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संक्रामक वाइरस ,संक्रामक जीवाणु एवं विटामिंस की कमी से होने वाले रोग ।।Bacteria, Virus, Fungi, and Infectious Diseases

संक्रामक वाइरस ,संक्रामक जीवाणु एवं विटामिंस की कमी से होने वाले रोग 

Bacteria, Virus, Fungi, and Infectious Diseases

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नमस्कार दोस्तों हम आपको इस पोस्ट में संक्रामक वाइरस, संक्रामक जीवाणु ,ह्रास रोग,अभाव रोग से होने वाले विभिन्न रोगों के बारे में बताएंगे, आपको इस पोस्ट में बताएंगे कि कौन सा रोग किसकी वजह से होता है इसलिए आप पोस्ट को पूरा जरूर पढ़ें इससे आपको विभिन्न परीक्षाओं में भी लाभ मिलेगा यदि आप कुछ पूछना चाहते हैं तो कॉमेंट करके ज़रूर बताइएगा

 संक्रामक जीवाणु जनित रोग (Infetious Bacterial diseases)


1. तपेदिक (Tuberculosis) – फेफड़ों के ऊतकों को संक्रामित करता है तथा वायु प्रदूषण द्वारा फैलता है. (Mycobacterium tuberculosis) 


2. प्लेग (Plague ) — कुख्यात महामारी रोग. चूहे के पिस्सुओं द्वारा फैलता है. (Yersinia pestis) 


3. रोहिणी (Diptheria) – गले का रोग (Coryne- bacterium diptherial).


4. कोढ़ (Leprosy) – त्वचा एवं तंत्रिकाओं का रोग,

प्रसारण निकट तथा लम्बे स्पर्श सम्बन्ध से (Mycobacterium leprae).


5. टाइफाइड (Typhoid) - आँतों में संक्रमण (Salmonella typhii).


6. टिटनेस (Tetanus) – हनु तथा ग्रीवा रोग (Clos- tridium tetani).


7. हैजा (Cholera)—प्रदूषण द्वारा फैलने वाली महा- मारी (Vibrio cholerae).


8. गोनोरिया (Gonorrhoea) – यह वेनेरल रोग

(Veneral disease) है (Neisseria gonorrhoeae).


9. निमोनिया (Pneumonia) – श्वसन सम्बन्धी रोग

है.


10. कुकुर खाँसी (Whooping cough- Pertussis) - गले तथा फेफड़ों से सम्बन्धित रोग (Bordetella pertussis)


11. सुजाक (Gonorrhoea) – मूत्र जनन रोग, प्रसारण लिंगी सम्बन्धों द्वारा.


12. उपदंश (Syphilis) – जनन रोग, प्रसारण प्रदूषण अथवा लिंगी सम्बन्धों द्वारा.


[ संक्रामक वाइरस जनित रोग (Infection Viral diseases) ]


1.हरपिस (Herpes) — त्वचा रोग, संक्रमण स्पर्श द्वारा 

2.प्रतिश्याम (Influenza) — श्वसकीय रोग


3. पोलियो (Poliomyelitis) – तंत्रिका एवं पेशीय रोग


4.पीलिया (Jaundice)–यकृत रोग


5.जलभीति (Rabies) – तंत्रिका तंत्र एवं मस्तिष्क पर

6.खसरा (Measles )–बच्चों का सामान्य रोग


7.कनफेड़ा (Mumps)–लार ग्रन्थियों का फूलना


8.रोहा (Trachoma) – नेत्र रोग


9.कंजक्टवाइटिस (Cunjunctivitis) – नेत्र रोग


[ ह्रास रोग(Degenerative diseases) ]


1.आर्टेरियोस्क्लेरोसिस (Arteriosclerosis) - धमनियों का कठोर होना


2.हाइपरटेन्शन (Hypertension)–अधिक रुधिर 

दबाव 


3.ल्यूकेमिया (Leukemia)– रुधिर कैंसर 


4.प्रताप (Cataract) – नेत्र को लेन्स का अपारदर्शक हो जाना 



[ अभाव रोग (Deficiency diseases) ]


1.जीरोप्थेलमिया (Xerophthalmia) – विटामिन A की कमी से नेत्र के कार्निया का शुष्क हो जाना 


2.निक्टोलोपिया (Nyctalopia) - रतौंधी, विटामिन A की कमी के कारण


3.कवाशर कोर (Kwashiorkor) - प्रोटीन की कमी के कारण


4.बेरी-बेरी (Beriberi) – विटामिन B की कमी के 


5.स्कर्वी (Scurvy ) – विटामिन C की कमी के 


6.कारण रिकेट्स (Rickets) – बच्चों में विटामिन D की कमी के कारण


7.आस्टियोमेलेशिया (Osteomyelitis) –विटामिन D की कमी के कारण अस्थि रोग


8.हिमोरेज (Haemorrhage) – रक्तस्रावी रोग विटामिन K की कमी के कारण


[ अन्तःस्रावी रोग (Hormonal Diseases) ]


