  अभिक्रिया देता है?


(a) सोडियम क्लोराइड विलयन एवं कॉपर धातु


(b) मैग्नीशियम क्लोराइड विलयन एवं ऐलुमिनियम धातु


(c) फेरस सल्फेट विलयन एवं सिल्वर धातु


(d) सिल्वर नाइट्रेट विलयन एवं कॉपर धातु



उत्तर


(b) मैग्नीशियम क्लोराइड विलयन एवं ऐलुमिनियम धातु



प्रश्न 47. लेड नाइट्रेट का रासायनिक सूत्र है।



(a) PbNO₃


(b) Pb (NO3)₂


(c) Pb (NO₂)₂


(d) PbO


उत्तर - (a) PbNO₃





धातुओं तथा अधातुओं में अन्तर लिखिए उदाहरण सहित


धातु और अधातु किसे कहते हैं उदाहरण सहित





धातु


वे तत्व जो ऊष्मा तथा विद्युत का चालन करते हैं, धातु कहलाते हैं अथवा धातु वे तत्व होते हैं, जो इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाने की प्रवृत्ति रखते हैं अर्थात् धातुएँ विद्युत धनात्मक होती हैं। धातुएँ आघातवर्धनीय (Malleable) तथा तन्य (Ductile) होती हैं। सामान्यतः ये कमरे के ताप पर ठोस होती हैं, परन्तु मर्करी कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में होती है।


उदाहरण –  ऐलुमिनियम (AI), कॉपर (Cu) (मुद्रा धातु), उत्कृष्ट धातुएँ (Ag, Au, Pt), क्षारीय धातुएँ (Li, Na, K), क्षारीय मृदा धातुएँ (Be, Mg, Ca) इत्यादि।




अधातु


वे तत्व जो ऊष्मा तथा विद्युत का चालन नहीं करते हैं, अधातु कहलाते हैं अथवा अधातु वे तत्व होते हैं, जो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाने की प्रवृत्ति रखते हैं अर्थात् अधातुएँ विद्युत ऋणात्मक होती हैं। ये आघातवर्धनीय व तन्य नहीं होते हैं, परन्तु भंगुर (Brittle) होते हैं। 


उदाहरण कार्बन (C), नाइट्रोजन (N), सल्फर (S) इत्यादि।


नोट अत्यधिक छोटे आकार के कारण हाइड्रोजन में धनायन बनाने की प्रवृत्ति के साथ-साथ, इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके स्थायी ऋणायन बनाने की प्रवृत्ति भी होती है। साथ ही यह धातुओं के अन्य सामान्य लक्षण; जैसे-आघातवर्धनीयता, धात्विक चमक आदि भी नहीं दर्शाती हैं, अतः यह एक अधातु है।



उपधातु


वे तत्व जिनमें धातु तथा अधातु दोनों के गुण पाए जाते हैं, उपधातु कहलाते हैं। 


उदाहरण आर्सेनिक (As), ऐन्टीमनी (Sb) इत्यादि।




धातुओं तथा अधातुओं के भौतिक गुणों में अन्तर



धातु

अधातु

i.साधारण ताप पर पारे (मर्करी) के अतिरिक्त सभी धातुएँ ठोस होती हैं।

साधारण ताप पर ब्रोमीन (द्रव) के अतिरिक्त सभी अधातुएँ ठोस या गैस अवस्था में पायी जाती हैं।


ii.धातुओं में एक विशेष प्रकार की धात्विक चमक होती है।

आयोडीन व ग्रेफाइट के अतिरिक्त किसी भी अधातु में चमक नहीं होती है।

iii.सोडियम तथा पोटैशियम के अतिरिक्त सभी इनका घनत्व प्रायः कम होता है। धातुओं का घनत्व पानी से अधिक होता है।

इनका घनत्व प्राय: कम होता है।

iv.इनके गलनांक तथा क्वथनांक प्रायः अधिक होते है।

इनके गलनांक तथा क्वथनांक प्रायः कम होते हैं।

v.ये ऊष्मा तथा विद्युत की सुचालक होती हैं।

ग्रेफाइट को छोड़कर सभी अधातुएँ ऊष्मा तथा विद्युत की कुचालक होती है।




धातुओं तथा अधातुओं के रासायनिक गुणधर्म



धातु

अधातु

i.धातुएँ इलेक्ट्रॉनों को त्यागकर धन विद्युती लक्षण दर्शाती हैं।

अधातुएँ इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करके ऋण विद्युती लक्षण दर्शाती हैं।

ii.धातुएँ अम्ल के साथ लवण बनाती हैं।

अधातुएँ अम्लों के साथ लवण का निर्माण नहीं करती हैं।

iii.कुछ धातुएँ अम्ल से क्रिया कर हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती हैं। Zn (ठोस) + H2SO4 (द्रव) → ZnSO, (द्रव) + H2 ↑

अधातुएँ अम्लों से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न नहीं करती हैं।


C +2H2SO4 →2SO2 +2H2O + CO2

iv.धातुओं के ऑक्साइड सामान्यतः क्षारीय होते हैं। ये जल से अभिक्रिया करके क्षार का निर्माण करते हैं जो लाल लिटमस को नीला कर देता है; परन्तु हैं। ऐलुमिनियम, जिंक तथा टिन धातुओं के ऑक्साइड उभयधर्मी होते हैं। Na2O + 2HCI  →2NaCl + H20

अधातुओं के ऑक्साइड अम्लीय प्रकृति के होते हैं, परन्तु नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) तथा कार्बन मोनॉक्साइड उदासीन होते


Cl₂O₇ + 2NaOH क्लोरीन हेप्टाऑक्साइड 2NaCIO₄ + H20 (अम्लीय)




प्रश्न . धातु तथा अधातु के किन्हीं चार सामान्य गुणों का उल्लेख कीजिए।




उत्तर 


धातुओं के सामान्य गुण



(i) शुद्ध रूप में धातु की सतह चमकदार होती है, धातु के इस गुणधर्म को धात्विक चमक कहते हैं।


(ii) धातुएँ सामान्यत: कठोर होती हैं सोडियम तथा पोटैशियम मृदु धातुएँ हैं।


(iii) धातुएँ आघातवर्धनीय होती हैं अर्थात् धातुओं को हथौड़े से पीटकर, बिना तोड़े, पतली चादरों में परिवर्तित किया जाता है।


(iv) धातुओं में तन्यता का गुण पाया जाता है अर्थात् इनसे महीन तार बनाए जाते हैं। सोना, चाँदी अधिक तन्य धातुएँ हैं लेकिन सोना सर्वाधिक तन्य धातु है। एक ग्राम सोने से 2 किमी लम्बा तार खींचा जा सकता है।




अधातुओं के सामान्य गुण


(i) अधिकांश अधातुएँ साधारण ताप पर गैस अवस्था में होती हैं। ब्रोमीन ऐसी अधातु है जो साधारण ताप पर द्रव अवस्था में होती है।


(ii) अधातुएँ भंगुर होती हैं, इनमें तन्यता व आघातवर्धनीय गुण नहीं पाया जाता है।


उदाहरण सल्फर और फॉस्फोरस को हथौड़े से पीटने पर ये टूट जाते हैं।


 (iii) अधातुओं में चमक नहीं पायी जाती है। 


(iv) ग्रेफाइट को छोड़कर सभी अधातुएँ विद्युत व ऊष्मा की कुचालक होती हैं।









मिश्रधातु


दो या दो से अधिक धातुओं को गलित अवस्था में मिश्रित करने पर निर्मित समांगी मिश्रण को मिश्रधातु कहते हैं। मिश्रधातुएँ गलित धातुओं को उचित मात्रा में मिलाकर ठण्डा करने पर प्राप्त होती हैं। कॉपर की दो मुख्य मिश्रधातुएँ हैं। पीतल Cu = 70% Zn = 30% तार, मशीन के पुर्जे तथा बर्तन बनाने में काँसा Cu = 80% Sn = 12% बर्तन तथा मूर्तियाँ बनाने में।


धातुओं का परिष्करण (शोधन)


परिष्करण के लिए सबसे सामान्य विधि विद्युत अपघटनी परिष्करण है। कॉपर, टिन, निकैल, सिल्वर, गोल्ड, आदि अनेक धातुओं का परिष्करण विद्युत अपघटन द्वारा किया जाता है।


