UP Board Class 12 Hindi Paper 2026-27 PP6-7 Original + Full Solution 100 Marks
Class 12th hindi up board half yearly exam paper full solution 2026-27
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UP Board Class 12 Samanya Hindi Ardhvarshik Paper 2026-27 PP6-7 Original Paper Full Solution | 100 Marks
UP Board Class 12 Hindi Ardhvarshik Paper 2026-27
PP6-7 Original Paper + Full Solution
Subhansh Classes | Board Teacher द्वारा जाँचा गया हल
| Board | UP Board (UPMSP) |
| Class | 12th Samanya Hindi |
| Paper Code | PP6-7 Original (Page 1-4) |
| Marks / Time | 100 Marks / 3 Hours 15 Min |
| Telegram | https://t.me/subhansh111 |
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इस पोस्ट में: UP Board Class 12 Samanya Hindi Ardhvarshik Pariksha 2026-27 PP6-7 Original Paper का 100% Full Solution दिया गया है। Page-1 से Page-4 तक के सभी प्रश्नों का हल बोर्ड फॉर्मेट में।
Page-1: खण्ड-क बहुविकल्पीय प्रश्न (10x1=10 अंक)
क) द्विवेदी युग के लेखक हैं — सरदार पूर्णसिंह
ख) द्विवेदी जी द्वारा सम्पादित पत्रिका — सरस्वती
ग) 'जीवन और दर्शन' के रचनाकार — डॉ. सम्पूर्णानन्द
घ) 'आचरण की सभ्यता' के लेखक — अध्यापक पूर्ण सिंह
ङ) 'इन्द्रजाल' कहानी-संग्रह — जयशंकर प्रसाद
च) कविता में चार चाँद लगाने वाली — व्यंजना
छ) हिन्दी का प्रथम महाकाव्य — पृथ्वीराज रासो
ज) 'आल्हखण्ड' का दूसरा नाम — परमाल रासो
झ) भक्ति काल की रचना — सूर-सारावली
ञ) आदिकाल को अपभ्रंश काल कहा — चन्द्रधर शर्मा गुलेरी ने
ख) द्विवेदी जी द्वारा सम्पादित पत्रिका — सरस्वती
ग) 'जीवन और दर्शन' के रचनाकार — डॉ. सम्पूर्णानन्द
घ) 'आचरण की सभ्यता' के लेखक — अध्यापक पूर्ण सिंह
ङ) 'इन्द्रजाल' कहानी-संग्रह — जयशंकर प्रसाद
च) कविता में चार चाँद लगाने वाली — व्यंजना
छ) हिन्दी का प्रथम महाकाव्य — पृथ्वीराज रासो
ज) 'आल्हखण्ड' का दूसरा नाम — परमाल रासो
झ) भक्ति काल की रचना — सूर-सारावली
ञ) आदिकाल को अपभ्रंश काल कहा — चन्द्रधर शर्मा गुलेरी ने
Page-2: खण्ड-ख गद्यांश-पद्यांश व्याख्या (20 अंक)
प्रश्न 3: गद्यांश - पूर्वजों ने चरित्र और धर्म के संबंध में...
सन्दर्भ: पाठ 'राष्ट्र का स्वरूप' - लेखक डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल।
व्याख्या: हमारे पूर्वजों ने धर्म, ज्ञान, साहित्य और कला में महान पराक्रम किया। हम उनके गौरवशाली चरित्र को अपने जीवन में धारण करना चाहते हैं।
राष्ट्र-संवर्धन: अतीत जब वर्तमान पर भार न बनकर वरदान बनता है वही राष्ट्र-संवर्धन है।
प्रश्न 4: पद्यांश - कौन तुम? संसृति जलनिधि तीर...
सन्दर्भ: कामायनी के श्रद्धा सर्ग से - कवि जयशंकर प्रसाद।
व्याख्या: हे सुन्दरी! इस संसार रूपी सागर के किनारे लहरों द्वारा फेंकी गई मणि के समान तुम्हारी शोभा है, तुम कौन हो?
अलंकार: रूपक अलंकार।
सन्दर्भ: पाठ 'राष्ट्र का स्वरूप' - लेखक डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल।
व्याख्या: हमारे पूर्वजों ने धर्म, ज्ञान, साहित्य और कला में महान पराक्रम किया। हम उनके गौरवशाली चरित्र को अपने जीवन में धारण करना चाहते हैं।
राष्ट्र-संवर्धन: अतीत जब वर्तमान पर भार न बनकर वरदान बनता है वही राष्ट्र-संवर्धन है।
प्रश्न 4: पद्यांश - कौन तुम? संसृति जलनिधि तीर...
सन्दर्भ: कामायनी के श्रद्धा सर्ग से - कवि जयशंकर प्रसाद।
व्याख्या: हे सुन्दरी! इस संसार रूपी सागर के किनारे लहरों द्वारा फेंकी गई मणि के समान तुम्हारी शोभा है, तुम कौन हो?