1.जाइजेटिज्म (Gigantism) - पीयूष ग्रन्थि की अग्र- पालिका से STH हॉरमोन के अधिक स्राव के कारण

2.मधुमेह इन्सीपीड्स (Diabetes insipidus)–वेसोप्रेसिन (ए. डी. एच.) की कमी के कारण


3. गॉइटर (Goiter) – थाइरॉक्सिन की कमी के कारण क्रिटीनिज्म तथा मिक्सोडिमा रोग भी


4. एक्सोप्थेलेमिक (Exopthalamic) – गोइटर थाइ- रॉक्सिन के अधिक स्राव के कारण


5.टिटेनी (Tetany) – पैराथारमोन के कम स्राव के कारण 


6.वाइरोलिज्म (Viralism) –ऐड्रीनेलीन के अधिक स्राव के कारण


7.मधुमेह (Diabetes ) –  इन्सुलिन के कम स्राव के कारण


8. एडीसन रोग (Addison's disease ) – कोर्टिन के कम स्राव के कारण


[ मनुष्य के रोगजनक प्रोटोजोआ (Important human pathogenic protozoa) ]


1.एन्टअमीबा हिस्टोलाइटिका (Entamoeba histo- lytica) – कोलन में पाया जाता है तथा एमीबाइस रोग का कारक है. प्रसारण संदूषण के द्वारा होता है।


2.एन्टअमीबा जिंजीवेलिस (Entamoeba gingi- velis) – मुख गुहा में पाया जाता है प्रसारण चुम्बन तथा संदूषण द्वारा तथा पायरिया का कारक है.


3.प्लासमोडियम (Plasmodium) – रुधिर तथा यकृत में पाया जाता है तथा मलेरिया रोग का कारक है,मादा एनाफेलीज वाहक का कार्य करती है।


4.ट्रिपेनोसोमा गैमबिनेंस (Trypanosoma gambi- ense ) – ट्रिपेनोसोइमियेसिस का कारक यह परजीवी रुधिर तथर लसिका में पाया जाता है तथा सी सी मक्खी द्वारा फैलता है।


5.लेशमानिया डोनोवेनी (Leishmania donovani) – लसिका एवं श्वेत रक्त कणिकाओं में कालाजार रोग तथा सैण्डमक्खी द्वारा प्रसारण होता है।


6.लेशमानिया ट्रोपिका (Leishmania tropica) – चर्म ऊतकों में ओरिएन्टल सौर करता है तथा सैण्ड मक्खी द्वारा प्रसारित होता है।


7.ट्राइकोमोनास बक्केलिस (Trichomonas bucca- lis) – मुख गुहा में पायरिया रोग तथा प्रसारण चुम्बन द्वारा संदूषण द्वारा।


8.गिआर्डिया - क्षुद्रान्त में डायरिया, प्रसारण संदूषण

द्वारा।


[ मुख्य रोग जनक हेलमिन्थ (Important human pathogenie helminth) ]


1.सिस्टोसोमा (Schistosoma) - रुधिर में सिस्टोसोमि- येसिस, जलीय पौधों में प्रदूषण द्वारा फैलता है.


2.टिनिया सोलियम ( Taenia solium) - आंत्र में टीनियेसिस रोग का कारक प्रसारण, प्रदूषिक माँस खाने से होता है।


3.एस्कैरिस लुब्रीक्वाइडिस (Ascaris lubricoides) - क्षुद्रान्त में एस्केरियेसिस तथा प्रसारण प्रदूषित भोजन के खाने से होता है.


4.एनसाइलोस्टोमा ड्यूडिनेल (Ancylostoma duo- denale ) – क्षुद्रान्त में पाया जाता है तथा लार्वा के भेदन द्वारा प्रसारण होता है।


5.ट्राइकिनेला स्पाइरेलिस (Trichinella spiralis) – आंत तथा पेशियों में पाया जाता है तथा ट्राइकिनोसिस रोग का कारक है. प्रसारण प्रदूषित माँस खाने से होता है।


6.बुचरेरिया बेन्क्रोफ्टाई (Wuchereria bancrofti) –  क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फाइलेरियेसिस अथवा हाथी पाँव नामक रोग का कारक है. लसिका तथा उपत्वचीय ऊतक में पाया जाता है।


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