प्रक्रिया इस प्रक्रम में, अशुद्ध धातु का ऐनोड तथा शुद्ध धातु की पतली परत का कैथोड के रूप में प्रयोग किया जाता है। धातु के लवण विलयन का उपयोग विद्युत अपघट्य के रूप में होता है। जब विद्युत अपघट्य से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो विद्युत अपघट्य से धातु आयन अपचयित होकर कैथोड पर निक्षेपित हो जाती है। अशुद्धि ऐनोड के नीचे एकत्रित हो जाती है तथा ऐनोड पंक कहलाती है।


उदाहरण कच्चे कॉपर के विद्युत अपघटनी परिष्करण में विद्युत अपघट्य अम्लीकृत कॉपर सल्फेट इलेक्ट्रोड कैथोड (ऋणात्मक आवेशित): कॉपर (शुद्ध) ऐनोड (धनात्मक आवेश) कॉपर (अशुद्ध) कॉपर सल्फेट का वियोजन (aq)



संक्षारण धातुओं का, उनकी सतह का वायु, आर्द्रता (नमी) अथवा रसायन (जैसे अम्ल) के प्रभाव द्वारा नष्ट होना (खा जाना), संक्षारण कहलाता है। नम वायु (या आर्द्र वायु) में खुला छोड़ देने पर अधिकांश धातुएँ संक्षारित हो जाती हैं। संक्षारण एक मन्द प्रक्रिया है। उदाहरण लोहे में जंग लगना, चाँदी का मलिन हो जाना, कॉपर की सतह पर हरे रंग की परत का जमना आदि।


संक्षारण से सुरक्षा


(i) गैल्वनीकरण आयरन की वस्तुओं के ऊपर जिंक धातु की पतली परत चढ़ाने का प्रक्रम गैल्वनीकरण कहलाता है। जिंक धातु की यह पतली परत, लोहे को जंग लगने से बचाती है, क्योंकि आर्द्र वायु में खुला छोड़ने पर जिंक धातु संक्षारित नहीं होती है।


(ii) टिन प्लेटिंग तथा क्रोम प्लेंटिग टिन तथा क्रोमियम धातु संक्षारण रोधी होते हैं।

अतः जब लोहे की वस्तु पर टिन धातु की पतली परत को इलेक्ट्रोप्लेटिंग द्वारा निक्षेपित कर देते हैं, तो आयरन तथा इस्पात वस्तुएँ संक्षारण से सुरक्षित हो जाती हैं।


नोट जब धातु की सतह पर अन्य धातु की पतली परत को विद्युत धारा की सहायता से चढ़ाया जाता है, तो इसे इलेक्ट्रोप्लेटिंग कहते हैं।


(iii) धातुओं को मिश्रधातु में परिवर्तित करके यह धातु के गुणों में सुधार की विधि है। जिसमें दो या दो से अधिक धातुओं को मिलाते हैं।


(iv) रंगाई करके धातु की सतह को किसी अम्ल अवरोधक रंग से रंगाई करने पर धातु, वायु या किसी विलयन के प्रभाव से बच जाती है।


(v) ग्रीस या तेल लगाकर जब ग्रीस या तेल को लोहे की वस्तु की सतह पर लगा देते हैं, तो नमी इसके सम्पर्क में नहीं आ पाती है, जिससे लोह जंग से सुरक्षित हो जाता है। उदाहरण लोहे के पुर्जें तथा मशीनों को ग्रीस से पोत देते हैं।




अम्लराज या ऐक्वा-रेजिया


सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCI) तथा सान्द्र नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) का वह मिश्रण, जिसमें आयतन के अनुसार 3 भाग सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCI) तथा 1 भाग सान्द्र नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) होता है, अम्लराज कहलाता है। यह सधूम्र होता है तथा इसकी प्रकृति संक्षारक होती है। यह उत्कृष्ट अक्रिय धातुओं जैसे-सोना (Au) तथा प्लेटिनम (Pt) को गलाने की क्षमता रखता है।


अयस्क


वे खनिज, जिनसे धातु का निष्कर्षण सुगमता तथा मितव्ययता (अर्थात् कम खर्च) के साथ किया जाता है, अयस्क कहलाते हैं। उदाहरण-हॉर्न सिल्वर (AgCl), कार्नेलाइट (KCI. MgCl₂.6H₂O), आदि। .


अतः स्पष्ट है कि सभी अयस्क खनिज होते हैं परन्तु सभी खनिज अयस्क नहीं होते।


किसी धातु के एक से अधिक अयस्क हो सकते हैं। यह धातु को प्राप्त करने के स्थान, प्राकृतिक वातावरण, किसी विशेष खनिज की पृथ्वी में उपलब्ध मात्रा एवं उस स्थान (देश) में उपलब्ध साधन, आदि पर निर्भर करता है। अयस्कों को उनके यौगिक की प्रकृति के आधार पर निम्न भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है


(i) ऑक्साइड अयस्क बॉक्साइट (Al₂0₃.2H₂O), कोरण्डम (Al₂O₃). क्यूप्राइट (Cu₂O), हेमेटाइट (Fe₃O₄), मैग्नेटाइट (Fe₃O₄), जिंकाइट (ZnO), आदि।


(ii) कार्बोनेट अयस्क कैलेमाइन (ZnCO₃), सीरूसाइट (PbCO₃), लाइमस्टोन (CaCO₃), सीडेराइट (FeCO₃), आदि।


(iii) सल्फाइड अयस्क कॉपर पायराइट (CuFeS₂), अर्जेन्टाइट (Ag₂S), जिंक ब्लैण्ड (ZnS), सिनेबार (HgS), आयरन पायराइट (FeS₂), आदि।


(iv) क्लोराइड अयस्क हॉर्न सिल्वर (AgCl),


कार्नेलाइट (KCI. MgCl₂ 6H₂O), आदि।



खनिज तथा अयस्क में अन्तर


खनिज तथा अयस्क अथवा अयस्क व खनिज में अन्तर को स्पष्ट कीजिए




(i) खनिज वे तत्व अथवा यौगिक; जिनके रूप में धातुएँ भूपर्पटी में उपस्थित होती हैं, खनिज कहलाते हैं।


(ii) अयस्क वे खनिज, जिनसे धातु का निष्कर्षण लाभप्रद ढंग से किया जा सके, अयस्क कहलाते हैं। 


उदाहरण— बॉक्साइट ऐलुमिनियम का अयस्क है। 


(ii) गैंग अयस्क में उपस्थित रेत, मिट्टी अथवा अन्य अशुद्धियों को गैंग कहते हैं।




प्रश्न – खनिज तथा अयस्क अथवा अयस्क व खनिज में अन्तर को स्पष्ट कीजिए। 


अथवा उदाहरण देते हुए खनिज तथा अयस्क को स्पष्ट कीजिए।




उत्तर खनिज तथा अयस्क में अन्तर निम्नलिखित हैं






खनिज

अयस्क


प्रकृति में भू-पर्पटी के नीचे धातुएँ जिन यौगिकों के रूप में पायी जाती हैं, उन्हें खनिज कहते हैं।

जिस खनिज में धातु अधिक मात्रा में उपस्थित हो तथा उससे धातु को आसानी से एवं कम खर्च में प्राप्त किया जा सके, अयस्क कहलाते हैं।


सभी खनिज अयस्क नहीं होते हैं।

सभी अयस्क खनिज होते हैं।

सभी खनिजों को धातु निष्कर्षण के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा सकता है।

सभी अयस्कों को धातु निष्कर्षण के लिए प्रयुक्त किया जाता है।


उदाहरण कॉपर पाइराइट (CuFeS₂)

उदाहरण हॉर्न सिल्वर (AgCI)





प्रश्न . लोहे को जंग से बचाने के लिए दो उपाय बताइए। 


उत्तर लोहे को जंग से बचाने की दो विधियाँ निम्न हैं


(i) पेंट करना लोहे पर बनी पेंट की पर्त उसको वायु के संपर्क में आने से रोकती है।


(ii) गैल्वनीकरण/यशद्लेपन लोहे की वस्तुओं को पिघले जिंक में डुबाने पर उस पर जिंक की पर्त बन जाती है। यह पर्त लोहे की जंग से सुरक्षा करती है। जिंक अधिक अभिक्रियाशील होने के कारण लोहे की अपेक्षा पहले संक्षारित होगा। 