अलंकार: रूपक अलंकार।
Page-2,3: खण्ड-ग जीवन परिचय + कहानी + खण्डकाव्य (15 अंक)
प्रश्न 5: वासुदेवशरण अग्रवाल / हजारी प्रसाद द्विवेदी:
जन्म 1904 लखनऊ / 1907 बलिया। कृतियाँ - पृथ्वीपुत्र, कला और संस्कृति, बाणभट्ट की आत्मकथा, अशोक के फूल, कबीर। भाषा संस्कृतनिष्ठ, शैली गवेषणात्मक।
प्रश्न 6: ममता कहानी का सार:
जयशंकर प्रसाद की कहानी 'ममता' में मुगल विधवा ममता चित्तौड़ छोड़कर झोपड़ी में रहती है, शेरशाह का वैभव ठुकराकर स्वाभिमान के लिए झोपड़ी जला देती है।
प्रश्न 7: महाराणा प्रताप खण्डकाव्य:
महाराणा प्रताप अदम्य वीर, स्वाभिमानी, देशभक्त। अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की, घास की रोटी खाई, हल्दीघाटी युद्ध उनके शौर्य का प्रतीक।
जन्म 1904 लखनऊ / 1907 बलिया। कृतियाँ - पृथ्वीपुत्र, कला और संस्कृति, बाणभट्ट की आत्मकथा, अशोक के फूल, कबीर। भाषा संस्कृतनिष्ठ, शैली गवेषणात्मक।
प्रश्न 6: ममता कहानी का सार:
जयशंकर प्रसाद की कहानी 'ममता' में मुगल विधवा ममता चित्तौड़ छोड़कर झोपड़ी में रहती है, शेरशाह का वैभव ठुकराकर स्वाभिमान के लिए झोपड़ी जला देती है।
प्रश्न 7: महाराणा प्रताप खण्डकाव्य:
महाराणा प्रताप अदम्य वीर, स्वाभिमानी, देशभक्त। अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की, घास की रोटी खाई, हल्दीघाटी युद्ध उनके शौर्य का प्रतीक।
Page-3,4: खण्ड-घ संस्कृत + व्याकरण + पत्र + निबंध (55 अंक)
प्रश्न 8: संस्कृत अनुवाद + सार: द्वारपाल बोला देव कोई विद्वान द्वार पर है, राजा ने कहा प्रवेश कराओ। सुखार्थी को विद्या नहीं मिलती, विद्यार्थी को सुख नहीं।
प्रश्न 9: मुहावरे: नौ दो ग्यारह होना = भाग जाना, अपना हाथ जगन्नाथ = अपना काम स्वयं करना उत्तम।
प्रश्न 10: अपठित गद्यांश सार: सुखी और निर्भय होना स्वाभाविक है। इसके लिए शील और शक्ति दोनों जरूरी - शील से हम दूसरों को भय नहीं देते, शक्ति से निर्भय रहते हैं।
प्रश्न 11-12: व्याकरण: वसन-व्यसन = वस्त्र-बुरी आदत, गृह-ग्रह = घर-नक्षत्र, मार्गदर्शक (तत्पुरुष), अनुपम, शुद्ध वाक्य - मैंने भोजन कर लिया है। शान्त रस - निर्वेद, वीर रस - उत्साह, रूपक - चरण-कमल, दोहा 13-11 मात्रा।
प्रश्न 13: पत्र: (i) हिन्दी प्रवक्ता पद हेतु जिला विद्यालय निरीक्षक को आवेदन (ii) बिजली समस्या हेतु अधिशासी अभियंता को पत्र।
प्रश्न 14: निबंध: साहित्य समाज का दर्पण, वनों की उपयोगिता, पर्यावरण प्रदूषण, पुस्तकालय का महत्व।
प्रश्न 9: मुहावरे: नौ दो ग्यारह होना = भाग जाना, अपना हाथ जगन्नाथ = अपना काम स्वयं करना उत्तम।
प्रश्न 10: अपठित गद्यांश सार: सुखी और निर्भय होना स्वाभाविक है। इसके लिए शील और शक्ति दोनों जरूरी - शील से हम दूसरों को भय नहीं देते, शक्ति से निर्भय रहते हैं।
प्रश्न 11-12: व्याकरण: वसन-व्यसन = वस्त्र-बुरी आदत, गृह-ग्रह = घर-नक्षत्र, मार्गदर्शक (तत्पुरुष), अनुपम, शुद्ध वाक्य - मैंने भोजन कर लिया है। शान्त रस - निर्वेद, वीर रस - उत्साह, रूपक - चरण-कमल, दोहा 13-11 मात्रा।
प्रश्न 13: पत्र: (i) हिन्दी प्रवक्ता पद हेतु जिला विद्यालय निरीक्षक को आवेदन (ii) बिजली समस्या हेतु अधिशासी अभियंता को पत्र।
प्रश्न 14: निबंध: साहित्य समाज का दर्पण, वनों की उपयोगिता, पर्यावरण प्रदूषण, पुस्तकालय का महत्व।
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