प्रश्न . इलेक्ट्रोड विभव क्या है? इसे कैसे मापा जाता है ? एक उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।


उत्तर 


इलेक्ट्रोड विभवकिसी धातु की छड़ को उसके लवण के विलयन में डुबोने पर धातु की छड़ आवेशित (धनावेशित अथवा ऋणावेशित) हो जाती है, जिसके फलस्वरूप धातु की छड़ तथा इसके विलयन के मध्य एक विभवान्तर उत्पन्न हो जाता है, जिसे इलेक्ट्रोड विभव कहते हैं।


उदाहरण कॉपर (Cu) की छड़ को कॉपर सल्फेट (CuSO₄) के विलयन में डुबाने पर विलयन में उपस्थित कॉपर आयन (Cu+), कॉपर धातु (छड़) से इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके कॉपर परमाणु (Cu) बनाते हैं, जो कॉपर छड़ पर एकत्रित हो जाते हैं।


इस प्रकार कॉपर की छड़ पर धनावेश (Cu+ के कारण) तथा विलयन पर ऋणावेश (SO₂⁻ के कारण) उत्पन्न हो जाता है। इसके फलस्वरूप इनके मध्य विभव उत्पन्न हो जाता है, जिसे इलेक्ट्रोड विभव कहते हैं।


Cu → Cu²+ + 2e¯ 


(कॉपर धातु की छड़)


CuSO₄    ⇔ Cu²+ + SO₄²⁻ + 2e⁻ 


(कॉपर सल्फेट का विलयन ) (छड़पर एकत्रित)


 ( विलयन में एकत्रित)



 इलेक्ट्रोड विभव का मापन


एक स्वतन्त्र इलेक्ट्रोड के विभव का प्रत्यक्ष मापन करना सम्भव नहीं है, परन्तु दो इलेक्ट्रोडों के मध्य का विभवान्तर सही ढंग से मापा जा सकता है। इसे इलेक्ट्रोड विभव के मापन की अप्रत्यक्ष विधि कहते हैं। इस विधि में धातु इलेक्ट्रोड, जिसका विभव ज्ञात करना है, को ज्ञात विभव वाले इलेक्ट्रोड के साथ जोड़ दिया जाता है। इस ज्ञात विभव वाले इलेक्ट्रोड को सन्दर्भ इलेक्ट्रोड (मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड) कहते हैं। धातु इलेक्ट्रोड तथा सन्दर्भ इलेक्ट्रोड को जोड़कर एक सेल बनाते हैं तथा परिणामी सेल का विभव प्रयोगों द्वारा ज्ञात कर लेते हैं। सन्दर्भ इलेक्ट्रोड का विभव हमें पहले से ही ज्ञात होता है अतः इन दोनों विभव मानों की सहायता से धातु के इलेक्ट्रोड विभव की गणना कर ली जाती है। 


उदाहरण मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का विभव शून्य होता है। इससे जिंक धातु का मानक इलेक्ट्रोड जोड़ने पर प्राप्त सेल में विद्युत धारा हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड से जिंक इलेक्ट्रोड की ओर प्रवाहित होती है। वोल्टमीटर से मापने पर इनके विभवों का अन्तर 0.76 वोल्ट प्राप्त होता है। विद्युत सदैव अधिक विभव वाली वस्तु से कम विभव वाली वस्तु की ओर प्रवाहित होती है। अत: जिंक का मानक इलेक्ट्रोड विभव, हाइड्रोजन के मानक इलेक्ट्रोड विभव (0.00 वोल्ट) से 0.76 वोल्ट कम होता है।


अर्थात् जिंक इलेक्ट्रोड का विभव = मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का विभव- सेल का विभवान्तर


= 0.00 – 0.76 =-0.76 वोल्ट


विद्युत रासायनिक श्रेणी किसे कहते हैं परिभाषा उदाहरण सहित


सक्रियता श्रेणी किसे कहते हैं परिभाषा उदाहरण सहित




धातुओं की सक्रियता श्रेणी


धातुओं को उनकी क्रियाशीलता के घटते हुए क्रम में व्यवस्थित करने पर प्राप्त श्रेणी को विद्युत रासायनिक श्रेणी अथवा सक्रियता श्रेणी कहते हैं। दूसरे शब्दों में, धातुओं को उनके मानक अपचयन विभव के बढ़ते हुए क्रम में रखने पर प्राप्त श्रेणी को विद्युत रासायनिक श्रेणी अथवा सक्रियता श्रेणी कहते हैं। यह श्रेणी निम्न है


K (सर्वाधिक क्रियाशील) > Ba> Sr> Ca > Na > Mg > Al> Zn > Fe > Cd > Ni > Sn > H > Cu> Hg > Ag > Pt > Au (सबसे कम क्रियाशील)




विधुत रसायनिक श्रेणी के गुण


(i) इस श्रेणी में पहले (ऊपर) आने वाली धातुएँ आसानी से ऑक्सीकृत होती हैं। [दूसरे शब्दों में, जिस धातु की क्रियाशीलता जितनी अधिक होगी, वह उतनी ही सरलता से ऑक्सीकृत होगी।]


(ii) इस श्रेणी में पहले (ऊपर) वाली धातुएँ अर्थात् अधिक क्रियाशील धातुएँ बाद वाली धातुओं (अर्थात् कम क्रियाशील) को उनके लवण के विलयन से विस्थापित कर देती हैं।


(iii) हाइड्रोजन से पहले (ऊपर) वाली धातुएँ अम्लों से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस विस्थापित करती हैं। श्रेणी में धातु का स्थान जितना ऊपर होता है, उसकी अम्लों से क्रिया करके हाइड्रोजन विस्थापित करने की क्षमता उतनी ही अधिक होती है।


(iv) इस श्रेणी में शीर्ष पर स्थित धातुएँ; जैसे- Li, Na, K आदि अधिक क्रियाशील होने के कारण ठण्डे जल के साथ क्रिया करके भी हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं।



मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड किसे कहते हैं सचित्र वर्णन



मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड


वह हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड, जिसमें हाइड्रोजन गैस का दाब 1 वायुमण्डल रखा जाए तथा विलयन में हाइड्रोजन आयनों (H+) की सान्द्रता 1 M हो, मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड कहलाता है।


इस इलेक्ट्रोड का विद्युत वाहक बल प्रत्येक ताप पर 0.00 वोल्ट माना गया है।






मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का सचित्र वर्णन कीजिए तथा इसकी एक उपयोगिता लिखिए।



 अर्द्ध-सेलों का सचित्र वर्णन कीजिए तथा इसकी उपयोगिता लिखिए।





उत्तर – मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (अर्द्ध-सेल) 1 मोलर सान्द्रता के HCI विलयन को एक पात्र में लेते हैं, अब प्लेटिनम (Pt) के तार के एक सिरे पर Pr धातु की छोटी प्लेट को उपयोग में लेकर तार को काँच की नली में सील करके पात्र में लिए गए HCI के 1 मोलर विलयन में डुबाते हैं। काँच की नली में 1- वायुमण्डलीय दाब पर आवश्यकता अनुसार, H₂-गैस उत्सर्जित एवं प्रवाहित की जा सकती है।







उपयोगिता जिस एकल अर्द्ध-सेल का विभव मापन करना होता है, उसे मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (अर्द्ध-सेल) के साथ सुचालक तार द्वारा बाह्य परिपथ में जोड़ देते हैं। अब इससे अपचयित अथवा ऑक्सीकृत होने वाले इलेक्ट्रोड के मानक विभव का मापन किया जा सकता है।




 रेडॉक्स विभव क्या है? विद्युत रासायनिक श्रेणी की दो उपयोगिता लिखिए।





उत्तर – रेडॉक्स विभव किसी सेल में ऑक्सीकरण तथा अपचयन अभिक्रियाएँ होने पर, धातु तथा विलयन में उपस्थित आयनों के मध्य स्थापित होने वाले साम्य में विभवान्तर को रेडॉक्स विभव कहते हैं। 



किसी पदार्थ की रेडॉक्स अभिक्रिया,



Mⁿ+  +  ne- → M अपचयित रूप


ऑक्सीकृत रूप



के लिए ताप T, रेडॉक्स इलेक्ट्रोड के विभव E, पदार्थ के ऑक्सीकृत रूप की सान्द्रता [Oxi] तथा अपचयित रूप की सान्द्रता [Red] में निम्न सम्बन्ध होता है 



E = E° - (2.303RT)/ nF - log10 [Red]/ [Oxi]



यहाँ, E° मानक इलेक्ट्रोड विभव है। 



प्रश्न . लोहे को जंग से बचाने के लिए दो उपाय बताइए। उत्तर लोहे को जंग से बचाने की दो विधियाँ निम्न हैं


(i) पेंट करना लोहे पर बनी पेंट की पर्त उसको वायु के संपर्क में आने से रोकती है।


(ii) गैल्वनीकरण/यशद्लेपन लोहे की वस्तुओं को पिघले जिंक में डुबाने पर उस पर जिंक की पर्त बन जाती है। यह पर्त लोहे की जंग से सुरक्षा करती है। जिंक अधिक अभिक्रियाशील होने के कारण लोहे की अपेक्षा पहले संक्षारित होगा। 


प्रश्न . लोहे (Fe) पर निम्न में से किस धातु की परत चढ़ाई जा सकती है और क्यों ? Mg, Cu, Ag




उत्तर विद्युत रासायनिक श्रेणी में ऊपर से नीचे जाने पर क्रियाशीलता घटती जाती है। अतः लोहे पर इससे कम क्रियाशील धातु की परत आसानी से चढ़ायी जा सकती है। चूँकि Cu तथा Ag, लोहे से कम क्रियाशील हैं, अत: लोहे को Cu 2+ या Ag+ धनायनों के विलयन में डालने पर इस पर Cu या Ag की परत चढ़ जाती है। यदि Fe को अधिक क्रियाशील धातु (जैसे-Mg) के विलयन में डाला जाता है, तो इस पर कोई परत नहीं चढ़ती है।





लघु उत्तरीय प्रश्न             4 अंक


प्रश्न . विद्युत रासायनिक श्रेणी की सहायता से धातुओं द्वारा अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित करने की क्षमता किस प्रकार ज्ञात करते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। 


उत्तर विद्युत रासायनिक श्रेणी सक्रियता में जो धातुएँ हाइड्रोजन से ऊपर स्थित होती हैं, वे अम्लों से हाइड्रोजन गैस विस्थापित करती हैं तथा श्रेणी में धातु का स्थान जितना ऊपर होता है, उसकी अम्लों से क्रिया करके हाइड्रोजन विस्थापित करने की क्षमता भी उतनी ही अधिक होती है। अतः विद्युत रासायनिक श्रेणी धातुओं व अधातुओं की क्रियाशीलता का निर्धारण करती हैं।


उदाहरण– विद्युत रासायनिक श्रेणी में सोडियम व पोटैशियम हाइड्रोजन से ऊपर स्थित हैं। अतः ये दोनों ही अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित कर देती हैं परन्तु कॉपर (Cu) या सोना (Au), आदि धातुएँ हाइड्रोजन से नीचे स्थित होने के कारण ऐसा नहीं कर पाती हैं।




प्रश्न 11. (i) अयस्कों का सान्द्रण क्यों आवश्यक है? समझाइए। (ii) सल्फाइड अयस्कों के सान्द्रण में प्रयुक्त विधि का नाम बताइए।



उत्तर 

(i) अयस्क में प्राय: मिट्टी, बालू, चूना, पत्थर आदि अशुद्धियों के रूप में मिले रहते हैं। ये अशुद्धियाँ आधात्री या मैट्रिक्स कहलाती हैं। अयस्क से आधात्री को पृथक् करने का प्रक्रम सान्द्रण कहलाता है। अयस्क का सान्द्रण करने पर अयस्क में धातु की प्रतिशतता बढ़ जाती है, अतः धातु का निष्कर्षण सुविधाजनक रूप से किया जा सकता है। 


(ii) सल्फाइड अयस्कों का सान्द्रण झाग प्लवन विधि द्वारा किया जाता है। 





यूपी बोर्ड कक्षा 10वी विज्ञान अध्याय 4 कार्बन तथा उसके यौगिक


up ncert class 10 science chapter 04 carban tatha uske yaugik full solutions notes








अध्याय 4 कार्बन तथा उसके यौगिक



बहुविकल्पीय प्रश्न       1 अंक





प्रश्न 1. बकमिन्स्टर फुलेरीन एक अपररूप है।


(a) फॉस्फोरस का


(c) कार्बन का


(b) सल्फर का


(d) टिन का


उत्तर (c) बकमिन्स्टर फुलेरीन कार्बन का एक अपररूप है।



प्रश्न 2. प्रोपेन का रासायनिक सूत्र है


 (a) CH₄


 (b) C₃H₈


(c) C₄H₈


(d)C₂H₆


उत्तर (b) C₃H₈


प्रश्न 3. ऐल्काइन का सूत्र है


(a) C₃H₄


(b) C₃H₆


 (c) C₄H₁₀


(d) C₂H₆


उत्तर (a) C₃H₄


प्रश्न 4. एथेन का आण्विक सूत्र C₂H₆है, इसमें



(a) 6 सहसंयोजक आबन्ध हैं


(b) 7 सहसंयोजक आबन्ध हैं


(c) 8 सहसंयोजक आबन्ध हैं 


(d) 9 सहसंयोजक आबन्ध हैं



उत्तर (b) 7 सहसंयोजक आबंध हैं।



प्रश्न 5. C₂H₆का आई.यू.पी.ए.सी. नाम है।


(a) मेथेन


(b) एथेन


(c) एथाइन


(d) एथिलीन


उत्तर (b) एथेन


प्रश्न 6. एथिल ऐल्कोहॉल का आई.यू.पी.ए.सी. नाम है


(a) एथेनॉल


(b) मेथेनॉल


(d) एथेनोइक अम्ल


(c) ऐसीटिक अम्ल



उत्तर

(a) एथेनॉल



प्रश्न 7. ऐल्कोहॉलों के विहाइड्रोजनीकरण द्वारा प्राप्त होता है


(a) अम्ल


 (b) एस्टर


 (c) ऐल्डिहाइड 


(d) ऐमीन



उत्तर (c) उत्प्रेरक की उपस्थिति में ऐल्कोहॉल के विहाइड्रोजनीकरण से कार्बोनिल यौगिक का निर्माण होता है।



प्रश्न 8. ब्यूटेनॉन चर्तु-कार्बन यौगिक है, जिसका प्रकार्यात्मक समूह है।


 (a) कार्बोक्सिलिक अम्ल 


(b) ऐल्डिहाइड


(C) कीटोन


(d) ऐल्कोहॉल


उत्तर (c) कीटोन 



प्रश्न 9. दिए गए कार्बनिक यौगिकों में कीटोनिक प्रकार्यात्मक समूह वाला है




(a)CHCOOH


(b)CH₃COCH₃ 


(c) HCOOH 


(d) CH₃CH₂OH


उत्तर (b) CH₃COCH₃ 





प्रश्न 10. ऐसीटोन का IUPAC नाम है।




(a) ब्यूटेनोन


(b) प्रापेनोन


(C) ब्यूटेनॉल


(d) प्रोपेनॉल


उत्तर (b) इसका IUPAC नाम प्रोपेनोन है।


प्रश्न 11. निम्नलिखित में से एल्डिहाइड है


(a) एथेनॉल 


(b) एथेनल


(c) एथीन


(d) एथाइन


उत्तर 

एथेनल



प्रश्न 13. ऐसीटिक अम्ल (CH₃COOH) का आई. यू.पी.ए.सी. नाम है


(a) एथेनॉल (c) मेथेनोइक अम्ल


(b) एथेनोइक अम्ल (d) प्रोपेनोइक अम्ल



उत्तर (b) एथेनोइक





अतिलघु उत्तरीय प्रश्न      2 अंक


प्रश्न 1. प्रयोगशाला में सर्वप्रथम किस कार्बनिक यौगिक का निर्माण हुआ था?उसका नाम एवं सूत्र लिखिए। सम्बन्धित अभिक्रिया भी दीजिए। 




उत्तर यूरिया (NH₂CONH₂) सर्वप्रथम निर्मित कार्बनिक यौगिक था, जो फ्रेडरिक व्होलर ने प्रयोगशाला में अमोनियम सायनेट को गर्म करके बनाया था।


ऊष्मा NH₄CNO → NH₂CONH₂यूरिया


अमोनियम सायनेट



प्रश्न . जैव शक्ति सिद्धान्त पर टिप्पणी लिखिए।




उत्तर फ्रांसीसी वैज्ञानिक बर्जीलियस के समय तक वैज्ञानिक जैव जगत से प्राप्त यौगिकों में से किसी भी यौगिक को प्रयोगशाला में संश्लेषित करने में असमर्थ थे। इस कारण यह धारणा बन गई कि जैव जगत से प्राप्त होने वाले यौगिकों का निर्माण प्रयोगशाला में नहीं किया जा सकता है। बर्जीलियस ने इस धारणा पर आधारित जैव शक्ति सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। इस सिद्धान्त के अनुसार, जैव जगत से प्राप्त होने वाले यौगिकों के निर्माण में जैव शक्ति की उपस्थिति आवश्यक है। इस सिद्धान्त का मुख्य आधार यह था कि कार्बनिक यौगिकों का निर्माण केवल जीव-जन्तुओं और पेड़-पौधों द्वारा प्रकृति में ही सम्भव था



प्रश्न 3. निम्न का सामान्य गुण तथा संरचना बताइए।


 (i) हीरा (ii) ग्रेफाइट


उत्तर (i) हीरा यह रंगहीन, पारदर्शी, अत्यधिक कठोर तथा उच्च अपवर्तन गुणांक (Refractive index) के कारण अत्यंत चमकीला है। हीरा प्रकृति में उपलब्ध पदार्थों में सबसे कठोर है। यह मुक्त इलेक्ट्रॉनों की अनुपस्थिति के कारण विद्युत का कुचालक है, परन्तु इसका गलनांक तथा ऊष्मीय चालकता अत्यधिक होती है।

संरचना हीरे की संरचना में प्रत्येक कार्बन परमाणु एक नियमित चतुष्फलक (Regular tetrahedron) के कोनों पर स्थित चार अन्य कार्बन परमाणुओं से सहसंयोजी आबन्ध द्वारा जुड़ा होता है। वास्तव में, हीरे की संरचना में कार्बन परमाणुओं की अति विशाल संख्या, प्रबल सहसंयोजक आबन्धों के द्वारा दृढ़ त्रि-आयामी संरचना के रूप में रहती है। अर्थात् हीरे की संरचना में प्रत्येक कार्बन परमाणु के सभी 4 संयोजक इलेक्ट्रॉन आबन्ध बनाने में प्रयुक्त हो जाते हैं, जिससे हमें हीरे की दृढ़ चतुष्फलकीय संरचना (Tetrahedral) प्राप्त होती है। अनेक चतुष्फलकीय संरचनाएँ मिलकर हीरे की दृढ़-त्रिविम व्यवस्था देते हैं, जिससे इसका गलनांक अत्यंत उच्च पाया जाता है। 


(ii) ग्रेफाइट यह काले-भूरे रंग का अपारदर्शी पदार्थ है। यह हीरे से हल्का, मुलायम एवं स्पर्श करने पर चिकना होने की अनुभूति देता है। मुक्त इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण यह विद्युत का अच्छा सुचालक है। परन्तु ऊष्मा का कुचालक है।


संरचना ग्रेफाइट में कार्बन के परमाणु षट्कोणीय वलयों (Hexagonal rings) के रूप में पाए जाते हैं। ग्रेफाइट की परतों में, प्रत्येक कार्बन परमाणु तीन अन्य कार्बन परमाणुओं से सहसंयोजक आबन्धों द्वारा जुड़ा होता है, जिससे समतल षट्कोणीय वलय प्राप्त होता है। ग्रेफाइट के क्रिस्टल में कार्बन परमाणुओं की विभिन्न परतें काफी दूर-दूर होने के कारण ऊपर-नीचे की परतों में स्थित कार्बन परमाणुओं के बीच प्रबल सहसंयोजक आबन्ध नहीं बन पाते। ग्रेफाइट के क्रिस्टल में प्रत्येक कार्बन परमाणु के चार संयोजक इलेक्ट्रॉनों में से केवल तीन संयोजक इलेक्ट्रॉन आबन्ध बनाने में प्रयुक्त होते हैं तथा प्रत्येक कार्बन परमाणु का एक एक संयोजी इलेक्ट्रॉन स्वतंत्र रहता है। स्वतंत्र इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक हो जाता है। चूंकि ग्रेफाइट की विभिन्न परते दुर्बल बलों द्वारा जुड़ी है, इसलिए वे आसानी से एक दूसरे के ऊपर फिसल सकती है। 



प्रश्न 4. एक ही तत्व के विभिन्न परमाणुओं का शृंखलन का गुण कैटीनेशन कहलाता है। कार्बन व सिलिकॉन दोनों तत्वों द्वारा शृंखलन प्रदर्शित होता है। इन दोनों तत्वों के शृंखलन गुण की परस्पर तुलना कारण सहित कीजिए।



उत्तर कार्बन यौगिकों में जिस सीमा तक श्रृंखलन का गुण पाया जाता है, वह किसी और तत्व में नहीं मिलता। सिलिकॉन हाइड्रोजन के साथ यौगिक बनाते हैं, जिसमें सात या आठ परमाणुओं तक की शृंखला हो सकती है, लेकिन ये यौगिक अति अभिक्रियाशील होते हैं। जबकि C-C बन्ध अत्यन्त प्रबल होते हैं, अत: यह स्थायी होता है


फलस्वरूप अनेक कार्बन परमाणुओं के साथ आपस में जुड़े हुए अनेक यौगिक प्राप्त होते हैं। कार्बन की चतुः सहसंयोजकता होती है, अन्य तत्वों के साथ कार्बन द्वारा बनाए गए आबन्ध अत्यन्त प्रबल होते हैं, इसका कारण कार्बन का छोटा आकार है जबकि बड़ा परमाणु होने के कारण सिलिकॉन द्वारा बनाए गए आबन्ध कार्बन आबन्ध की तुलना में दुर्बल होते हैं। 


प्रश्न 5. जब साबुन को जल में डाला जाता है, तो मिसेल का निर्माण होता है, क्यों? क्या एथेनॉल जैसे दूसरे विलायकों में भी मिसेल का निर्माण होगा?




उत्तर साबुन का अणु दो सिरे वाला होता है-जलरागी (आयनिक भाग) तथा जलविरागी (हाइड्रोकार्बन भाग)। जब साबुन जल की सतह पर होता है, तब इसके अणु अपने को इस प्रकार व्यवस्थित कर लेते हैं कि इसका आयनिक भाग जल के अंदर होता है और हाइड्रोकार्बन भाग जल के बाहर होता है।


जब साबुन को जल में घोला जाता है तथा उसमें मैला कपड़ा भी रगड़ा जाता है, तब तैलीय धूल के कण हाइड्रोकार्बन भाग से तथा जल के अणु आयनिक भाग से जुड़ जाते हैं। अब ये सभी साबुन के अणुओं के आयनिक (ऋणात्मक) भाग बाहर की ओर तथा हाइड्रोकार्बन भाग भीतर की ओर व्यवस्थित होकर मिसेल बनाते हैं। इसका कारण यह है कि साबुन के आयनिक भागों में परस्पर आयन-आयन प्रतिकर्षण होता है।


ये कोलॉइड के रूप में रहते हैं तथा अवक्षेपित नहीं होते। वहीं, एथेनॉल अथवा दूसरे ऐसे विलायकों में साबुन के दोनों सिरे पूर्णतया घुल जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि एथेनॉल ध्रुवीय सहसंयोजी यौगिक है। अत: एथेनॉल जैसे दूसरे विलायकों में मिसेल का निर्माण नहीं होगा।



कार्बन के अपररूप एवं उनके गुण


कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति क्या होती है


हीरा, ग्रेफाइट तथा फुलेरीन पर संचिप्त टिप्पणी



यदि कोई तत्व, विभिन्न भौतिक रूपों में पाया जाता है, तो वे, उस तत्व के अपररूप कहलाते हैं। कार्बन के तीन प्रमुख अपररूप निम्नलिखित हैं 



हीरा


यह रंगहीन, पारदर्शी, अत्यधिक कठोर तथा उच्च अपवर्तन गुणांक के कारण अत्यन्त चमकीला है। हीरा प्रकृति में उपलब्ध पदार्थों में सबसे कठोर है। यह विद्युत का कुचालक है, परन्तु इसका गलनांक तथा ऊष्मीय चालकता अत्यधिक होती है।


ग्रेफाइट


यह काले-भूरे रंग का अपारदर्शी पदार्थ है। यह हीरे से हल्का, मुलायम एवं स्पर्श करने पर चिकना होने की अनुभूति देता है। यह विद्युत का अच्छा सुचालक है, परन्तु ऊष्मा का कुचालक है। ग्रेफाइट सर्वाधिक स्थायी अपररूप है।


फुलेरीन


C₆₀ का नाम बकमिंस्टरफुलेरीन (Buckminster fullerence) या बकी बॉल (Bucky Ball) C₆₀ की संरचना फुटबॉल जैसी होने के कारण रखा गया है। गोलाकार अणुओं के रूप में परस्पर जुड़े 60 कार्बन परमाणुओं के गुच्छों युक्त कार्बन (फुलेरीन) का अपररूप है। बकमिंस्टरफुलेरीन के अणु में 60 कार्बन परमाणु, षट्भुजीय और पंजभुजीय वलयों में व्यवस्थित होते हैं। C₆₀ सर्वाधिक क्रियाशील अपररूप है।



कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति


अनुमान के अनुसार, कार्बन के लगभग तीन मिलियन यौगिक वर्तमान में ज्ञात हैं। कार्बन द्वारा इतनी अधिक संख्या में यौगिकों का बनाना निम्नलिखित कारकों के कारण है


(i) शृंखलन यह कार्बन परमाणु में एक अद्वितीय गुण है, जिसके द्वारा कार्बन परमाणु परस्पर जुड़कर कार्बन परमाणुओं की विभिन्न प्रकार की लम्बी-लम्बी श्रृंखलाएँ बना सकते हैं। कार्बन का यह गुण श्रृंखलन कहलाता है।


(ii) चतुः संयोजी कार्बन कार्बन की संयोजकता चार होने के कारण, यह कार्बन के अतिरिक्त अन्य परमाणुओं जैसे-हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, हैलोजन (जैसे क्लोरीन) या सल्फर आदि के साथ सहसंयोजी आबन्ध बना सकता है, जिसके परिणामस्वरूप हमें कार्बन के असंख्य यौगिक प्राप्त होते हैं।


(iii) बहु आबन्ध बनाने की प्रवृत्ति अपने छोटे आकार के कारण कार्बन में सहसंयोजन द्वारा बहु-आबन्ध (द्वि-तथा त्रि-आबन्ध) बनाने की प्रवृत्ति अत्यधिक पायी जाती है। कार्बन विभिन्न यौगिकों में स्वयं से, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन तथा सल्फर आदि के साथ अनेक स्थायी यौगिक बनाता है।









प्रश्न.हाइड्रोजनीकरण क्या है? इसका औद्योगिक अनुप्रयोग क्या है?


अथवा 


वनस्पति तेल को घी में परिवर्तित करने के लिए सामान्यतः काम में आने वाली रासायनिक अभिक्रिया का नाम दीजिए। सम्बन्धित अभिक्रिया को विस्तार में समझाइए


उत्तर हाइड्रोजनीकरण असंतृप्त हाइड्रोकार्बनों (ऐल्कीन/ऐल्काइन) के साथ हाइड्रोजन की योग अभिक्रिया को हाइड्रोजनीकरण (Hydrogenation) कहते हैं। यह अभिक्रिया निकेल (Ni), पैलेडियम (Pd) आदि उत्प्रेरकों की उपस्थिति में होती है। 


औद्योगिक अनुप्रयोग जब वनस्पति तेलों में निकेल (Ni) उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन गैस को उच्च ताप पर प्रवाहित किया जाता है, तब वनस्पति घी बनता है। यह प्रक्रिया तेलों का कठोरीकरण कहलाती है।



प्रश्न . सजातीय श्रेणी की परिभाषा दीजिए। इसे एक उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।


अथवा सजातीय श्रेणी क्या है? उदाहरण के साथ समझाइए। 


 उत्तर जब कार्बनिक यौगिकों का सामान्य अणुसूत्र क्रियात्मक समूह समान हों तथा इन्हें अणुभार 14 के अन्तर से घटते हुए या बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित किया जाए, तो एक श्रेणी का निर्माण होता है, इसे सजातीय श्रेणी कहते हैं। 


उदाहरण CH₄(मेथेन), C₂H, (एथेन) 



प्रश्न. सहसंयोजी यौगिकों के दो गुण बताइए।


उत्तर (i) अन्तरा-आण्विक बल के कम होने के कारण सहसंयोजी यौगिकों के क्वथनांक एवं गलनांक कम होते हैं। 



(ii) सामान्यतः ये विद्युत के कुचालक होते है, क्योंकि परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी होती है तथा कोई आवेशित आयन उपलब्ध नहीं होता है।



प्रश्न . डिटर्जेन्ट के उपयोगों को उदाहरण द्वारा लिखिए।


उत्तर 


डिटरजेन्ट के उपयोग


(i) अपमार्जकों का प्रयोग कठोर जल के साथ किया जाता है क्योंकि यह ऐल्काइल बेंजीन सल्फोनेट से निर्मित होता है। 


(ii) अपमार्जकों का उपयोग घरों में बर्तनों व कपड़ों की सफाई के लिये किया जाता है। 



ईंधन और जीवाश्म ईंधन किसे कहते हैं कितने प्रकार के होते होते हैं



ज्वाला किसे कहते हैं कितने प्रकार की होती है





ईंधन


वे पदार्थ, जो जलने पर प्रकाश एवं ऊष्मा देते हैं, ईंधन कहलाते हैं। जैसे-कार्बन, हाइड्रोकार्बन आदि।



जीवाश्म ईंधन 

ये ईंधन, लम्बे समय पूर्व जो प्रागैतिहासिक पुराने पौधों तथा जन्तुओं (जीवाश्मों) के धरती में चट्टानों की परतों के नीचे दब गए थे, उनके विघटन से बनते हैं, जीवाश्म ईंधन कहलाते हैं।


कुछ प्रमुख जीवाश्म ईंधन निम्नलिखित हैं



1. कोयला


यह कार्बन, हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन के यौगिकों का जटिल मिश्रण है तथा इसमें कुछ मात्रा में मुक्त कार्बन के साथ नाइट्रोजन तथा सल्फर होते हैं। यह पौधों, फर्न तथा पेड़ों के विघटन से बनते हैं, जो लाखों वर्ष पूर्व पृथ्वी में दब गए थे।



2. पेट्रोलियम


प्रकृति में चट्टानों के नीचे दबा हुआ गाढ़ा, चिपचिपा, गहरे रंग वाला तथा विशिष्ट गन्ध वाला द्रव पाया जाता है। इस द्रव में C से C40-45 तक लम्बी श्रृंखला वाले ऐलिफैटिक यौगिक पाए जाते हैं इसलिए इसे पेट्रोलियम कहते हैं। ग्रीक भाषा में 'petra' का अर्थ चट्टान होता है तथा 'oleum' का अर्थ तेल होता है। ऐलिफैटिक हाइड्रोकार्बन पेट्रोलियम का मुख्य घटक है।




ज्वाला


यह, वह स्थान है जहाँ ईंधन के जलने के समय गैसीय पदार्थों का दहन होता है। ऑक्सीजन की मात्रा व ईंधन के दहन के आधार पर, ज्वाला दो प्रकार की होती है।


(i) नीली या अदीप्त ज्वाला पर्याप्त ऑक्सीजन की उपस्थिति में ईंधन का पूर्ण दहन होता है, जिससे नीली ज्वाला उत्पन्न होती है, किन्तु प्रकाश उत्पन्न नहीं होता। उदाहरण गैस स्टोव में LPG का दहन।


(ii) पीली या दीप्त ज्वाला अपर्याप्त वायु की पूर्ति की स्थिति में ईंधन का अपूर्ण दहन होता है, जिसके कारण बिना जले कार्बन कणों का निर्माण होता है, जो पीले रंग का प्रकाश उत्पन्न करते हैं। उदाहरण मोम के वाष्प का जलना।



साबुन किसे कहते हैं इसके निर्माण तथा शोधन की विधि


अपमार्जक किसे कहते हैं परिभाषा उदाहरण सहित

 

साबुन तथा अपमार्जक किसे कहते हैं



साबुन तथा अपमार्जक


उच्च अणु भार वाले मोनो कार्बोक्सिलिक अम्लों के सोडियम तथा पोटैशियम लवण साबुन कहलाते हैं। लम्बी श्रृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्लों के अमोनियम या सल्फोनेट लवण अपमार्जक कहलाते हैं। अपमार्जक की लम्बी हाइड्रोजन शृंखला का निर्माण तेल या वसा से न करके पेट्रोलियम से किया जाता है।


सफाई कार्य के लिए साबुन की अपेक्षा अपमार्जक अधिक प्रभावशाली होते हैं, क्योंकि अपमार्जक Ca²⁺एवं Mg²⁺आयनों के साथ अवक्षेप नहीं देते हैं जो जल की कठोरता के लिए उत्तरदायी होते हैं, जबकि साबुन इन आयनों के साथ अवक्षेप देते हैं। इन्हें साबुन-रहित साबुन भी कहा जाता है।


साबुन तथा अपमार्जक का निर्माण वसा अम्लों के ग्लिसरॉल एस्टरों को जलीय सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गर्म करने पर साबुन का निर्माण होता है। इस अभिक्रिया को साबुनीकरण (Saponification) कहते हैं।


वसा + सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) →साबुन + ग्लिसरॉल




(स्टिएरिक अम्ल का ग्लिसरॉल एस्टर) 





 साबुन के अणु की संरचना


रासायनिक रूप से साबुन के निम्न दो भाग होते हैं


(i) अध्रुवीय हाइड्रोकार्बन भाग यह भाग वसा में विलेय होता है। इसे जलविरोधी (Hydrophobic) अथवा वसा स्नेही (Lipophilic) भी कहते हैं।


(ii) ध्रुवीय हाइड्रोकार्बन भाग यह भाग जल में विलेय होता है। इसे जलस्नेही (Hydrophilic) अथवा वसाविरोधी (Lipophobic) भी कहते हैं।





साबुन की शोधन क्रिया (मिसेल निर्माण)


साबुन को जल में विलेय करने पर यह जल में कोलॉइडी निलंबन बनाता है, जिसमें साबुन के अणु परस्पर गुच्छे के रूप में एकत्रित होकर गोलाकार साबुन का मिसेल बनाते हैं।


मिसेल के रूप में साबुन अनेक वस्तुओं को (जैसे-वस्त्र, शरीर, पात्र आदि) स्वच्छ करने में सक्षम होता है, क्योंकि तैलीय मैल मिसेल के केंद्र में एकत्र हो जाते हैं। विलयन में मिसेल, कोलॉइड के रूप में बने रहते हैं तथा आयन-आयन विकर्षण के कारण अवक्षेपित नहीं होते। इस प्रकार, मिसेल में तैरते मैल को आसानी से हटाया जा सकता है। साबुन के मिसेल, अपने बड़े आकार के कारण प्रकाश को प्रकीर्णित कर सकते हैं। यही कारण है, कि साबुन का घोल बादल जैसा दिखता है।




यूपी बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण का सम्पूर्ण हल



up ncert class 10 science chapter 5 periodic classification of elements full solutions notes








तत्त्वों का आवर्त वर्गीकरण


Periodic Classification of Elements




आवर्त सारणी की प्रमुख विशेषताएं


1.तत्त्वों को उनके गुणधर्मों में समानता के आधार पर वर्गीकृत किया गया है।


2.डॉबेराइनर ने तत्त्वों को त्रिक में वर्गीकृत किया जबकि न्यूलैंड्स ने अष्टक का सिद्धान्त दिया।


3.मेण्डेलीफ ने तत्त्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान के आरोही क्रम तथा रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर वर्गीकृत किया।


4.मेण्डेलीफ ने आवर्त सारणी में खाली स्थानों के आधार पर नए तत्त्वों की भविष्यवाणी की।


5. मेण्डेलीफ की आधुनिक आवर्त सारणी में I से लेकर VIII समूह तथा उसके बाद 0 (शून्य) है।


6.तत्त्वों को परमाणु द्रव्यमान के आरोही क्रम में व्यवस्थित करने से होने वाली विसंगतियाँ, परमाणु संख्या के आरोही क्रम में व्यवस्थित करने से दूर हो गई। तत्त्व के इस आधारभूत गुणधर्म अर्थात् संख्या की खोज मोज्ले ने की।


7. आधुनिक आवर्त सारणी में तत्त्वों को 18 ऊर्ध्व स्तम्भों, जिन्हें समूह कहते हैं तथा 7 क्षैतिज पंक्तियों जिन्हें आवर्त कहते हैं, में व्यवस्थित किया।


8. इस प्रकार व्यवस्थित तत्त्व, परमाणु साइज, संयोजकता या संयोजन क्षमता तथा धात्विक एवं अधात्विक अभिलक्षण जैसे गुणधर्मों में आवर्तिता प्रदर्शित करते हैं।







बहुविकल्पीय प्रश्न           1 अंक




प्रश्न 1. आधुनिक आवर्त वर्गीकरण का आधार है 


(a) परमाणु भार 


(b) परमाणु क्रमांक


(C) संयोजकता 


(d) रासायनिक क्रियाशीलता





 उत्तर (b) मोजले ने सन् 1913 में परमाणु क्रमांक की खोज करने के पश्चात् यह सिद्ध किया कि परमाणु का आधारभूत गुण परमाणु क्रमांक है न कि परमाणु भार। इस आधार पर उसने एक नया नियम दिया, जिसे आधुनिक आवर्त नियम कहा जाता है। इस नियम के अनुसार, तत्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांकों के आवर्ती फलन होते हैं।


प्रश्न 2. निरूपक तत्व है


(a) Na 


(b) K


(c) Sc


(d) He



उत्तर (a) आवर्त सारणी में तीसरे आवर्त के तत्व निरूपक तत्व या प्रारूपिक तत्व कहलाते हैं। ये तत्व अपने-अपने समूह में उपस्थित अन्य तत्वों का आदर्श प्रतिनिधित्व करते हैं, अतः सोडियम (Na) प्रथम समूह का निरूपक तत्व है।


प्रश्न 3. यूरेनियम है


(a) क्षार धातु


(b) अधातु


 (C) स्थायी तत्व


(d) अन्तः संक्रमण धातु



उत्तर (d) अन्तः संक्रमण धातु


प्रश्न 4. सर्वाधिक धनविद्युती तत्व है


(a) Na


(b) Al


(c) F


(d) K


उत्तर (d) धनविद्युती लक्षण परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर बढ़ता जाता है। इसलिए, पोटैशियम (K) का धनविद्युती लक्षण सर्वाधिक है।


प्रश्न 5. आवर्त सारणी में बाईं से दाईं ओर जाने पर प्रवृत्तियों के बारे में कौन-सा कथन असत्य है? है



(a) तत्वों की धात्विक प्रकृति घटती 


(b) संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ जाती है


(c) परमाणु आसानी से इलेक्ट्रॉन का त्याग करते हैं


(d) इनके ऑक्साइड अधिक अम्लीय हो जाते हैं 


उत्तर (c) परमाणु आसानी से इलेक्ट्रॉन का त्याग करते हैं। यह कथन असत्य है, क्योंकि बाई से दाईं ओर जाने पर धात्विक गुण कम होता है। तथा अधात्विक (e ग्रहण करने का) गुण बढ़ता है।


प्रश्न 6.विकर्ण सम्बन्ध के तत्व हैं



(a) Li तथा Be


(b) LI तथा Mg


(c) Li तथा Na


(d) Al तथा Si



उत्तर (b) Li के गुण अपने से विकर्णतः स्थित Mg के गुणों के समान हैं। इस कारण लीथियम (Li), मैग्नीशियम (Mg) के साथ विकर्ण सम्बन्ध दर्शाता है।


प्रश्न 7. किस तत्व का ऑक्साइड उभयधर्मी है?


(a) C के


(b) Na के


(c) Mg के


(d) Sn के



 उत्तर (d) Sn के ऑक्साइड उभयधर्मी प्रकृति के होते हैं अर्थात् अम्ल तथा क्षार दोनों से क्रिया करते हैं।



प्रश्न 8. निम्न में से उभयधर्मी ऑक्साइड है


(a) Na₂O          (c) Al₂O₃


(b) MgO          (d) Po₅


उत्तर (c) Al₂O₃उभयधर्मी ऑक्साइड है अर्थात् अम्लीय व क्षारीय दोनों प्रवृत्ति दर्शाता है।


प्रश्न 9. निम्न में अम्लीय ऑक्साइड है


(a) Alp Os


(b) KO


(c) Mgo


(d) P₂O₅


उत्तर (d) अधात्विक ऑक्साइड अम्लीय होते हैं तथा फॉस्फोरस (P) एक अधातु है। P₂O₅जल में घुलकर अम्ल का निर्माण करता है।


PO +3H O2H, PO,


फॉस्फोरिक अम्ल


अत: B.O, अम्लीय ऑक्साइड है।


प्रश्न 10. निम्न में सर्वाधिक अम्लीय है।


(a) Bip


(b) Sb2O3. 


(c) N₂O₅


(d) AS 2 O 3


उत्तर (c) अधात्विक ऑक्साइड अम्लीय होते हैं तथा धात्विक लक्षण में वृद्धि के साथ अम्लीय लक्षण कम होता जाता है। किसी समूह (वर्ग) में नीचे जाने पर अधात्विक लक्षण में कमी होने के कारण अम्लीय लक्षण में भी कमी होती जाती है, अतः दिए गए ऑक्साइडों में से N₂O₅सर्वाधिक अम्लीय है।


नोट N, P, As, Sb तथा Bi समान वर्ग में इसी क्रम में रखे गए हैं।


प्रश्न 11. निम्न तत्वों में से किसकी विद्युत ऋणात्मकता सबसे कम है? 


(a) Na


(b) Mg


(c) Al


(d) S


उत्तर (a) सोडियम धातु का आकार अन्य धातुओं (Mg. Al, Si) से अधिक होने के कारण इसकी विद्युत-ऋणात्मकता सबसे कम होती है तथा विद्युत धनात्मकता का मान अधिक होता है।


प्रश्न 12. मुद्रा धातु है


(a) Zn


(b) Sn


(c) Pb


(d) Cu


उत्तर (d) Cu को मुद्रा धातु कहते हैं, क्योंकि इसका उपयोग मुद्रा के निर्माण में किया जाता है।


प्रश्न 13. निम्नलिखित में क्षारीय है


(a) Na 


(b) Be


(C) Al


(d) Zn


 उत्तर (a) सोडियम धातु आवर्त सारणी में तीसरे आवर्त के प्रथम वर्ग (समूह) का तत्व है। प्रथम वर्ग (समूह) के सदस्यों को क्षारीय धातुएं कहा जाता है।


प्रश्न 14.तत्व जो क्षारीय ऑक्साइड बनाता है, का परमाणु क्रमांक है।



(a) 18


(b) 17 


(c) 14


(d) 19


उत्तर (d) 19, जोकि पोटैशियम का परमाणु क्रमांक है तथा वर्ग-1 का सदस्य है। वर्ग-1 के सभी धातुएँ क्षारीय ऑक्साइड बनाते हैं।



प्रश्न 15. क्षार धातुएँ हैं


(a) Be, Mg, Ca 


(b) Li, Na. K


(c) B, Al Ga


(d) Cu, Ag. Au 



उत्तर (b) प्रथम वर्ग के तत्वों को क्षार धातुएँ कहते हैं तथा Li, Na. K प्रथम वर्ग के सदस्य है अर्थात् क्षार धातुएँ है।


प्रश्न 16. तृतीय आवर्त का तत्व है।


(a) , Na          (c) B


(b) 3 Sr           (d) 19K


उत्तर (a) परमाणु क्रमांक Na का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1है। इसमें 3 कोश उपस्थित है अतः यह तीसरे आवर्त का तत्व है। 



प्रश्न 17. निऑन है


(a) क्षार धातु


(b) अक्रिय गैस


(c) उपधातु


(d) संक्रमण तत्व


उत्तर (b) निऑन (Ne) एक अक्रिय गैस है।


प्रश्न 18. एक तत्व के क्लोराइड का सूत्र MCI, है। इसके ऑक्साइड का सूत्र है?


(a) MO₂


(b)MO


(c) M₂O₃


(d) M₂O


उत्तर (b) MO में तत्व M के क्लोराइड का सूत्र MCI, है अर्थात् इसमें M की संयोजकता +2 अत: इसके ऑक्साइड का सूत्र MO होगा।


प्रश्न 19. एक तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s², 2s² 2p⁶, 3s² 3p⁶ है| आवर्त सारणी में इसका स्थान होगा


अथवा परमाणु क्रमांक 17 वाले तत्व का आवर्त सारणी में स्थान है।


(a) आवर्त-3, वर्ग VA


(b) आवर्त -5, वर्ग II A


(c) आवर्त-3, वर्ग VIIA 


(d) आवर्त-2, वर्ग VIIA


उत्तर (c) परमाणु क्रमांक 17 वाले तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7 है इस तत्व की तीसरी कक्षा में 7 इलेक्ट्रॉन हैं, अत: यह सातवें (VII A) समूह के तृतीय आवर्त का तत्व है।


प्रश्न 20. तत्व X, XCl, सूत्र वाला एक क्लोराइड बनाता है, जो एक ठोस है तथा जिसका गलनांक अधिक है। आवर्त सारणी में यह तत्व संभवतः किस समूह के अंतर्गत होगा?


(a) Na


(b) Mg


(c) Al


(d) Si


उत्तर (b) Mgक्लोराइड बनाते हैं।

Cl की संयोजकता 1 तथा Mg की 2 है अतः ये MgCl, सूत्र वाला



प्रश्न 21. आधुनिक आवर्त वर्गीकरण का आधार है


(a) परमाणु भार


(c) संयोजकता


(b) परमाणु क्रमांक


(d) रासायनिक क्रियाशीलता


उत्तर (b) मोजले ने सन् 1913 में परमाणु क्रमांक की खोज करने के पश्चात् यह सिद्ध किया कि परमाणु का आधारभूत गुण परमाणु क्रमांक है न कि परमाणु भार। इस आधार पर उसने एक नया नियम दिया, जिसे आधुनिक आवर्त नियम कहा जाता है। इस नियम के अनुसार, तत्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांकों के आवर्ती फलन होते हैं।


प्रश्न 22. निरूपक तत्व है



(a) Na


(c) Sc


(b) K


(d) He


अथवा प्रारूपिक तत्व है।


(a) Na


(b) K


(c) Sc


(d) He


 उत्तर (a) आवर्त सारणी में तीसरे आवर्त के तत्व निरूपक तत्व कहलाते हैं। ये तत्व अपने-अपने समूह में उपस्थित अन्य तत्वों का आदर्श प्रतिनिधित्व करते हैं, अत: सोडियम (Na) प्रथम समूह का निरूपक तत्व है।


प्रश्न 23. विकर्ण सम्बन्ध के तत्व हैं



(a) Li तथा Be


(b) Li तथा Mg


(d) Al तथा Si


(c) Li तथा Na


उत्तर (b) Li के गुण Mg के गुणों के समान है। इस कारण लीथियम, मैग्नीशियम के साथ विकर्ण सम्बन्ध दर्शाता है। 


प्रश्न 24. Li विकर्ण सम्बन्ध दर्शाता है।



(a) Na के साथ